भारत देश के आंध्र प्रदेश राज्य की तिरुमाला पहाड़ियों में स्थित हैं तिरुपति बालाजी का मंदिर जो दुनिया के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है।आपको जानकर बहुत ही आश्रर्च होगा कि यह मंदिर विश्व का सबसे अमीर मंदिर में से एक है।

आंध्रा प्रदेश राज्य के चित्तूर जिले में स्थित बालाजी बहुत ही शक्तिशाली और ऊर्जावान हैं यहाँ रोजाना बेहिसाब चढ़ावा श्रद्धालूओं के माध्यम से आता है

तिरुपति बालाजी मंदिर को श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, श्रीनिवास और गोविन्द के नाम से भी पुकारा जाता है आंकड़ों के अनुसार यहाँ लगभग ६० से ७० हज़ार की तादाद में श्रद्धालु आते हैं.

तिरुपति बालाजी कलियुग में जागृत मंदिरों में से एक है. यहाँ कोई भी भक्त जिस भी इच्छाओं की मांग करते हैं हैं वह सब पूर्ण रूप से पूरी होती ही होती है.

tirupati balaji mein फिल्मी सितारों से लेकर kai राजनेता आदि सभी दर्शन करने ke liye aate हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर को अमीरों के मंदिर के नाम से भी पुकारा जाता है

ऐसा कहा जाता है की १५वीं शताब्दी में तिरुपति बालाजी मंदिर को ख्याति प्राप्त हुई. इतिहासकारों का ऐसा भी मानना है कि ५वीं शताब्दी में यह मंदिर हिंदुओं का प्रमुख धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता था। ९वीं शताब्दी में कांचीपुरम के पल्लव शासकों के द्वारा इस मंदिर पर कब्जा कर लिया गाय। तमिल साहित्य में तिरुपति बालाजी को त्रिवेंगम भी कहा गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की उत्पत्ति वैष्णव संप्रदाय के द्वारा हुई थी.

ऐसा माना जाता है कि balaji को उनका एक भक्त रोज बहुत ही दुर्गम पहाड़ियों को पार कर बालाजी को दूध चढ़ाने के लिए आया करता था भगवान अपने भक्त की भक्ति और उसके द्वारा किये जा रहे कठिन प्रयासों को देखकर यह निर्णय करते हैं की वो रोज अपने उस भक्त की गौशाला में जाकर दूध का पान करके स्वयं आ जाएंगे. बालाजी ने ऐसा करने के लिए मनुष्य का रूप धारण किया. जब एक बार उस भक्त ने बालाजी को दूध पीते देखा तो उसने गुस्से में आकर उन पर प्रहार कर दिया। भक्त तो नहीं जानता था की वह स्वयं बालाजी ही हैं.

आप जब tirupati balaji के मंदिर में जाएंगे तो देखेंगे की इस मंदिर के मुख्य द्वार के दरवाजे के दाईं तरफ एक छड़ी को रखा गया है यह वही छड़ी है जिससे बालाजी की बचपन में पिटाई की गई थी जिस पिटाई के कारण उनके ठुड्डी में चोट भी लग गई बस तब से लेकर आज तक बालाजी की ठुड्डी में चन्दन का लेप लगाया जाता है जिसके द्वारा उनका घाव भर जाए.

बालाजी मंदिर से कोई २३ किलोमीटर दूर एक गाँव स्थित है उस गाँव में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। इस गावं के सभी लोग मान मर्यादा और नियम के साथ रहते हैँ। ऐसा भी कहा जाता है की यहाँ पर महिलाएँ ब्लाउज नहीं पहनती और बहुत ही नियमों का पालन कर शुद्धता और पवित्रता को बनाये रखती हैं. वहीँ से लाए गये फूल भी भगवान को चढाए जाते है और इसी गावं की ही सभी वस्तुओं को चढाया भी जाता है जैसे- दूध घी माखन आदि आदि.

प्राकृतिक खूबसूरती से लबालब तिरुपति बालाजी का यह मंदिर पहाड़ी श्रृंखला की सात चोटियों के साथ बहुत ही अद्भुत नजर आता है. ऐसा भी माना जाता है कि ये ही सात चोटियां भगवान शेषनाग के सात सिर को दर्शाती हैँ। भगवान विष्णु/बालाजी का मंदिर सातवी चोटी वेंकटाद्री पर विराजित है यही एक कारण है की तिरुपति बालाजी को वेंकटेश्वर के नाम से जाना जाता है। यहाँ की परंपरा और प्रथा के अनुसार कोई भी मांगी गई मन्नत जरूर पूरी हो जाने पर यहां श्रद्धालु अपने केश को भगवान् तिरुपति जी को चढ़ाते है.

