Shiv chalisa- Benefits Of Shiv Chalisa in Hindi 2


Shiv Chalisa- शिव चालीसा

दोस्तों आपको यह पता ही होगा । कि पुराणों के अनुसार विश्व का निर्माण तीन देवो ने मिल कर किया है जिसे हम त्रिदेव भी कहते है त्रिकदेव यदि ब्रहमा, विष्णु और महेश । जिंसमे भगवान् ब्रहमा को इस संसार का रचियता कहा जाता है । और भगवान् विष्णु को पालन पोषण करने वाला कहा जाता है । महेश (भगवान् शिव) यानी संहारक । शिव जी को उनके भोले स्वभाव के कारण भोलेनाथ भी कहा जाता है । हिन्दू धर्म के अनुसार जो भी व्यक्ति शिव जी की पूजा – आराधना करता है । उस व्यक्ति को अपनी मृत्यु का भी कोई डर नहीं होता । ऐसे व्यक्ति मृत्यु के मुँह से भी बच कर सरलता से वापिस आ जाता है । shiv chalisa  भगवान् शिव जी आराधना में बोला जाता है । शिव चालीसा का मन्त्र “ॐ नमः शिवाय” भगवान् शिव की अराधना में सबसे ज्यादा उपयोग किये जाने वाला मन्त्र है ।


भगवान् शिव को खुश करने का shiv chalisa in hindi  एक सरल और आसान उपाय है । जिसको पढ़ने से आपको आनंद की अनुभूति होती है । तो आइये दोस्तों बात करते है शिव चालीसा की ।

Chalisa Kya Hai ?

हिन्दू मन्यन्ता में भगवान की प्राथना को ही सरल शब्दों में चालीसा कहा गया है । चालीसा का पाठ करने से किसी भी व्यक्ति के जीवन में बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है । लेकिन क्या आप जानते है इसे चालीसा ही क्यों कहा जाता है ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योकि इसमें चालीस लाइन होती है सरल भाषा में होता है इसे पढ़ना बहुत आसान होता है


शिव चालीसा या अन्य किसी भी चालीसा को पढ़ने में सबसे अच्छी बात ये है की इसे पढ़ने के लिए किसी नियम का पालन काने की जरूत नहीं होती । इस के लिए आपके मन में केबल श्रद्धा होनी चाहिए । इसे पढ़ने से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर भी बहुत अच्‍छा लगता है।

shiv-chalisa
shiv chalisa lyrics in hindi

Shiv Chalisa in Hindi

॥दोहा॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

इसका मतलब है की हे ! गणेश जी आप मंगलकारी है आप को सब बातो का ज्ञान है हमारी आप से पार्थना है की आप ऐसा वरदान दे की हमारे सारे भय दूर हो जाए ।

Shiv Chalisa Lyrics in Hindi

॥चौपाई॥ 

 

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥


पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट ते मोहि आन उबारो॥

मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥

पुत्र होन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥दोहा॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

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Shiv Chalisa Benefits

  • ऐसा माना जाता है की जो भी प्रेग्‍नेंट महिलाओं है अगर वो शिव चालीसा का पाठ नियमित रूप से करे तो इससे उन्हने और उनके होने वाले बच्चे को फायदा मिलता है ।
  • शिव चालीसा का नियमित रूप से पाठ करने से ना केवल लड़कियों को अच्छा वर मिलता । उनके विवाहिक जीवन में आने वाली सारी समस्याएं भी दूर हो जाती है ।
  • नियमित रूप से शिव चालीसा का जाप करने से नशे, शराब, तंबाकू, सिगरेट की लत के साथ ही साथ तनाव से छुटकारा पाने के लिए फायदेमंद है।
  • शिव चालिसा का जाप करने से बीमार महिला बीमारियों से छुटकारा पाने में हेल्‍प मिलती है क्‍योंकि इससे आपका तनाव दूर होता है और आप बीमारी के बारे में बहुत ज्‍यादा नेगेटिव नहीं होती है।
  • समय से पहले और खतरनाक मौत को रोकता है।

Shiv Chalisa in Hindi Download

Source: T-Series Bhakti Sagar

इस तरह से शिव चालीसा का पाठ आपके लिए बहुत ज्यादा फलदायी होता है। बिना किसी संदेह के आप भगवान शिव के आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे आसान और अच्छा तरीका है। इसके अलावा, शिव चालिसा का पाठ किसी भी उम्र के पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा किया जा सकता है। यह छात्रों और बच्चों के लिए भी उतना ही फायदेमंद है। शिव चालीसा की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे करने के लिए आपको किसी भी प्रकार तैयारी की कोई जरूरत नहीं होती है और केवल आपकी भक्ति और निश्चित रूप से कुछ मिनट की आवश्यकता होती है। हालांकि, भगवान शिव के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से शिव चालीसा का जाप करना चाहिए।

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