Shirdi Sai Nath – Sai baba kaun hain?

साईं  बाबा को Shirdi Sai Nath के नाम से भी जाना जाता है। साईं  बाबा एक भारतीय गुरु थे जिन्हें सभी लोग संत फ़क़ीर साईं कहते थे।  साईं  बाबा ने भक्ति योग सूफी ज्ञान योग और कर्मा योग को जन जन तक पहुँचाया।

जब उन्हें उनके पूर्व जीवन के सन्दर्भ में पुछा जाता था तो टाल-मटोल उत्तर दिया करते थे।

Sai baba kon hai?

साईं शब्द उन्हें भारत के पश्चिमी भाग में स्थित प्रांत महाराष्ट्र के शिरडी नामक कस्बे में पहुंचने के बाद मिला था। उन्होंने प्रेम, क्षमा, दुसरो की सहायता, दान, संयम, आत्मिक शांति, भगवान ओर गुरु के लिए समर्पण की नैतिक शिक्षा दी।

उनका आदर्श वाक्य था  “सबका मालिक एक“। मुस्लिम ओर हिन्दू दोनों ही उनके जीवन काल में ओर उसके बाद भी उनका सम्मान करते है।

When was Sai Baba born?

Shirdi Sai Nath युग अवतार थे। जिन्होंने सदा एक ही निति वाक्य पर भक्तों को विश्वाश रखने के लिए आग्रह किया की सबका मालिक एक ।  कुछ लोगों का मानना है कि सांई बाबा का जन्म महाराष्ट्र के पाथरी ग्राम में 28 सितंबर, 1835 को हुआ।

जबकि कुछ के अनुसार उनका जन्म 27 सितंबर 1838 को तत्कालीन आंध्रप्रदेश के पाथरी गांव में हुआ था और उनकी मृत्यु 28 सितंबर, 1918 को शिर्डी में हुई।

Shirdi Sai NathSai baba ka janm kab hua tha?

साईं बाबा के जन्म का कोई सबूत नहीं मिलता है। वह कहाँ से आये थे? कब उनका जन्म हुआ था? 1858 में साईं  बाबा जी शिरडी आये थे, उन्होंने 4-5 साल नीम के पेड़ के नीचे बिताया था। भक्तों के आग्रह पर ने अपना आश्रय शिरडी के एक गांव पर लिया और उसे द्वारकामाई के नाम से जाना जाने लगा।

Was Shirdi Sai Baba a Hindu or a Muslim?

साईं  बाबा न तो हिन्दू थे न ही मुस्लिम। वो अपने को अल्लाह कहो या वह परंपरमेश्वर पिता कहो उसी का पुत्र कहते थे। Shirdi Sai Nath के चमत्कारों और उनकी अनुकंपा के किस्से उनके अनुयायियों द्वारा हम आए-दिन सुनते रहते हैं।

महान संत और ईश्वर के अवतार सांई बाबा के जन्म और उनके धर्म को लेकर कई विरोधाभास प्रचलित हैं।

Sai Baba hindu the ya muslim?

Shirdi Sai Nath ने कभी अपने धर्म को प्रचारित नहीं किया। सभी धर्मों को समान आदर देते हुए वह ताउम्र ‘सबका मालिक एक ‘ ही जपते रहे और दुनिया को यही समझाते रहे। साईं  ने हमेशा अपने आप को अल्लाह का बंदा कहा और जिस कुटिया में वह रहते थे उसे वह द्वारिकामाई कहते थे।

Shirdi Sai Nath

What is Opening and closing time of Sai temple?

Shirdi Sai Temple Timings
4:00 AM मंदिर के खुलने का समय
4.15 AM भूपाली
4:30 AM काकड़ आरती (प्रातःकाल )
5:00 AM साईं बाबा मंदिर में भजन
5.05 AM समाधी मंदिर का स्नान
5:35 AM आरती (शिरडी माझे पंढरपुर)
5:40 AM समाधी मंदिर दर्शन प्रारम्भ
9:00 AM अभिषेक पूजा
8:00 AM,10:30 AM सत्यनारायण पूजा

What is Daily Pooja Schedule In Shirdi Sai Baba Temple?

11:30 AM द्वारकामाई में घी और चावल से धुनि पूजा (Shirdi Sai Nath)
12:00 PM दिन में आरती
4:00 PM समाधि मंदिर में पोथी पाठ
At Sunset धुप आरती
8:30 PM – 10:00 PM समाधी मंदिर में पूजा और आरती
9:00 PM चावड़ी और गुरुस्थान का द्वार बंद
9:30 PM द्वारकामाई में बाबा को जल चढ़ाने का समय
9:45 PM द्वारकामाई द्वार बंद
10:30 PM सेज आरती रात्रि में बाबा जी के लिए जल सेवन हेतु व्यवस्था
11:15 PM आरती के बाद समाधी मंदिर द्वार बंद

Should Sai Baba be considered as God?