तिरुपति बालाजी के मंदिर का मुख्य भाग ‘अनंदा निलियम’ देखने में बहुत ही आकर्षक है। इसी ‘अनंदा निलियम’ में भगवान श्रीवेंकटेश्वर सात फूट ऊंची प्रतिमा के साथ विराजित हैं।

मंदिर में स्थित तीन परकोटों पर स्वर्ण कलश बहुत ही लुभावने और अपनी और आकर्षित करने वाले हैं. तिरुपति बालाजी के मंदिर के अंदर आपको बहुत ही खूबसूरत मूर्तियां देखने को मिलेंगी जो आपको भाव विभोर कर आनंद के महाराज्य में प्रविष्ट करा देंगी.

Mystry of Tirupati balaji Kitchen

सबसे महत्वपूर्ण और आश्चर्य चकित कर देने वाला इस मंदिर में यहाँ की रसोई घर है. मंदिर से ज्यादा अद्भुत और हैरान कर देने वली यह रसोई जहाँ रोजाना ३ लाख लड्डुओं का निर्माण होता है।

सबसे बड़ी बात तो यह है की इन लड्डुओं को बनाने के लिए यहां के कारीगर अभी भी तीन सौ साल पुरानी पारंपरिक विधि का ही प्रयोग करते हैं। और लड्डुओं का निर्माण बालाजी मंदिर में उनकी गुप्त रसोई में ही किया जाता है। इस गुप्त रसोईघर को पोटू के नाम जानते हैँ।

How to reach at Balaji Temple

तिरुपति बालाजी मंदिर सिर्फ आंध्र प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में अपना एक बहुत ही विशेष स्थान रखता है आप तिरुपति बालाजी मंदिर में तीनों मार्गों के द्वारा पहुंच सकते हैं। यहाँ पर नजदीकी हवाईअड्डा तिरुपति एयरपोर्ट है। आपको रेल मार्ग के लिए यहां के तिरुपति रेलवे स्टेशन का सहारा लेना होता है. आप चाहते हैं तो सड़क मार्गों से भी यहाँ पहुंच सकते हैं।

Why Shri tirupati balaji is famous for

तिरुपति मंदिर की यात्रा तभी पूरी होती है जब उनकी पत्नी माँ पद्मावती जो कि साक्षात श्री लक्ष्मी जी का अवतार थीं के मंदिर की यात्रा की जाए। माँ पद्मावती का मंदिर तिरुपति बालाजी मंदिर से लगभग पांच किलोमीटर दूर है।

तिरुपति बालाजी मंदिर में मूर्ति की सफाई के लिए विशेष तरह का कपूर प्रयोग में लाया जाता है। जब यह कपूर दीवार पर लगाया जाता है तो वह टूट जाता है। परन्तु जब बालाजी की मूर्ति पर लगाया जाता है तो ऐसा कुछ भी नहीं होता।

स्पष्ट रूप से यह बात सत्य है की तिरुपति बालाजी की मूर्ति हमेशा नम रहती है।

बालाजी मंदिर के गर्भगृह में जलने वाले चिराग कभी भी बुझते नही हैं न जाने कितने ही हजार सालों से जल रहे हैं किसी को पता भी नही है।

तिरुपति में बालाजी को सजाने के लिए धोती तथा साड़ी का प्रयोग होता है। बालाजी को ऊपर से साड़ी और नीचे से धोती पहनाई जाती है।

आप यदि बालाजी की पीठ को जितनी भी बार साफ कर लो परन्तु वहां पर गीलापन रहता ही है और यदि आप वहाँ पर कान लगाएं तो आपको समुद्र घोष सुनाई देता है।

यही सब कारण है जो अभी भी इस कलियुग में भी चेतन अवस्था में है. जिसकी वजह से तिरुपति बालाजी मंदिर सुप्रसिद्ध मंदिर है। तिरुपति बालाजी का मंदिर एक दर्शनीय स्थल है। जो भी भक्त यहाँ पर अपनी सच्ची श्रद्धा के साथ भगवान बालाजी के दर्शन के लिए आता है उसकी सभी मनोकामना पूर्ण रूप से अवश्य पूरी होती है।