lord surya

lord surya- jab shiv ne kya surya dev par prahar Leave a comment

Surya bhagavan

भगवान् सूर्य और चन्द्रमा हमारे इस भूलोक में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने वाले देवता हैं।   वेदों में कहा जाता है की lord surya इस ब्रह्माण्ड की आत्मा हैं। और यह तो स्पष्ट ही है की surya से ही इस धरती पर जीवन संभव है।
और बिना sun god के तो जीवन की कल्पना भी दुर्लभ है। कितने कल्पों से सूर्य देवता की पूजा तथा उपासना होती आ रही है।
वेदों पुराणों में बहुत ही जगहों पर सूर्य देवता की स्तुति और वंदना की जाती है। और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है की सूर्य देवता को नवग्रहों के राजाधिराज क रूप में भी पूजा जाता है।


How to worship lord surya

भगवान् सूर्य और चन्द्रमा हमारे इस भूलोक में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने वाले देवता हैं। वेदों में कहा जाता है की भगवान् सूर्य इस ब्रह्माण्ड की आत्मा हैं।   और यह तो स्पष्ट ही है की सूर्य से ही इस धरती पर जीवन संभव है। और बिना सूर्य देव के तो जीवन की कल्पना भी दुर्लभ है।

Surya pooja vidhi

कितने कल्पों से lord surya की पूजा तथा उपासना होती आ रही है। वेदों पुराणों में बहुत ही जगहों पर सूर्य देवता की स्तुति और वंदना की जाती है।
और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है की सूर्य देवता को नवग्रहों के राजाधिराज क रूप में भी पूजा जाता है।


lord surya

Sun story

एक बार दैत्यों और देवताओं के बीच भयंकर युद्ध हुआ। और यह युद्ध 100 वर्षों तक चलता रहा। उस युद्ध में सृष्टि का अस्तित्व संकट में पड़ गया था।
पराजित होकर देवगण वन-वन भटकने लगे। उनकी व्यथा देखकर देवर्षि नारद कश्यप मुनि के आश्रम में पहुंचे।

Surya dev ki kahani

इस संकट के बारे में महर्षि कश्यप जी को बताया। और नारद जी ने ही सलाह दी कि इस संकट में सूर्य के समान तेजस्वी और बलशाली सत्ता ही देवताओं को मुक्ति दिला सकती है।
वह यदि देवों का प्रतिनिधित्व करें तो बात बन सकती है। लेकिन सूर्य प्रकट रूप में एक महाविराट अग्नि पिंड है।

Why lord shiva killed surya

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एक समय जब श्री शकर जी ने माली और सुमाली के प्राण संकट में डालने वाले lord surya  पर बहुत ही कुपित हुए। शिवजी ने अपने त्रिशूल से अपने रथ पर सवार सूर्य देव पर हमला किया।
और जिस प्रहार के कारण सूर्य रथ से गिर गए और बेहोशी की हालत में पड़े रहे। जैसे ही सूर्य देव अचेत हुए सारा संसार अन्धकार में डूब गया।  ऋषि कश्यप ने अपने पुत्र की ऐसी दशा देख कर जोर जोर से क्रंदन करना शुरू कर दिया।

Suryamantra in hindi

पूरी सृष्टि में कोलाहल मच गया और श्री कश्यप ने पुत्र मोह में आकर शिव जी को श्राप दे दिया।   श्राप यह था की शिव जी को भी एक दिन अपने पुत्र वियोग में रोना पड़ेगा।
देवी देवताओं के बहुत ज्यादा विनती के बाद सूर्य देव को पुनः जीवनदान मिला।
तत्पचात माली सुमाली दोनों ने अपने शरीर को निरोगी और अपने सभी कष्टों की समाप्ति के लिए भगवान् की सूर्य की आराधना की। तथा सूर्य देव ने प्रसन्न होकर उनको निरोगी बना दिया।

lord surya

Who is the charioteer of lord surya

अरुण देव lord surya के रथ वाहक के रूप में जाने जाते हैं।

How to please lord surya

सूर्यदेव  को प्रसन्न करने के लिए आप निम्नलिखित मंत्रों का उच्चारण करें। जिससे आपके सभी दुःख दर्द दूर होंगे।
इस मंत्र के उच्चारित करते हुए मंत्र का उच्चारण करें

शीत वातोष्ण संत्राणं लज्जाया रक्षणं परम् ।
देहा लंकारणं वस्त्र मतः शांति प्रयच्छ में ।।

