Maa kamakhya temple story माँ कामाख्या मंदिर प्राचीन कथा और रहस्य Leave a comment


Maa kamakhya माँ कामख्या

Maa kamakhya ग्रंथो के अनुसार यह कथन है की हर व्यक्ति एक स्त्री का रूप होता है|इंसान एक सब से उत्तम व्यक्ति होता है जिसके पास सोचने की शक्ति समझने की सकती होती है| इस लिए सब से ज्यदा परेशान भी इन्शान ही रहेता है|  इतना सब होते हुए भी अगर कोई व्यक्ति परेशान है तो उसका कारण क्या है| इंसान अपने जीवन में बहुत सी गलतियां करता है| हिन्दू धर्म में स्त्री को सब से उचा पद दिया हुए है|  फिर भी अगर व्यक्ति स्त्री का अनादर करता है और बहुत दुख देता है| भगवान खुद एक स्त्री का रूप है| जैसे माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, माँ पार्वती, माँ कामख्या, आदि| माना जाता है जिस घर में स्त्री का सम्मान नही होता वहा परेशानी हमेशा रहेती है|
Maa kamakhya माँ कामख्य


कामख्या से जुड़े हैरान कर देने वाले रहस्य

माँ कामख्या टेम्पल Maa kamakhya temple

आइये अब बात जरते है ऐसे ही एक मंदिर की जहा भी एक स्त्री के रूप में माँ की पूजा की जाती है| वो भी भगवान है लेकिन जो उनका रूप है वो स्त्री है| हिन्दू धर्म में यह तो सच है की भगवान को हर रूप में पूजा जाता है| आज हम एक ऐसे हीमंदिर की बात करेगे जो की माँ कामाख्या मंदिर के नाम से प्रसिद है| आइये जानते है इस मंदिर से जुडी और बाते और रहस्य|
Maa kamakhya


कामख्या देवी Maa kamakhya devi.

एक जाना मानामाँ कामाख्या का मंदिर यह मंदिर तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिए बहुत प्रसिद्ध है| यहाँ ऐसी बहुत सी माता की मुर्तिया भी स्थापित हैं। जैसे तारा, धूमवती, भैरवी, कमला, बगलामुखी आदि यह तंत्र देवियों के नाम से भी जनि जाती है| इस मंदिर को 16वी में खत्म कर दिया था लेकिन फिर वहा के राजा जिन का नाम नर नारायण जो की बिहार के रहने वाले थे 17वी शताब्दी में इसका पुन: निर्माण करवाया था। आइये अब जानते है इससे जुडी और बाते और रहस्य|
Maa kamakhya

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मंदिर माँ कामख्या Maa kamakhya mandir

इस मंदिर में बीचो-बीच नीलांचल पर्वत जो कि कामाख्या मंदिर से करीब 8 km की दुरी पर है| यह मंदिर बहुत प्रसिद मंदिरों में से एक है और करीब 108 वर्ष पुराना मंदिर है| इस मंदिर में जो भी व्यक्ति आता है और यग करता है उसकी हर मनोकामन पूरी होती है| बताया गया है कि पिता द्वारा किए जा रहे यज्ञ की अग्नि में कूदकर सती के आत्मदाह करने के बाद जब महादेव उनके शव को लेकर तांडव कर रहे थे| तभी भगवान विष्णु ने उनके क्रोध को शांत करने के लिए अपना सुदर्शन चक्र छोड़कर सती के शव के टुकड़े कर दिए था| उस समय जहां सती की योनि और गर्भ आकर गिरे थे| आज उसही स्थान पर यह मंदिर कामाख्या मंदिर स्थित है।
Maa kamakhya

रहस्य माँ कामख्या देवी Kamakhya devi story

इस मंदिर के बारे में और जानते है इस मंदिर के पास मौजूद सीढ़ियां अधूरी हैं| इसके पीछे भी एक कथा मौजूद है। नरका नाम का राक्षस देवी कामाख्या की सुंदरता पर मोहित होकर उनसे विवाह करना चाहता था। परंतु देवी कामाख्या ने उसके सामने एक शर्त रख दी। कहा जाता है की एक बार कामदेव ने अपना पुरुषत्व खो दिया था| तब इस स्थान पर रखे सती के गर्भ और योनि की सहायता की जिस वजह से उन्हें अपना पुरुषत्व हासिल हुआ था। इस स्थान पर ही शिव और पार्वती के बीच प्रेम की शुरुआत हुई थी। संस्कृत भाषा में प्रेम को काम कहा जाता है| जिससे कामाख्या नाम पड़ा।