Shirdi Sai Nath ने कभी अपने व्यक्तित्व का परिचय किसी के सामने उद्घाटित नहीं होने दिया। वह हर समय अपने आप को उस ईश्वर का बन्दा कह कर ही सम्बोधित करते थे। ग्रंथों के अनुसार उन पर वह सारे गुण विद्यमान थे जो पूर्ण रूप से ईश्वर पर मिलते है।

जो भी हो यदि कोई इश्वर दर्शन कर लेता है या उसका साक्षात्कार हो जाए तो वह भी ईश्वर के सामान पूज्यनीय हो जाता है। तब वहां कोई भेद नहीं रह जाता है।

Kya sai baba bhagvaan the?

आज यहाँ पर यह बात को उद्घाटित करना बहुत ही अनिवार्य है की, भगवान् हम किसे कहते हैं? जो सबका भरण पोषण करे, जो अपने भक्तों को सुखी रखे तथा हमेशा सत्य के मार्ग पर अग्रसरित कराते हुए अपनी और खींच ले। यही तो साईं बाबा ने भी किया था।

अगर हम इतिहास के पन्नो पर नज़र डालते है, तो यही पाते हैं। यही आज कल के भक्तो को भी होता है। हर साल करोड़ों की तादात में भक्त साईं दर्शन के लिए जाते हैं इसिलए यहाँ पर हम उन्हें भगवान् कह सकते हैं।

Shirdi Sai Nath

Whether the samadhi of Shirdi Saibaba is opened and can we worshiped before deepawali?

जरूर आप सभी Shirdi Sai Nath के लिए जा सकते है और पूजा भी कर सकते हैं। साईं  धाम के खुलने और बंद होने की समय सारिणी ऊपर दी गई है आप देख सकते है तथाअनुसार दर्शन कर सकते हैं।

Has anyone felt the power of saibaba?

यह प्रश्न तो अनुभव का प्रश्न है। जिसको अनुभव होता है, वही बता सकता है। साईं  बाबा के शरीर छोरडने के बाद बहुत से भक्तों को साईं  बाबा ने दशन दिए थे और आशीर्वाद दिया था।

यह बहुत ही निम्न स्तर की बात है की साईं  बाबा को किसी ने महसूस किया है की नहीं। यह तो एक प्रेमी ही जानता है, जो ईशर से प्रेम करता है । जिसके प्राण उस परमपिता परमेश्वर साईं  बाबा के लिए लालायित रहते हैं।

Where is the original samadhi of Sai Baba under the statue?

श्री साईं बाबा  की मूल समाधि शिर्डी के समाधी मंदिर में Shirdi Sai Nath की मूर्ति के सामने है। जिस मूर्ति को हम सभी प्रणाम करते हैं, वही समाधि है। साईं बाबा ने शिरडी में यहीं 1918 में समाधि ली थी।

यह समाधि सवा दो मीटर लंबी और एक मीटर चौड़ी है। शिरडी महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले की राहटा तहसील का एक क़स्बा है। यहां दुनियाभर से साईं बाबा के भक्त उनके दर्शन के लिए आते हैं।

Sai baba ki samadhi kaha par hai ?

गुरुवार के दिन भक्तों का तांता बहुत अधिक रहता है। समाधि मंदिर के अलावा यहाँ द्वारकामाई का मंदिर चावडी और ताजिमखान बाबा चौक पर साईं भक्त अब्दुल्ला की झोपड़ी है दरअसल, शिरडी में साईं बाबा का समाधि मंदिर है। कई श्रद्धालु यहां समाधि पर चादर चढ़ाते हैं।

Shirdi Sai Nath

Why sai baba took three days dead samadhi?

1886 में, बाबा ने म्हालसापति को आदेश दिया की वह नहीं आये तो शरीर को दफना दिया जाए। उसी वर्ष 1886 में दक्षिणेश्वर में श्री रामकृष्णपरमहंस जो ईश्वरावतार थे। जिन्होंने  स्वयं स्वामी विवेकानंद को अपने अंतिम दिनों में यह स्पष्ट कर दिया था की जो राम थे और जो कृष्णा हुए थे वही इस जन्म में श्री रामकृष्ण हुए थे। उन्होंने अपना शरीर त्याग किया था।

तीन बाद जब साईं अपनी समाधि से उठे तो साईं  बोलते हैं; मैं अल्लाह के पास गया था, परन्तु मेरा मित्र गदाधर भी अल्लाह के पास जाना चाहता था इसिलए मैं वापस आ गया। Shirdi Sai Nath उसके बाद 36 वर्ष तक द्वारका माई में रहे थे।

साईं  अपने भक्तों के उद्धार हेतु तीन दिन अल्लाह के पास गए थे ताकि उन्हें और कुछ दिन संसार के मनुष्यों का मार्गदर्शन करने का मौका मिला जाए। मनुष्य इस संसार में दिन पर दिन इतना मोहित होते जा रहा है की, उसे अपने और ईश्वर के सम्बन्ध का कोई ज्ञान ही नहीं रह गया है।

How Baba Sai prepared for His MahaSamadhi?