Surya dev mantra

ऊँ भास्कराय पुत्रं देहि महातेजसे।
धीमहि तन्नः सूर्य प्रचोदयात्।।

रोग मुक्ति मंत्र

ऊँ हृां हृीं सः सूर्याय नमः।।

व्यापार वृद्धि मंत्र

ऊँ घृणिः सूर्य आदिव्योम।।

शत्रुओं के नाश के लिए सूर्य देव मंत्र

शत्रु नाशाय ऊँ हृीं हृीं सूर्याय नमः

Surya mantra in hindi

सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए सूर्य देव मंत्र

ऊँ हृां हृीं सः

अनिष्ट ग्रहों की दशा के निवारण हेतु सूर्य देव मंत्र

ऊँ हृीं श्रीं आं ग्रहधिराजाय आदित्याय नमः

इस दिव्य lord surya मंत्र का उच्चारण करते हुए चन्दन समर्पण करना चाहिए

दिव्यं गन्धाढ़्य सुमनोहरम् ।
वबिलेपनं रश्मि दाता चन्दनं प्रति गृह यन्ताम् ।।

lord surya

Surya mandala stotram

श्री सूर्यमण्डलाष्टक स्तोत्रम्

नमः सवित्रे जगदेकचक्षुषे जगत्प्रसूतिस्थितिनाश हेतवे ।
त्रयीमयाय त्रिगुणात्मधारिणे विरञ्चि नारायण शंकरात्मने ॥ १ ॥

यन्मडलं दीप्तिकरं विशालं रत्नप्रभं तीव्रमनादिरुपम् ।
दारिद्र्यदुःखक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ २ ॥

यन्मण्डलं देवगणै: सुपूजितं विप्रैः स्तुत्यं भावमुक्तिकोविदम् ।
तं देवदेवं प्रणमामि सूर्यं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ३ ॥ (lord surya)

यन्मण्डलं ज्ञानघनं, त्वगम्यं, त्रैलोक्यपूज्यं, त्रिगुणात्मरुपम् ।
समस्ततेजोमयदिव्यरुपं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ४ ॥

यन्मडलं गूढमतिप्रबोधं धर्मस्य वृद्धिं कुरुते जनानाम् ।
यत्सर्वपापक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ५ ॥

यन्मडलं व्याधिविनाशदक्षं यदृग्यजु: सामसु सम्प्रगीतम् ।
प्रकाशितं येन च भुर्भुव: स्व: पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ६ ॥


यन्मडलं वेदविदो वदन्ति गायन्ति यच्चारणसिद्धसंघाः ।
यद्योगितो योगजुषां च संघाः पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ७ ॥

यन्मडलं सर्वजनेषु पूजितं ज्योतिश्च कुर्यादिह मर्त्यलोके ।
यत्कालकल्पक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ८ ॥

यन्मडलं विश्वसृजां प्रसिद्धमुत्पत्तिरक्षाप्रलयप्रगल्भम् ।
यस्मिन् जगत् संहरतेऽखिलं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ९ ॥

यन्मडलं सर्वगतस्य विष्णोरात्मा परं धाम विशुद्ध तत्त्वम् ।
सूक्ष्मान्तरैर्योगपथानुगम्यं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ १० ॥

Surya bhagavan images

यन्मडलं वेदविदि वदन्ति गायन्ति यच्चारणसिद्धसंघाः ।
यन्मण्डलं वेदविदः स्मरन्ति पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ११ ॥
यन्मडलं वेदविदोपगीतं यद्योगिनां योगपथानुगम्यम् ।
तत्सर्ववेदं प्रणमामि सूर्य पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ १२ ॥
मण्डलात्मकमिदं पुण्यं यः पठेत् सततं नरः ।
सर्वपापविशुद्धात्मा सूर्यलोके महीयते ॥ १३ ॥

॥ इति श्रीमदादित्यहृदये मण्डलात्मकं स्तोत्रं संपूर्णम् ॥

Surya beej mantra

ॐ घृणि: सूर्याय नम:॥ (lord surya)

Who are the sons of lord surya

भगवान् सूर्य की दस संतानें हुईं। सूर्य देव की अश्विनी नामक पत्नी से वैवस्वत, मनु, यम, यमी (यमुना) अश्विनीकुमारद्वय और रेवन्त। पत्नी छाया से शनि, तपती, विष्टि (भद्रा) और सावर्णि, मनु हुये।

Surya wife

भगवान् सूर्यदेव की दो पत्नी हैं। संज्ञा और छाया। छाया संज्ञा की ही प्रतिमूर्ति थी।

Surya daughter

भगवान् सूर्य को संज्ञा से ताप्ती और छाया से यमुना जो नदी रूप में धरती पर प्रवाहित हो रही हैं।

