Shiv Mantra

Shiv Mantra- Mantra se Shiv dham tak 1

Shiv shankar

सबसे भोले सबसे मीठे और सभी के मन की इच्छाओं को सहजता से सुनने वाले हमारे शिव भोलेनाथ हैं। (Shiv Mantra) भगवान् शिव सभी का कल्याण करते हैं। शिव ही सत्य है। शिव महाकाल हैं। शिव देवों के देव महादेव हैं। शिव सबकुछ हुए हैं। जो कुछ हम देखते हैं वह सब कुछ शिव ही हैं।


Om Namah Shivaya || Popular Shiv Mantra || Shravan Maas Special Mantra

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय
मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:॥


Shiv Panchakshar mantra

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय
श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:॥

अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।। (Shiv Mantra)

Shiv Mantra

सौराष्ट्रे सोमनाथं – द्वादश ज्योतिर्लिंग!

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ।।

कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय।
सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे।।

ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य सकम्भ सर्ज्जनीस्थो |
वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमासीद् || (Shiv Mantra)

Shiv gayatri mantra

‘ऊं तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात।’

 Top Shiva Songs || Shiv Aarti || Shiv Mahima || Shiv Mantra || Lord Shiva Songs

1- ॐ ब्रह्म ज्ज्ञानप्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरुचो वेन आवः |
स बुध्न्या उपमा अस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसतश्च विवः ||

2- ॐ नमः श्वभ्यः श्वपतिभ्यश्च वो नमो नमो भवाय च रुद्राय च नमः |
शर्वाय च पशुपतये च नमो नीलग्रीवाय च शितिकण्ठाय च ||

3- ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्त केशाय च नमः सहस्त्राक्षाय च शतधन्वने च |
नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमाय चेषुमते च || (Shiv Mantra)

Shiv mantra in hindi

1- ॐ नमः पार्याय चावार्याय च नमः प्रतरणाय चोत्तरणाय च |
नमस्तीर्थ्याय च कूल्याय च नमः शष्प्याय च फेन्याय च ||

2- ॐ नमो ज्येष्ठाय च कनिष्ठाय च नमः पूर्वजाय चापरजाय च |
नमो मध्यमाय चापगल्भाय च नमो जघन्याय च बुधन्याय च ||

3- ॐ इमा रुद्राय तवसे कपर्दिने क्षयद्वीराय प्रभरामहे मतीः |
यशा शमशद् द्विपदे चतुष्पदे विश्वं पुष्टं ग्रामे अस्तिमन्ननातुराम् ||

4- ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्त केशाय च नमः सहस्त्राक्षाय च शतधन्वने च |
नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमाय चेषुमते च || (Shiv Mantra)

5- ॐ नमः आराधे चात्रिराय च नमः शीघ्रयाय च शीभ्याय च |
नमः ऊर्म्याय चावस्वन्याय च नमो नादेयाय च द्वीप्याय च ||

6- दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनं पापनाशनम् |
अघोरपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम् ||

Shiv Mantra

महामृत्युंजय मंत्र Mahamrityunjay Mantra in Hindi

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

 Shiv mantra by ravan

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेवलम्ब्यलम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिवो शिवम्‌ ॥1॥
जटाकटाहसंभ्रमभ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥

धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुरस्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥
जटाभुजंगपिंगलस्फुरत्फणामणिप्रभा कदंबकुंकुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे।
मदांधसिंधुरस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूतभर्तरि ॥4॥

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः।
भुजंगराजमालयानिबद्धजाटजूटकः श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥5॥
ललाटचत्वरज्वलद्धनंजयस्फुलिङ्गभा निपीतपंचसायकंनमन्निलिंपनायकम्‌।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥6॥ (Shiv Mantra)

Shiv Mantra

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वलद्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके।
धराधरेंद्रनंदिनीकुचाग्रचित्रपत्रकप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचनेरतिर्मम ॥7॥
नवीनमेघमंडलीनिरुद्धदुर्धरस्फुरत्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