साईं  ईश्वर का अवतार थे। धरती पर भक्तो को उचित राह और भटके हुए मनुष्यों का सही मार्गदर्शन करने हेतु अवतरित हुए थे। Shirdi Sai Nath ईश्वरावतार जो हर समय केवल अल्लाह का नाम जपते रहते थे। हर वक़्त अपने भक्तो को यही याद दिलाते थे की वही अल्लाह सब कुछ है। वही एक परब्रह्म सबका स्वामी है। वह अल्लाह सभी कर्म,धर्म,रीती,रिवाजों इन सब मान मर्यादाओं से कोसों दूर है। वह तो प्रेम का भूखा है, साहब। उसे प्रेम करो। अपने ह्रदय में संग दो और उसके साथ संग करो।

Sai Baba ne apni samadhi kaise banai?

बाबा ने शरीर छोड़ने से पहले ही अपने भक्तो को आभास करना शुरू करा दिया था। जब उनके समाधी का दिन नजदीक आया तो उन्होंने औरंगाबाद में एक मुस्लिम संत को यह सन्देश भेजा की अल्लाह ने जो दीपक यहाँ जला के रखा हुआ था, उसके बुझने का समय आ चूका है।  दूसरा संकेत उन्होंने खुद जब वह अपनी समाधी तैयार करने लग गए तो भक्तो को आभास हो गया की अब साईं  के जाने का समय आ चूका है

दूसरा साईं  बाबा के पास एक ईंट थी जो उनके गुरु ने उनको दी थी और वह इस बात का प्रमाण थी की, जब तक यह ईंट पूरी की पूरी साबुत सुरक्षित रहेगी साईं का शरीर भी तभी एक रहेगा और जैसे ही यह ईंट टूट जाए तो समझ लेना की इस पांच तत्त्व से बने माया रुपी इस शरीर के छोरडने का समय आ गया है। इसी प्रकार साईं  ने अपन समाधि स्वयं की रची और भक्तो को आभास करा दिया था।

Shirdi Sai Nath

Sai baba ki saadi hue thi ya nhi?

Shirdi Sai Nath आजीवन ब्रह्मचर्य के पालक थे। उन्होंने एक फ़कीर का जीवन व्यतीत किया और सभी को यह सन्देश दिया की सभी का मालिक एक है, वह अल्लाह / ईश्वर साईं।  बाबा दो चीजों को लेकर बहुत ही व्यथित रहते थे। यह व्यथा उनके अंतिम दिनों में और भी बढ़ गई थी। पहली जो भी भक्त आते थे, उनमे से कुछ को साईं  के जात धर्म की जानकरी के लिए बहुत उत्सुकता रहती थी। वही साईं  अपने आपको उस ईवर की संतान, अल्लाह का बंदा कह कर सम्बोधित करते थे। दूसरा जो भी लोग आते थे वह बस इस भौतिक वस्तुओं की ही मांग करा करते थे न की ईशर प्रेम की।

Manvitha sri sai baba prarthana ashtakam

साईं कृपा से व्रत कथा लिखवाई, भक्तों के हाथों में पहुंची|
साईं गुरुवार व्रत करे जो कोई, उसका कल्याण तो हरदम होई|

घर बार सुख शांति होवे, साईं ध्यान करे जो सोवे|
भोग लगावे निसदिन बाबा को जोई उसके घर में कमी न होई|

बाबा की प्रार्थना करिए, साईं मेरे दुःख को हरिए|
शिरडी में बाबा की मूर्ति है प्यारी, भक्तों को लगे है न्यारी|

मेरे साईं मेरे बाबा, मेरा मन्दिर मेरा काबा|
राम भी तुम शाम भी तुम हो, शिवजी का अवतार भी तुम हो|

हनुमान तुम ही हो साईं, तुम्ही ने थी लंका जलाई|
कलियुग में तुम आए थे साईं, भक्तों का कल्याण हो जाई|

भक्तिभाव से पड़े कथा जो, उसकी इच्छा पूरी हो जाती|
बाबा मेरे आओ साईं हमको दर्शन दिखलाओ साईं|

तुम बिन दिल नहीं लगता, आंसू का दरिया है निकलता|
जब-जब देखें तेरी मूरत, तब-तब भीग जाए मेरी मूरत|

Shri Sai Prathna

अंधन को आंखे देते, दीन दुखी के दुख हर लेते|
तुम सा नहीं है कोई सहाई, जपते रहें हम साईं साईं|

