Shri Chaitanya

Sri Chaitanya आख़िरकार कलियुग में आ ही गए कृष्ण Leave a comment

Who is Lord Shri Sri Chaitanya Mahaprabhu?

SRI CHAITANYA MAHAPRABHU 15 वी शताब्दी  के आध्यात्मिक वेदों के महाज्ञानी थे जिन्हें भगवान कृष्ण का अवतार भी माना जाता हैं।
उन्होंने गौड़ीय वैष्णवीसम सम्प्रदाय का खोज किया. जिन्होंने Lord Vishnu के आराधना में अपने जीवन को समर्पित कर दिए जिनसे उन्हें अंतर आत्मा का सुख प्राप्त हुआ।


Sri chaitanya Mahaprabhu: His Life and Precepts

श्री चैतन्य महाप्रभु ने ही बड़ा प्रसीद मंत्र “हरे कृष्ण हरे कृष्णा कृष्ण कृष्ण हरे हरे ” हमे दिया हैं। उन्होने ही संस्कृत प्रार्थना ‘ सिक्सस्तकं ‘ को मिलाकर निर्मित किया।

When was Sri chaitanya mahaprabhu born?


भगवान SRI CHAITANYA MAHAPRABHU का जन्म 18 फ़रवरी सन 1486 में धकदाक्षिण ,गोपालगंज के एक गाँव में हुआ था।
उनके पिता का नाम जगन्नाथ मिश्रा और माता का नाम साची देवी था।
एक और धारणा के अनुसार MAHAPRABHU का जन्म मायापुर में बताया जाता है।

Sri chaItanya mahaprabhu biography in hindi

पौराणिक कथाओं के अनुसार SRI CHAITANYA MAHAPRABHU Birth पूर्ण चंद्रग्रहण रात में हुआ था।
नीम के वृक्ष के नीचे जन्म होने के कारण इन्हें नीमाइ के नाम से भी जाना जाता है ।
इनके जन्मदिवस को लोग गौर पूर्णिमा के रूप मे मानते है।

Shri Chatanya mahaprabhu mahabhav position

Life of Sri Chaitanya Mahaprabhu

चैतन्य ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा नडिया में प्राप्त की। बारह वर्ष की आयु में वो संस्कृत व्याकरण के पंडित बन गए।
सोलह के  वर्ष की आयु में SRI CHAITANYA MAHAPRABHU ने स्वयं का विद्यालय आरंभ किया।
उनकी ख्याति चारों दिशाओं में फैलने लगी। लोग उनके शिष्य बनने लगे।  छोटी सी उम्र उन्होंने विख्यात  पंडित केशव कश्मीरी को वाद विवाद मे परास्त कर दिया था।
कहा जाता है की माँ सरस्वती ने स्वप्न में केशव पंडित को चैतन्य के वास्तविकता का बोध करवाया था,जिसके पश्चात अगले ही दिन उन्होंने अपनी पराजय स्वीकार कर ली थी  ।

Sri Chaitanya mahaprabhu in hindi

पिता के मृत्यु के पश्चात ,चैतन्य ने उनके शांति हेतु गया में पूजन करवाया। गाय में उनकी मुलाक़ात ईश्वर पूरी से हुई,जो बाद में जाके उनके गुरु बने।
गया से लौटने के बाद उनके विचार में बहुत परिवर्तन आया। कुछ समय बाद उन्होंने बंगाल छोर दिया.
और SHRI CHATANYA MAHAPRABHU सन्यास की शिक्षा लेने केशवा भारती के शरण में चले गए।
उसी क्षण से सत्य की तलाश में उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया।

Who is gauranga mahaprabhu and sri chaitanya mahaprabhu?

चैतन्य MAHAPRABHU ही गौरांग के नाम से विख्यात हुए। भक्ति योग को चैतन्य ने परम सत्य का मार्ग बताया।
भक्ति योग का अर्थ है उस परम पिता के प्रति हमारा प्रेम , हमारी भक्ति।
SRI CHAITANYA ने श्री कृष्ण नाम के जाप के साथ भक्ति योग का पालन किया तथा पूरे भारतवर्ष में भक्ति योग का प्रचार किया।

Sri Chatanya Mahaprabhu – For the Pleasure of Lord Krishna.

सन 1515 में चैतन्य ने वृन्दावन में अपने विचारो को लोगों तक पहुंचाया।
अपने जीवन काल में चैतन्य ने  पूरे भारत के सभी महत्वपूर्ण जगहों का भ्रमण किया और लोगों को भक्ति से अवगत करवाया।
उन्होंने अपने जीवन के अंतिम 24 वर्ष पूरी,ओड़ीशा में गुजारे।

Who is the guru of Sri chaitanya Mahaprabhu?

SRI CHAITANYA जब 17 साल के थे तब उन्होंने अपनी शुरुआती आध्यात्मिक शिक्षा इस्वर पूरी जो कि एक वैष्णव सन्यासी थे उनसे प्राप्त की।
उनके बंगाल लौटने के बाद वह धार्मिक पंडित के रूप में तबदील हो चुके थे और आगे जाने के बाद वह नदिया में वैष्णव दल के प्रतिनिधि भी बने।


What is Sri chaitanya Charitamrita?