प्रफुल्लनीलपंकजप्रपंचकालिमप्रभा विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌।
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥
अखर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजंगमस्फुरद्धगद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदंगतुंगमंगलध्वनिक्रमप्रवर्तित: प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥
दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंगमौक्तिकमस्रजोर्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुह्रद्विपक्षपक्षयोः।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

कदा निलिंपनिर्झरी निकुञ्जकोटरे वसन्‌ विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥13॥
निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥ (Shiv Mantra)

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥
इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथागतिं विमोहनं हि देहनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥16॥

पूजावसानसमये दशवक्रत्रगीतं यः शम्भूपूजनपरम् पठति प्रदोषे।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥
॥ इति रावणकृतं शिव ताण्डव स्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥ (Shiv Mantra)

Shiv Mantra

What is shiv maha mantra

मनुष्य के इस मर्त्यलोक को पार कर सकने के बाद ही शिव मिलते हैं। देवताओं को, ऋषि-मुनियों या फिर ब्रह्मांड में कहीं भी जीवन पर संकट आया।

तमाम कष्टों के विष को हमारे भोले भगवान शिव ने धारण किया। भगवान शिव की आराधना बहुत सरल तथा बहुत ही फलदायी होती है।

What is shiv maha mantra

शिव भगवान् का मूल मंत्र होता है ॐ नमः शिवाय॥ भगवान् शिव को यह मंत्र बहुत ही प्रिय है।यह बहुत ही सरल और आसानी से जपा जाने वाला मंत्र है।
शिव मंत्र मनुष्यों के संपूर्ण कष्टों का नाश कर देता है। और उस व्यक्ति में सात्विक भाव को उजागर कर देता है।

मनुष्य को इस मायाग्रसित संसार से बाहर कर देता है Shiv Mantra का जाप।
शिव मंत्र के जाप से मनुष्यों के जनम-जनम के पाप मिट जाते हैं। और मनुष्यों को शिव मनवांछित फल प्रदान करते हैं।


Is the Shiv Tandav Mantra good for us?

शिव तांडव मंत्र में बहुत ही प्रभावशाली मंत्र है। इसे कोई भी गा और जाप कर सकता है। इसके जाप में कोई दोष नहीं होता। यह भगवान् शिव को प्रसन्न करने का मंत्र है। इस मंत्र की रचना भगवान् शिव के परम भक्त महा पंडित रावण द्वारा की गई थी।

Shiv tandav

जब रावण अहकार वशतःजब भगवान् शिव को कैलाश सहित उन्हें लंका में ले जाने का प्रयत्न करने लगा। तब भगवन शिव ने उसके अहंकार को चूर करने के लिए कैलाश को अपने अंगूठे को दबा दिया।
जिससे रावण का हाथ कैलाश पर्वत के नीचे दब गया। तब दर्द के मारे चिल्लाने लगा। और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने शिव तांडव स्तोत्र को रचना की। और भगवन खुश हुए।

How to worship lord shiva

भगवान् शिव की पूजा करने से पहले आप इस बात का हमेशा ध्यान रखें की।
आप सबसे पहले भगवान् गणेश की पूजा करें। भगवान शिव की पूजा हफ्ते में एक बार शिव मंदिर में जाकर अवश्य करें।
भगवान् शिव को दूध बिल्व पत्र धतूरा भांग अर्पित करें। आप भगवान् शिव के मंदिर में सोमवार को जाते हैं तो और शुभता का प्रतीक होता है।
आप भगवान शिव को नारियल का पानी हल्दी केतकी के फूल और कुमकुम कभी भी नहीं चढ़ाएंगे। जो भगवान् शिव को चढ़ाना अशुभ माना जाता है। (Shiv Mantra)

Shiv Mantra

How should I pray to Lord Shiva so that he helps me out?