How to pray to lord surya

एक बार जब सूर्य देव को मनुष्य के रूप में जन्म लेकर देव शक्तियों का सेनापति के रूप में नियुक्त तो करना था। तब ऐसी तेजस्वी संतान कोई तेजस्वी स्त्री ही जन्म दे सकती थी।
बहुत सोच विचार और खोज पड़ताल के बाद उन्होंने कहा कि इस शुभ और महान कार्य के लिए महर्षि कश्यप की पत्नी और वेद माता अदिति ही सूर्य की मां बन सकती है।

Surya dev ki katha

इसके बाद वेदमाता आदिति जो कि महर्षि कश्यप की पत्नी थी उनसे सभी देवताओं ने अनुरोध किया तो वह राजी हो गई।
उसके बाद त्याग और ध्यान से अदिति ने (lord surya) को मनाया और उन्हें पुत्र के रूप में जन्म लेने के लिए भी मनाया।
सूर्य भगवान् तथास्तु कहकर अंतर्ध्यान हो गए। कुछ दिन बाद सूर्य आदित्य के गर्भ में आ गए समय आने पर अदिति ने देखा कि उसके शरीर से दिव्य तेज निकल रहा है।
अदिति से जन्म के कारण उस बालक का अथवा सूर्य का नाम आदित्य रखा गया।

Surya god

आदित्य तेजस्वी और बलशाली रूप से ही बड़े हुए। उन्हें देख इंद्र आदि देवता अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने आदित्य को अपना सेनापति नियुक्त कर दैत्यों पर आक्रमण कर दिया।
आदित्य के तेज के समक्ष दैत्य अधिक देर तक नहीं टिक पाए। और जल्दी ही हुए दैत्य हारने लगे। और अपने प्राण को बचाकर पाताल लोक में छिप गए।

Suryadev ke mantra

सूर्य के प्रताप और तेज से स्वर्ग लोक पर फिर से देवताओं का अधिकार हो गया। सभी देवताओं ने आदित्य अर्थात सूर्य को पालक और ग्रह राज के रूप में स्वीकार किया।
सृष्टि के दैत्यों और अत्याचारों से मुक्त कर भगवान आदित्य सूर्य देव के रूप में रूप में ब्रह्मांड के मध्य में स्थित हो गए। और वहीं से सृष्टि का कार्य संचालन करने लगे ।

How to offer water to lord surya

भगवान सूर्य को जल चढ़ाने का महत्व, हमारी संस्कृति में सूर्य को भगवान की तरह ही पूजा जाता है। सभी ग्रह सूर्य के ही चक्कर लगाते हैं, इसलिए सभी ग्रहों में (lord surya) को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। हिंदू धर्म में सूर्य की पूजा की जाती है।

lord surya

Surya mantra in hindi for success

ऐसा माना जाता है कि अगर सूर्य देवता आपसे प्रसन्न होते हैं तो बाकी ग्रहों का असर आप पर नहीं पड़ता है। इसलिए सूर्य की पूजा और उपासना को शुभ फलदाई माना गया है। रविवार को  सूर्य देव का दिन माना जाता है।

इस दिन सूर्य देव की उपासना करने से जीवन में सफलता मिलती है। भगवान राम भी सूर्य देव को जल चढ़ाते थे। इसलिए सूर्य को जल चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

Surya puja benefits in hindi

सूर्य देव को जल चढ़ाने का धार्मिक महत्व होने के साथ वैज्ञानिक महत्व भी बहुत माना जाता है।   वैज्ञानिकों के अनुसार जब कोई व्यक्ति सुबह के समय (lord surya) को जल चढ़ाता है। तो सूर्य से निकलने वाली किरणे उस व्यक्ति को कई स्वास्थ्य लाभ देती है।

Surya narayan

सुबह के समय सूर्य की जो किरणे निकलती है, वह हमारे शरीर में होने वाले रोगों के असंतुलन को सही करती है। सूरज की किरणों में इंद्रधनुष के सात रंगों का समावेश होता है। इसके अलावा दूसरा कारण यह है कि सुबह के समय सूर्य की रोशनी से विटामिन डी निकलता है।

Agni the fire god

विटामिन डी जो हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक होता है। इसके अलावा सूर्य की सुबह की रोशनी सुंदरता बढ़ाने का काम भी करती है।और इससे आंखों को भी लाभ मिलता है।

How to pray lord surya for better results

ज्योतिष विज्ञान में सूर्य को जल चढ़ाने के कई महत्व बताए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति शुभ मुहूर्त में नहाकर साफ कपड़े पहन कर सूर्य को जल चढ़ाता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।
इसके अलावा रोगों से मुक्ति पाने के लिए भी सुबह सुबह (lord surya) को जल चढ़ाना लाभकारी होता है।

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