चैतन्य चरितमृता SHRI CHATANYA MAHAPRABHU के जीवन और शिक्षा का एक प्राचीन संग्रह है।
इसकी रचना कृष्ण दास कविराज ने सन 1496 में बंगाली भाषा में की थी। इसकी रचना तीन भागो में की गयी थी ।
इन तीन भागों को आदि लीला,मध्य लीला और अनंत्य लीला का नाम दिया गया।
चैतन्य चरितमृता की पुनर्रचना 1970 में भक्तिसिद्धांता सरस्वती ने की।

Is Sri chaitanya Mahaprabhu really Lord Krishna reincarnated?

1 कृष्ण परम सत्य हैं।
2 कृष्ण सभी रस – स्वाद, गुणवत्ता, या आध्यात्मिक उत्साह / भावनाओं का स्रोत हैं।
SRI CHAITANYA MAHAPRABHU द्वारा दी गयी शिक्षा के दस मूल तत्व  है।
3 सभी जीव भगवान के सभी अलग हिस्से हैं।
4 बाध्य अवस्था में जीव अपने तटस्थ स्वभाव के कारण तत्व के प्रभाव में होता है।

What is the meaning of Sri chaitanya meaning?

5 मुक्त अवस्था में जीव अपने तत्त्व स्वभाव के कारण द्रव्य के प्रभाव से मुक्त होते हैं ।
6 जीव और भौतिक संसार दोनों ही प्रभु से भिन्न और समान हैं। SRI CHAITANYA MAHAPRABHU ने बताया की
7  कृष्ण सभी ऊर्जाओं से संपन्न हैं।
8 शुद्ध भक्ति जीव का अभ्यास है।
9 कृष्ण का शुद्ध प्रेम ही अंतिम लक्ष्य है।
10 कृष्ण को प्राप्त होने वाला एकमात्र प्यारा आशीर्वाद हैं।

Shri Chatanya Dances Ecstaticly

Who is Gaura Nitai and Shri Chatanya mahaprabhu?

SRI CHAITANYA MAHAPRABHU को उनके गोरे रंग के कारण गौरा भी कहा जाता है और श्री नित्यानन्द  प्रभु को नितई भी कहा जाता है।
लोग इन्हे कृष्ण और बलराम का अवतार भी मानते है।

Discuss the contribution of Sri Chaitanya Mahaprabhu

नित्यानद प्रभु और MAHAPRABHU जी ने साथ में भक्ति योग का प्रचार किया।
वैष्णव गुरुओं का मानना है की अगर कोई SRI CHAITANYA MAHAPRABHU के जीवन को समझना चाहता है तो बिना नित्यानन्द प्रभु के जीवन को जाने ये संभव नहीं है।

Who was Sri Chatanya mahaprabhu wife?

चैतन्य का विवाह चौदह वर्ष की आयु में लक्ष्मी देवी से हुआ। लक्ष्मी देवी ,नाडिया के रहने वाले बल्लभ आचार्या की पुत्री थी।
विवाह के बाद SRI CHAITANYA MAHAPRABHU दो वरसों तक पारिवारिक जीवन जिया तत्पश्चात उन्होंने सन्यास ले लिया।

How Shri Chaitanya mahaprabhu died?

MAHAPRABHU के मृत्यु की बहुत सारी कथाएँ   प्रचलित है। कुछ लोगों का मानना है की वो भगवान श्री कृष्ण के अवतार थे
और उनकी मृत्यु नहीं हुई,वही कुछ लोगों का मानना है की वो चमत्कारिक रूप से गायब हो गए।
इतिहासकारों का मानना है की SHRI CHATANYA MAHAPRABHU मिर्गी रोग से ग्रशीत थे,
परन्तु वह कोई मिगी की बीमारी नहीं ईश्वर के निरंतर भाव अवस्था में रहने के कारण अचेत पड़े रहते थे.
और महाप्रभु की मृत्यु नहीं हुई थी बल्कि वह शशरीर ठाकुर ग के विग्रह में विलीन हो गए.

चेतना, चित्त, चैतन्य इन शब्दों के अर्थ क्या हैं?

SRI CHAITANYA MAHAPRABHU स्वयं हमेशा श्री नित्य वृन्दावन धाम में ही रहते थे. शरीर तो यहाँ केवल मात्र भक्ति का आस्वादन भक्तों को देने के लिए था.
“चित्” जिसका अर्थ होता है – चेतन होना।
जिससे हर प्राणी चैतन्य दिखता है वह है चेतना, स्थूल शरीर की चेतनता समाप्त हो जाती है,
जब किसी के शरीर से चेतना बाहर निकल जाती है और वह प्राणी मृत कहा जाता है तथा वह तब चैतन्य नहीं कहा जाता।
चेतना आत्म तत्व के कारण से ही होती है.
मन व बुद्धि दोनों ही चित्त का उपयोग कार्यों के निष्पाददन में करते हैं।
चित्त स्मृति है जिसमें पूर्व व इस जन्म के कर्मों से बने हुए संस्कार हैं।

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