Saligram-शालिग्राम का पूजन, साक्षात श्री हरी का पूजन है

What is shaligram

वैज्ञानिक तौर पर अगर हम देखें तो Saligram एक प्रकार का जीवाश्म पत्थर के रूप में पाया जाता है।

और वहीँ दूसरी और धार्मिक आधार देखने तो शालिग्राम का प्रयोग परमेश्वर भगवान् श्री हरी विष्णु के प्रतिनिधि के रूप में भगवान का आह्वान करने के लिए किया जाता है।

Who is shaligram bhagwan

Saligram वस्तुतः आमतौर पर पवित्र नदी की तली या किनारों पर पाया जाता है।


पवित्र नदी गंडकी नेपाल में पाया शालिग्राम एक गोलाकार आमतौर पर काले रंग के एमोनोइड जीवाश्म को विष्णु के प्रतिनिधि के रूप में पूजते हैं।

शालिग्राम को भगवान विष्णु के रूप में पूजा जाता है।

How to worship shaligram stone at home

हिंदू धर्म के अनुसार Saligram को सालग्राम के रूप में भी जाना जाता है।


एक बात यह है की शालिग्राम का संबंध सालग्राम नाम के गांव से भी है।

यह गांव नेपाल में गंडकी नामक नदी के किनारे बसा हुआ है।

शिवलिंग और शालिग्राम को भगवान का साक्षात विग्रह रूप माना जाता है।

How to worship shaligram shila

पुराणों के अनुसार भगवान के इस विग्रह के रूप में ही पूजा की जानी चाहिए और जो सत्य भी है।

हिंदू धर्म के अनुसार आमतौर पर मनुष्य द्वारा धार्मिक मूर्तियों के पूजन के रूप में प्रथा है।

परन्तु इन मूर्तियों को पहले से ही भगवान ब्रह्मा को शंख विष्णु को Saligram तथा शिवजी को शिवलिंग के रूप में ही पूजा जाता था।

भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भगवत गीता के 12वें अध्याय के 5वें श्लोक में स्पष्ट रूप से कहा है।

How to identify fake shaligram

जिन भी लोगों का मन परमात्मा के अप्रत्यक्ष और अवैयक्तिक गुणों से जुड़े हुए होते हैं.

उन लोगों के लिए उन्नति बहुत ही कठिन है।

और शरीर युक्त इस जीव को इस अनुशासन में प्रगति करना सदैव ही मुश्किल होता है।

Saligram Temple

शालिग्राम जी का केवल और एकमात्र मंदिर नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र में विराजित है।

यह वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक मन जाता है।

मुक्तिनाथ की यात्रा वैसे तो काफी कठिन है।

और माना जाता है कि यहां से लोगों को हर तरह के कष्टों से मुक्ति और अपने आराध्य के प्रति आस्था की कृपा मिल जाती है।

शालिग्राम का एकमात्र मंदिर  

सर्वप्रथम काठमांडु से मुक्तिनाथ की यात्रा के लिए पोखरा जाना होता है।

और पोखरा के लिए सड़क या हवाई मार्ग से भी हाय जा सकते हैं और यहां से जोमसोम की और जाना होता है। जोमसोम से मुक्तिनाथ जाने के लिए भक्त हेलिकॉप्टर और फ्लाइट भी ले सकते हैं।


सड़क मार्ग से जाने के लिए पोखरा तक की कुल यात्रा 200 किमी  की है।

How to test original shaligram

साक्षात् शिवलिंग की तरह Saligram भी बहुत दुर्लभ है।

वैसे तो अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ क्षेत्र काली गण्डकी नदी के पावन तट पर पाए जाते हैं। शालिग्राम काले और भूरे रंग के अलावा सफेद नीले और सुनहरी आभा युक्त के भी होता है।

परन्तु सुनहरा और ज्योतियुक्त शालिग्राम का मिलना बहुत ही दुर्लभ है।

पूर्ण Saligram में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति तथा प्राकृतिक तौर पर ही बनी हुई होती है।

जो बहुत ही प्रभावशाली होते हैं।

How to identify shaligram stone

शालिग्राम में भगवान विष्णु के अनेक रूप

शालिग्राम लगभग ३३ प्रकार के पाए जाते हैं जहाँ २४ प्रकार के शालिग्राम को भगवान विष्णु के साक्षात् २४ अवतारों से संबंधित माना जाता है।

ऐसी भी मान्यता है कि ये सभी २४ प्रकार के शालिग्राम वर्ष की २४ एकादशी व्रत से भी संबंधित होते हैं। भगवान श्री विष्णु के अवतारों के अनुसार ऐसा मन जाता है की शालिग्राम यदि गोल है तो वह भगवान विष्णु का साक्षात् गोपाल रूप है।

और मछली के आकार का Saligram श्रीहरि के मत्स्य अवतार का साक्षात् प्रतीक माना जाता है।

ऐसा है शालिग्राम और यहां मिलता है

यदि शालिग्राम कछुए के आकार का है तो इसे विष्णुजी के साक्षात कच्छप और कूर्म अवतार के रूप में पूजा जाता है।

शालिग्राम जी पर दिखने वाले चक्र और रेखाएं विष्णुजी के अन्य अवतारों तथा श्रीकृष्ण रूप में उनके कुल को भी प्रकट करती हैं।

Saligram puja

इस बात का बहुत ही ध्यान रखे की घर में सिर्फ एक ही शालिग्राम की पूजा की जानी चाहिए।

भगवान विष्णु जी की मूर्ति से कहीं ज्यादा उत्तम शालिग्राम की पूजा करना मन जाता है।

साधको को Saligram पर चंदन लगाकर उसके ऊपर एक तुलसी जी का पत्ता रखना अनिवार्य है।

साधकों को प्रतिदिन शालिग्राम का पंचामृत के द्वारा स्नान कराया जाना चहिये।

Shaligram puja vidhi in hindi

जिस भी घर में भगवान् शालिग्राम जी का पूजन होता है, उस घर में माँ लक्ष्मी जी का सदैव ही वास रहता है।

श्री शालिग्राम जी का पूजन करने से सभी जन्मों के पापों का नाश हो जाता है।

श्री शालिग्राम जी एक सात्विकता के महँ प्रतीक हैं। इसीलिए उनके पूजन में चित्त की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाना अनिवार्य होता है।

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