श्रावण मॉस में शिव की पूजा का और अधिक माहात्म्य मन जाता है।

जुलाई से अगस्त का महीना बहुत ही शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। आप हमेशा शिव की पूजा करते रहें। कभी भी आप अपनी पूजा में विघ्न ना पड़ने दें।

आप हर समय शिव मंत्र का जाप करते रहें। एक समय ऐसा आएगा की आपक शिव mantra जाप के बिना रह ही नहीं पाएंगे।
बात तो यहाँ पर मन की है। सांसारिक दृष्टि से सारे कर्म और विधान हैं परन्तु ईश्वर की भक्ति में तो आपका मन ही सबसे महत्वपूर्ण है।

how to chant shiv mantra

हमेशा याद रखिये की मंत्र जप के लिए श्रद्धा और आस्था के साथ एकाग्रता और मन का संयम बहुत ही आवश्यक होता है।

शिव मंत्र जप की मर्यादाएं तथा नियम भी हैं। जिसके पालन से मनवांछित फल और मंत्र का शुभ लाभ मिल पाता है।
तथा शिव मंत्र के जाप का सबसे उत्तम और शुभ समय ब्रह्ममुहूर्त माना जाता है।

शिव भक्ति के लिए प्रदोष काल अर्थात दिन का ढलना और सायं काल का समय भी मंत्र जप के लिए सबसे उचित माना जाता गया है।
यदि किसी व्यक्ति को इन जाप करने का यह समय न मिल पा रहा हो तो। वह सोने से पहले मंत्र का जाप कर सकता है।

Bholenath

आप मंत्र का जाप हमेशा करिये। साधना के लिए पहले पहल नियम बहुत ही जरूरी है। ध्यान रहे आप जब मंत्र जाप कर रहे हों उस वक़्त आप अपना एक स्थान निर्धारित कर ले। बार बार स्थान न बदलें।

आप मंत्र के जाप के लिए रुद्राक्ष की १०८ माला का प्रयोग कर सकते हैं। जो बहुत ही लाभकारी और जाप में सहयोग सिद्ध होती है। (Shiv Mantra)

Shiva god

आप यदि शिव मंत्र का जप दिन में करें तो अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में ही अवश्य रखें। तथा आप अगर रात्रि में जाप कर रहे हैं तो मुंह उत्तर दिशा में ही रखें।
आपने यदि किसी भी मंत्र के जप क करने का संकल्प ले लिया है तो उसी मंत्र का जाप करें। ध्यान रहे आप हमेशा मंत्र के जाप हेतु कच्ची जमीन लकड़ी की चौकी सूती या चटाई के आसन पर ही बैठें ।

आप कभी भी सिंथेटिक आसन पर बैठकर मंत्र का जाप ना करें।

Shiv Mantra

Shiv shankar

आप हमेशा मंत्र जप के लिए एकांत और शांत का ही चुनाव करें। आप कोई मंदिर अथवा घर के मंदिर में जाप करें। आप हमेशा मंत्रों का उच्चारण करते समय अपनी माला दूसरों को कभी भी न दिखाएँ। ध्यान वन मैं या कोने में ही होना चाहिए।

तथा जितना छिपा हुआ रहे उतना अच्छा। मंत्रों का पूरा लाभ पाने के लिए जप के दौरान सही मुद्रा या आसन में बैठना भी बहुत जरूरी है।

इसके लिए पद्मासन श्रेष्ठ होता है। इसके बाद वीरासन और सिद्धासन या वज्रासन को प्रभावी माना जाता है। हमेशा मंत्र जप शुरू करने से पहले  अपने मस्तक पर भस्म का त्रिपुण्ड्र अवश्य लगाएं।

What is shiv gayatri mantra

रुद्र गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

जब कभी किसी व्यक्ति के जन्म पत्रिका में कालसर्प दोष पितृदोष अथवा ग्रहण योग है। जिस कारण उस व्यक्ति की मानसिक स्थिति बिल्कुल भी ठीक नहीं रहती। और जिनको मानसिक शांति नहीं मिल रही।

ऐसे व्यक्ति को शिव गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। और कोई भी व्यक्ति इस मंत्र का जाप कर सकता है। यहाँ एक बात को उद्घाटित करना बहुत ही जरूरी है की।

शिव मंत्र का जाप कोई भी व्यक्ति कर सकता है। उसके लिए किसी रोग से ग्रसित होना जरूरी नहीं। (Shiv Mantra)

Is the word “Shiv” a mantra by itself without Aum or Namah? Can we repeat Shiv, Shiv, and Shiv as a Jaap?

