Shiva Puja

Shiva Puja | Shiv ki Pooja kaise kare Leave a comment


Shiva Puja

शिव जो ज्ञान अज्ञान के अतीत पूजा विधि औपचारिकताओं  के अतीत| फिर भी भक्त तो अपने प्रभु को कैसे प्रसन्न करें, कैसे उनसे प्रीती बढ़ाये बस हर समय हर संभव प्रयास में लगा ही रहता है| Shiva Puja तो आप किसी भी काल, मुहूर्त, किसी भी देश और किसी भी परिस्थिति में कर सकते हैं|


How do you do Lord Shiva Puja?

यह बात सही  है परन्तु यह अवस्था भी एक उच्च कोटि के साधक की होती है| जो समत्वं में स्थिर हो चूका है| जो सर्वथा हर जगह अपने ईश को ही विराजमान देखता है| अब बात आती है, हम जैसे मनुष्यों के लिए जिनका मन चंचल है, स्थिर नहीं है| उनको तो नियम विधि माननी ही पड़ेगी|  जिससे मन को एकाग्रचित किया जा सके|  अपने प्रभु के प्रति प्रीती को उन्नत की जा सके|

Shiva Puja


Why shiv pooja is in shravan?

श्रावण मास जो शिव को बहुत प्यारा है| इस मास में किसी भी तिथि या दिन खासकर सोमवार को प्रातः काल उठकर सुन्दर वस्त्र पहन कर बिल्व पत्र के पांच सात या नौ पत्ते अर्पित करें|  शिव को अक्षत जो पूर्ण हो टूटे न हो चढ़ाएं|

Shiv Pooja ki Vidhi kya hai?

शिव को गंगा जल या कोई भी जल किसी भी पात्र में लेकर गंध चन्दन पुष्प अर्पित करें| ये सब आप किसी भी शिवालय में या किसी भी बिल्व के पेड के नीचे आप Shiva Puja सकते हैं| आप इन मंत्रो का जाप भी करें |

Shiv ki Pooja kaise kare?

ॐ ब्रह्म ज्ज्ञानप्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरुचो वेन आवः|

स बुध्न्या उपमा अस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसतश्च विवः||

ध्यान रहे आप शिवलिंग को स्नान कराएं तो इस मंत्र का जाप अवश्य करें

ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य सकम्भ सर्ज्जनीस्थो|

वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमासीद्||

Shiva Puja

Kya hai shiv pooja mantra

पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा भगवान शिव को पुष्प समर्पण करें |

ॐ नमः पार्याय चावार्याय च नमः प्रतरणाय चोत्तरणाय च| नमस्तीर्थ्याय च कूल्याय च नमः शष्प्याय च फेन्याय च||

इस मंत्र के द्वारा भगवान चन्द्रशेखर को नैवेद्य अर्पण  करें|

ॐ नमो ज्येष्ठाय च कनिष्ठाय च नमः पूर्वजाय चापरजाय च| नमो मध्यमाय चापगल्भाय च नमो जघन्याय च बुधन्याय च||

इस मंत्र से भगवान शिवजी को बिल्वपत्र समर्पण करें

दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनं पापनाशनम्| अघोरपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्||

 

How can I attract Lord Shiva?

शिव तो प्रेम के भूखे हैं| कोई उन्हें प्रेम से एक बिल्वा का पत्ता भी चढ़ा दे तो वो उसी में भक्तो के पास खींचे चले आते हैं| असल बात है आप के मन की आप की श्रद्धा, आपका प्रेम , आप किस जगह पर हैं, किस प्रकार के वस्त्र पहने हैं, क्या कर रहे हैं,  इनसे कोई मतलब नहिं होता| भगवान् शिव वो तो बस मन देखते हैं| आपका मन विचार शुद्ध होने चाहिए, बस यही एक प्रेमी की उसके प्रभु के लिए उसकी Shiva Puja.

Why is ketaki flower not offered to Lord Shiva?

वेदो और पुराणों के अनुसार शिव जी को केतकी या अन्य खुशबूदार फूल नहीं चढ़ाये जाते है| इसका कारण है जब ब्रह्मा और विष्णु सृष्टि के आरम्भ में एक विशाल शिवलिंग की नापने के लिए बड़े| जिसमे विष्णु भगवान् निराश होकर वापस आ गए, परतु ब्रह्मा चालकी से एक केतकी का पुष्प तोड़कर यह कह के आये की इस शिवलिंकग के शीरे पर यह फूल है, जो मैं लाया हूँ, अर्थात मैंने यह शिवलिंग को नाप लिया है और मैं ही श्रेष्ठ हूँ |


 

Shiva Puja

Kyo bhagvaan shiv ke poojan mein ketaki ka pushp nahi chadate

भगवान् शंकर ने बताया मैं ही इस सृष्टि का मध्य, अंत, आरम्भ भी हूँ | जिसे नापना असंभव है | आपने छल से यह केतकी का पुष्प दिखा कर इस में विजयी होने का प्रयास किया है| तब बृह्मा को शाप दिया की आज के बाद यह केतकी का फूल मेरी पूजा में नहीं चढ़ेगा| इसी कारण केतकी का फूल Shiva Puja में अर्पित नहीं किया जाता है|

Why Lord Shiva is Worshipped in the form of Linga?