नाम तुम्हारा मंगलकारी, भवसागर से भक्तों को तारी|
बाबा मेरे अवगुण माफ कर देना, भक्ति मेरी को ही लेना|

बाबा हम पर दया करना, अपने चरणों में ही रखना|
चरणों में तुम्हारे शीतल छाया, बचे रहेंगे नहीं पड़ेगी मंद छाया|

हमारी बुद्धि निर्मल करना, जग की भलाई हमसे करना|
हमको साधन बना लो बाबा, दया कृपा क्षमा दो बाबा|

अज्ञानी हम बालक मंदबुद्धि, तेरी दया से हो मन की शुद्धि|
पाप ना कोई हमसे होने पाए, दुःख कोई जीव ना पाए|
हरपल भला हम करते आए, गुणगान हरपल तेरे गांए|

||दोहा|| 

साईं हम पर कृपा करो, बालक हैं अनजान|
मंदबुद्धि हम जीव हैं, हमको लो आन संभाल||||

व्रत आपका कर रहे, दो आशीष यह आन|
विध्न पड़े इसमें कोई, कृपा करो दीनदयाल||||

When sai baba died?

साईं बाबा जिन्हें Shirdi Sai Nath  भी कहा जाता है, 1838 में जन्म हुआ और 15 अक्टूबर 1918 में देहत्याग हुआ। भारत भर में हिंदू और मुस्लिम भक्तों के लिए आध्यात्मिक गुरु के रूप में धरती में अवतरित हुए थे।

What food can be eaten on a Sai Baba fast day?

साईं  बाबा ने कभी किसी को व्रत रखने का आदेश नहीं दिया। कुछ भी खाइये परन्तु सदा हरी नाम जाप करते रहिये। अपने आस पास भूखे व्यक्ति को खिलाईये। जैसा की साईं  सत्चरित्र के अध्याय 9 में में बताया गया है की जब श्रीमती तारखड ने एक कुत्ते को अपने भोजन के समय भोजन खिलाया, इस पर साईं  बोलते हैं-

कुत्ता जिसे आपने भोजन से पहले देखा था और जिसको आपने रोटी का टुकड़ा दिया था, मेरे साथ एक है इसलिए अन्य प्राणियों (बिल्लियों सूअर मक्खियों गायों आदि) मेरे साथ हैं। वह जो इन सभी प्राणियों में मुझे देखता है और जो सभी में मुझको वह मेरे से अलग नहीं,  न मैं उनसे दूर हूँ।

Shirdi Sai Nath ने मन से अपने गलत विचारों का व्रत करने की सलाह दी थी। अपने मन से गलत वासनाओं को दूर करने की सलाह दी। यही साईं  के लिए असली व्रत होगा और कुछ नहीं।

Shirdi Sai Nath

Gift me sai baba ka milna shubh hai ya ashubh?

साईं  बाबा की मिलना गिफ्ट में बहुत ही अच्छी बात है। यह शुभता का प्रतीक है। एक बात हमेशा ध्यान रखने वाली है की, मन से भी हमारा ईश्वर की ओर प्रेम होना चाहिए। भौतिक रूप से ईश्वर के लिए प्रेम बस नाम का प्रेम होता है।

उस मूर्ति के साथ आपका आत्मिक प्रेम आपके साचे ईश्वर भक्ति और प्रेम को प्रगाड़ता की ओर अग्रसारित करेगा। वस्तुतः साईं  बाबा की मूर्ति मिलना बहुत ही शुभ बात है

Kya sai baba and jesus ek hai?

Shirdi Sai Nath और जीशु एक ही हैं, दोनों ईश्वरावतार हैं। समय समय पर ईश्वर अवतार लेते हैं। यहाँ पर एक बात स्पष्ट करना बहुत जरूरी हो चला है, वह यह की; क्यों हम तुलनात्मक दृष्टि हर एक को भांपने में डालते हैं। ईश्वर या जीशु या अल्लाह जो भी कहो कोई गणित और विज्ञान का विषय नहीं जो समझ में आ जाए। वह ज्ञान और विज्ञान से परे हैं। यह भी नहीं की वह बहुत ही कठिन की समझ में ही न आये।

वह तो हमारे अपने माता पिता हैं। असली में माता पिता हैं। हर जन्म में होने वाले माता पिता नहीं। हम उन्ही के अंश हैं । जो उन्ही से पृथक हुए हैं हम भूल गए हैं इसिलए ये सब रेल पेल। हम जो भी कुछ कर रहे हैं या करते हैं, बस अपना और उनका सम्बन्ध दुबारा प्राप्त करने के लिए। कुछ करने की जरूरत नहीं न कोई कर्म काण्ड न कोई यज्ञ न तप ही,  बस प्रेम, प्रेमाभक्ति ही काफी ईश्वर को पाने के लिए।