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Maa kamakhya

प्राचीन कथा माँ कामख्या Maa kamakhya devi history in hindi

आइये अब बात करते है कुछ और रहस्य की जो माँ कामख्य के मंदिर से जुडी है| एक बार की बात है माँ कामाख्या देवी ने नरका के आगे एक शर्त राखी की अगर वह एक ही रात में नीलांचल पर्वत से मंदिर तक सीढ़ियां बना पाएगा तो ही वह उससे जरुर विवाह करेंगी। नरका ने देवी यह सूरत को मानते हुए सीढ़ियां बनाने लगा। देवी को लगा कि नरका इस कार्य को पूरा कर लेगा इसलिए उन्होंने एक तरकीब निकाली। उन्होंने एक कौवे को मुर्गा बनाकर उसे भोर से पहले ही बांग देने को कहा। नरका को लगा कि वह शर्त पूरी नहीं कर पाया है| परंतु जब उसे हकीकत का पता चला तो वह उस मुर्गे को मारने दौड़ा और उसकी बलि दे दी। जिस स्थान पर मुर्गे की बलि दी गई उसे कुकुराकता नाम से जाना जाता है। इसलिए इस मंदिर की सीढ़ियां आज भी अधूरी हैं।

मंदिर कामख्य Kamakhya mandir

माँ का यह मंदिर असम गुवाहाटी से लगभग 8 किलोमीटर की दुरी पर है|  इस मंदिर को माँ कामख्या मंदिर के नाम से जाना जाता है|  इस मंदिर की बहुत सी कथा और रहस्य है जो की बहुत कम लोग जानते है|   मंदिर में 51 शक्तिपीठों में से सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाला| यह मंदिर रजस्वला माता की वजह से ज़्यादा ध्यान आकर्षित करता है| यहां चट्टान के रूप में बनी योनि से रक्त निकलता है| देवी सति ने भगवान शिव से शादी की थी जिस वजह से देवी सति के पिता राजा दक्ष खुश नहीं थे|  फिर राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया लेकिन इसमें सति के पति भगवान शिव को नहीं बुलाया| सति को इस बात का भूती दुःख हुआ और इस बात से नाराज़ हुईं और बिना बुलाए अपने पिता के घर पहुंच गई|

माँ कामख्या कथा Kamakhya history

यह देख कर राजा दक्ष को गुस्सा आया और उन्होंने उनका और उनके पति का बहुत अपमान किया| अपने पति का अपमान उनसे सहा नहीं गया और हवन कुंड में कूद गई| यह बात जाने के बाद भगवान शिव उन्हें यग में पहुचे और सति का शव लेकर वहां से चले गए| वह सति का शव लेकर तांडव करने लगे, उन्हें रोकने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र फेंका| इस चक्र से सति का शव 51 हिस्सों में जाकर कटकर जगह-जगह गिरा| इसमें सति की योनि और गर्भ इसी कामाख्या मंदिर के स्थान यानी निलाचंल पर्वत पर गिरा इस स्थान पर 17वीं सदी में बिहार के राजा नारा नारायणा ने मंदिर बनाया|
Maa kamakhya

कामाख्या मंदिर त्योहार – Maa kamakhya mantra

इस मंदिर में वैसे बहुत से त्योहार मनाए जाते है लेकिन उन में से एक त्योहार बहुत मुख्य त्योहार माना जाता है| दुर्गा पूजा यहाँ का मुख्य त्योहार है| जो कामाख्या मंदिर में नवरात्री में मनाया जाता है इस पाँच दिनों के त्योहार में बहोत से श्रध्दालु आते है। इस मंदिर में हर साल अंबुवाची मेले का आयोजन भी बड़े धूम धाम से किया जाता है| इस मेले में देशभर के तांत्रिक हिस्सा लेने आते हैं| माँ की पूजा की जाती है और pandit द्वारा कुछ सामान जो की पूजा में इस्तमाल होते है उससे भी जानते है| माँ को लाल जोड़ा सिंदूर वस्त्र चूड़ी १६ सिंगर आदि चढ़ाया जाता है| और माँ का मंत्र को भी उचारण करना बहुत जरुरी माना जाता है|
Maa kamakhya

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