शिव लिंग का मतलब है, यह ब्रह्माण्ड|  शिवलिंग प्रकृति और पुरुष अर्थात शिव और पार्वती के अनादि-आदि एकल रूप को प्रदर्शित करता है| पुराण के अनुसार भगवान शिव ही पूर्ण पुरूष और निराकार ब्रह्म हैं। इसी के प्रतीकात्मक रूप में शिव के लिंग की पूजा की जाती है।

Shiv ke ling ki puja kyu hoti hai?

भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर हुए विवाद को सुलझाने के लिए एक दिव्य लिंग प्रकट किया था। इस लिंग का आदि और अंत ढूंढते हुए ब्रह्मा और विष्णु को शिव के परब्रह्म स्वरूप का ज्ञान हुआ। इसी समय से शिव के परब्रह्म मानते हुए उनके प्रतीक रूप में लिंग की पूजा आरंभ हुई।

Whether Tulsi should used in shiv puja?

तुलसी पत्ता:जलंधर नामक असुर की पत्नी वृंदा के अंश से तुलसी का जन्म हुआ था| जिसे भगवान विष्णु ने पत्नी रूप में स्वीकार किया है। इसलिए तुलसी से Shiva Puja नहीं होती।

Kyon Shivaling par kabhi na chadaye tulsi ke patte?

शिवपुराण के अनुसार असुर जालंधर की पत्नी तुलसी के मजबूत पतिधर्म की वजह से उसे कोई भी देव हरा नहीं सकता था। इसलिए भगवान विष्णु ने तुलसी के पतिव्रत को ही खंडित करने की सोची। वह जालंधर का वेष धारण कर तुलसी के पास पहुंच गए, जिसकी वजह से तुलसी का पतिधर्म टूट गया और भगवान शिव ने असुर जालंधर का वध कर उसे भस्म कर दिया।

Can we do shiv puja in noon time?

भक्त और भगवान् का सम्बन्ध अतुलनीय है| यहाँ पर अपने भगवान् की पूजा करने का कोई समय नहीं होता| हाँ वेद पुराणों के अनुसार आप इन विधि नियमों का पालन कर सकते हैं| इस कलियुग में तो हरी नाम ही एक सहारा है| अब आप चाहे किसी भी मुहूर्त में या किसी भी काल Shiva Puja में करें, आपका मन शुद्ध होना चाहिए चित्त शुद्ध होना चाहिए|

shiv puja

Kya shiv ki pooja din main kar sakte hain?

अंततः इस मनुष्य जीवन का तो एक ही लक्ष्य है, ईश्वर से प्रेम अपना और ईश्वर के बीच के सम्बन्ध को जानना। अगर आप करना चाहे तो नियमनुसार प्रातः काल में ब्रह्म मुहूर्त सबसे उचित होता है। क्योकि उस समय सब शांत और मन प्रफुल्लित होता है ।  हमारी आतंरिक शक्ति उच्च अवस्था में होती है। शिव पूजा भी उसी समय आप कर सकते हैं।

If a Person is struggling in life and only death can give him peace is shiv puja effective for his relief?

जीवन का सत्य तो मृत्यु ही है। परन्तु चिता में जाते जाते अगर हमरी चेतना जागृत चिता जाए तो यह मनुष्य जीवन सफल हो जाए। आप जो भी पुण्य अच्छे कर्म करते हैं, उसका यही एक मात्रा उद्देश्य होता है, कैसे प्रभु में भक्ति उत्पन्न हो ताकि अंत समय में प्रभु नाम स्मरण हो और मुक्ति प्राप्त हो।

Ant samay mein kya karen?

अंत समय में  मृत्यु शय्या पर बैठे व्यक्ति के सम्मुख “निर्वाण-षटकम्” का जाप करना चाहिए। आप गीता पाठ भी कर सकते हैं।

“निर्वाण-षटकम्”

मनो बुद्धि अहंकार चित्तानि नाहं
न च श्रोत्र जिव्हे न च घ्राण नेत्रे |
न च व्योम भूमि न तेजो न वायु:
चिदानंद रूपः शिवोहम शिवोहम ||

यही सब आपकी Shiva Puja है, अर्थात ईश्वर से प्रेम कैसे हो, कैसे उनसे आपका सम्बन्ध पुनः स्थापित हो जाए| यही शिव पूजा है |

Om Namah Shivay.

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