सबसे पहले तो यह बताना बहुत जरुरी है की इश्वर आपका मन देखते हैं। आप अगर पत्थर-पत्थर भी भगवान् का चिंतन और मनन करते हुए करेंगे। तो वह पत्थर भी आपको उतना ही लाभ देगा जितना बिना ॐ का मंत्र।

शिव-शिव भी जाप कर सकते हैं। और ॐ नमः शिवाय ऐसे भी जाप कर सकते हैं। ॐ नाद ब्रह्म है। आप यदि बिना ॐ के जप करना कहते हैं तो याद रखिये मन में केवल आपके आराध्य ही हों।

 

What is the mantra said when pouring milk on the Shiv Lingam?

भगवान् शिव को जल अर्पित करते वक़्त आप ॐ नमः शिवाय का जाप करते हैं। तो यह भी पर्याप्त है। सबसे पहली बात तो यह है की आपका भाव क्या है। जैसा आपका मन होगा लाभ भी वैसा ही होगा।

आप शिवलिंग में दूध बिल्वपत्र आदि अर्पित करते वक़्त शिव के किसी भी स्तोत्रम का जाप कर सकते हैं। परन्तु सबसे महत्वपूर्ण श्लोक ॐ नमः शिवाय है।

 

क्या आप जानते हैं कि शिव जी किसकी साधना करते हैं?

शिव जी हमेशा श्री राम जी की आराधना करते हैं

भगवान शिव ‘राम’ नाम का ध्यान करते थे। क्यों?

ये तो एक प्रेम की बात ही जैसे क्रिस और राधा माँ का प्रेम। गोपी और कृष्णा का प्रेम। उसी प्रकार शिव और श्री राम का प्रेम।
भगवान शिव के द्वारा ही सारे वेदों पुरणों और शास्त्रों में से मंथन द्वारा राम मंत्र निकला है। Shiv Mantra

राम नाम के प्रभाव से ही भगवान शिव काशी में प्राण त्याग करते हुए प्रत्येक जीव जंतु तथा विभिन्न प्राणी समुदाय को मुक्ति देते है।

जिसका प्रमाण श्री रामचरितमानस में हमें मिलता है-
जासु नाम बल संकर कासी।
देत सबन्हि सम गति अबिनासी।। और पुराणों में एक श्लोक मिलता है

रामनामप्रभावं हि सर्वदेवप्रपूजनम् ।
महेश एव जानाति नान्यो जानाति जैमिने ॥८९॥ (श्रीपद्म-पुराण ७।१५।८९)

किसी भी मंत्र में बीज अक्षर लगाने का क्या महत्व है और इसका क्या प्रभाव होता है?

ॐ का अर्थ अगर हम देखें तो होता है अहम आत्मा, ‘मैं आत्मा हूँ’।
ॐ नमः शिवाय अर्थात् मैं आत्मा शिव को नमन करता हूँ।

ठीक इसी प्रकार हर मंत्र का जप करने में पहले ॐ उच्चारण करने से उस मंत्र की पूर्ति हो जाती है। आप यदि मंत्र जाप में कहीं भी त्रुटि कर दें परन्तु आप ॐ का प्रयोग करें तो वह मंत्र भी शुद्ध और सत्य हो जाता है। (Shiv Mantra)

Shiv Mantra

शिव उपासना के पांच अक्षर इतने ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों हैं?

श्री महादेव या श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्र के पाँच श्लोक जिनमे क्रमशः न म शि वा और य आते हैं। हम पाँचों अक्षरों को मिलाएं तो नमः शिवाय का निमार्ण हो जाता है।

यही कारण है यह स्तोत्र shiva panchakshari mantra कहलाता है। ज्यादा महत्वपूर्ण है।

One Comment

Trackbacks and Pingbacks

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *