Shani dev Mantra

Shani Dev Mantra In Hindi | Shani Dev Upay 1

ShaniDev Mantra-शनि मंत्र

Shani Dev न्याय प्रिय देवता है। यदि लोग बुरे कर्म करते है । और दुसरो को नुक्सान पहुँचता चाहता है । तो ऐसे में शनि उस व्यक्ति को सजा देते है । वो सजा कुछ भी हो सकती है। जैसे आपके मन , शरीर , धन किसी से भी आपको नुक्सान पहुंचा सकते है । ज्यादा दर देखा गया है। की लोग शनि देव के डर से उनकी पूजा करते है । लेकिन हम इसको पूरा सच नहीं कह सकते । Shani Dev लोगो के कर्मो के हिसाब से उनको न्याय देते है। शनिवार का दिन शनि देव की पूजा के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है । अगर आप शनिवार को Shani Dev की पूजा या Shani mantra  का जप करते है तो बहुत ज्यादा लाभ मिलता है ।


शनि देव के उपाय- Shani dev Ke upay

कहते है की अगर Shani Dev mantra को आपने एक बार खुश कर दिया । तो वो आपको शनि देव की कृपा आप पर बनी रहेगी । आपके सारे सितारे बुलंदी में पहुंच जाएगी । इसलिए शनि देव को आपने शत्रु नहीं मित्र बनाये ।

असल में, शनि के देव का दूसरा रूप यह भी है जिसे बहुत ही कम लोग जानते है कि शनि के शुभ प्रभाव से रंक भी राजा बना सकता है। शनि देव को तकदीर बदलने वाला भी माना गया है। इसलिए अगर सुख के दिनों में भी शनि भक्ति की जाए तो उसके शुभ फल से सुख-समृद्धि बनी रहती है।shani dev


शास्त्रों में Sha ni Dev की प्रसन्नता के लिए ऐसा ही एक मंत्र बताया गया है। इसके प्रभाव से घर-परिवार में हमेशा खुशहाली बनी रहती है। वहीं जीवन का कठिन या तंगहाली का दौर भी आसानी से कट जाता है।

शनिवार या हर रोज इस मंत्र जप के पहले ShaniDev की पूजा करें। गंध, अक्षत, फूल, तिल का तेल चढ़ाएं। तेल से बने पकवान का भोग लगाएं। पूजा के दौरान इस मंत्र का उच्चारण करें या ShaniDevको तेल चढ़ाते हुए इस मंत्र को बोलें –

ऊँ नमो भगवते शनिश्चराय सूर्य पुत्राय नम:

– पूजा व मंत्र जप के बाद शनि की आरती करें। Shani Dev से संबंधित वस्तुओं जैसे काली उड़द या लोहे की सामग्री का दान करें।

Shani Dev Mantra In Hindi 

शनि देव का तांत्रिक मंत्र ( Tantarik Mantra of Shani Dev)

ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।

शनि देव के वैदिक मंत्र (Vedic Mantra of Shani Dev)

ऊँ शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये।

शनि देव का एकाक्षरी मंत्र (Ekashari mantra of Shani Dev)

ऊँ शं शनैश्चाराय नमः।

शनि देव का गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra of Shani Dev)

ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।।

भगवान शनिदेव के अन्य मंत्र (Other Mantra of Bhagwan Shani Dev)

ऊँ श्रां श्रीं श्रूं शनैश्चाराय नमः।

ऊँ हलृशं शनिदेवाय नमः।

ऊँ एं हलृ श्रीं शनैश्चाराय नमः।

ऊँ मन्दाय नमः।।

ऊँ सूर्य पुत्राय नमः।।


साढ़ेसाती से बचने के मंत्र (Shani Mantra for Shani Dosha)

शनि देव की साढ़ेसाती के प्रकोप से बचने के लिए शनि देव को इन मंत्रों द्वारा प्रसन्न करना चाहिए:

ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम ।
उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात ।।

ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः। ऊँ शं शनैश्चराय नमः।।

ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌।छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌।।


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क्षमा के लिए शनि मंत्र (Shani antra in Hindi)

निम्न मंत्रों के जाप द्वारा शनि देव से अपने गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेहर्निशं मया।
दासोयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।

गतं पापं गतं दु: खं गतं दारिद्रय मेव च।
आगता: सुख-संपत्ति पुण्योहं तव दर्शनात्।।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए शनि मंत्र (Shani Mantra for Health in Hindi)

शनिग्रह को शांत करने तथा रोग को दूर करने के लिए शनि देव के इस मंत्र का जाप करना चाहिए:

ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिहा।
कंकटी कलही चाउथ तुरंगी महिषी अजा।।
शनैर्नामानि पत्नीनामेतानि संजपन् पुमान्।दुःखानि नाश्येन्नित्यं सौभाग्यमेधते सुखमं।।

शनि देव की पूजा के समय निम्न मंत्रों का प्रयोग करना चाहिए:

भगवान शनिदेव की पूजा करते समय इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें चन्दन लेपना चाहिए-

भो शनिदेवः चन्दनं दिव्यं गन्धादय सुमनोहरम् |
विलेपन छायात्मजः चन्दनं प्रति गृहयन्ताम् ||

भगवान शनिदेव की पूजा में इस मंत्र का जाप करते हुए उन्हें अर्घ्य समर्पण करना चाहिए-

ॐ शनिदेव नमस्तेस्तु गृहाण करूणा कर |
अर्घ्यं च फ़लं सन्युक्तं गन्धमाल्याक्षतै युतम् ||

इस मंत्र को पढ़ते हुए भगवान श्री शनिदेव को प्रज्वलीत दीप समर्पण करना चाहिए-

साज्यं च वर्तिसन्युक्तं वह्निना योजितं मया |
दीपं गृहाण देवेशं त्रेलोक्य तिमिरा पहम्. भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने ||

इस मंत्र को पढ़ते हुए भगवान शनिदेव को यज्ञोपवित समर्पण करना चाहिए और उनके मस्तक पर काला चन्दन (काजल अथवा यज्ञ भस्म) लगाना चाहिए-

परमेश्वरः नर्वाभस्तन्तु भिर्युक्तं त्रिगुनं देवता मयम् |
उप वीतं मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः ||

इस मंत्र को पढ़ते हुए भगवान श्री शनिदेव को पुष्पमाला समर्पण करना चाहिए-

नील कमल सुगन्धीनि माल्यादीनि वै प्रभो |
मयाहृतानि पुष्पाणि गृहयन्तां पूजनाय भो ||

भगवान शनि देव की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करते हुए उन्हें वस्त्र समर्पण करना चाहिए-

शनिदेवः शीतवातोष्ण संत्राणं लज्जायां रक्षणं परम् |
देवलंकारणम् वस्त्र भत: शान्ति प्रयच्छ में ||

शनि देव की पूजा करते समय इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें सरसों के तेल से स्नान कराना चाहिए-

भो शनिदेवः सरसों तैल वासित स्निगधता |
हेतु तुभ्यं-प्रतिगृहयन्ताम् ||

सूर्यदेव पुत्र भगवान श्री शनिदेव की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करते हुए पाद्य जल अर्पण करना चाहिए-

ॐ सर्वतीर्थ समूदभूतं पाद्यं गन्धदिभिर्युतम् |
अनिष्ट हर्त्ता गृहाणेदं भगवन शनि देवताः ||

भगवान शनिदेव की पूजा में इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें आसन समर्पण करना चाहिए-

ॐ विचित्र रत्न खचित दिव्यास्तरण संयुक्तम् |
स्वर्ण सिंहासन चारू गृहीष्व शनिदेव पूजितः ||

इस मंत्र के द्वारा भगवान श्री शनिदेव का आवाहन करना चाहिए-

नीलाम्बरः शूलधरः किरीटी गृध्रस्थित स्त्रस्करो धनुष्टमान् |
चतुर्भुजः सूर्य सुतः प्रशान्तः सदास्तु मह्यां वरदोल्पगामी ||

Shani Mantra 108

Source: Gyan Sagar & Vastu Tips

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