lingashtakam

Lingashtakam- सावधान! शिव का यह मंत्र कर देगा तुम्हें पागल 3

शिव मंत्र 

हर कोई शिव को पूजता है। और जानता भी है उनकी महिमा के बारे में। जाने भी क्यू ना। शिव को सभी भोलेनाथ जो कहते हैं। परन्तु क्या आप जानते हो Lingashtakam यह मंत्र आपको पागल कर सकता है।


अब आप पूछेंगे ऐसा क्यों? ऐसा इसिलए क्योंकि यह मंत्र बहुत ही प्रभावशाली है,  इस मंत्र के जाप से भोले बाबा इतने जल्दी आप से प्रसन्न हो जायेंगे की आप सोच भी नहीं सकते।

सामान्य लोक भाषा में अगर बोला जाए तो आप ख़ुशी के मारे पागल ही जाएंगे, अपने भोले बाबा की शीघ्र कृपा से। ऐसे ही हैं हमारे भोले नाथ। भोला भंडारी। तो सभी प्रेम से बोलो हर हर महादेव।


What is lingashtakam stotram?

श्री शिव की स्तुति में एक स्तोत्रम् (भजन) Lingashtakam है, शिव जिन्हें महेश्वर, रुद्र, आदि भी कहा जाता है। लिंग शिव का प्रतीक है। जैसे शंख और चक्र श्री विष्णु के प्रतीक हैं।
लिंगाष्टकम स्तोत्रम भगवान शिव की प्रार्थना है। लिंग सृष्टि का सार्वभौमिक प्रतीक और संसार के हर एक चीज का स्रोत है।

How to please lord shiva?

Lingashtakam में भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया गया है। प्रत्येक श्लोक में भगवान की महिमा और शिव लिंग की पूजा के लाभों को वर्णित किया गया है।
इसमें यह भी उल्लेखित है कि विष्णु और ब्रह्मा द्वारा भी लिंग की पूजा की जाती है। यह मंत्र हर समय शांति से ओत प्रोत कर जन्म और पुनर्जन्म के चक्र के कारण किसी भी दुख को नष्ट कर देता है।

lingashtakam

Lingashtakam Stotram in Hindi

ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं
निर्मलभासित शोभित लिंगम् ।
जन्मज दुःख विनाशक लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥ १ ॥
हम उन सदाशिव लिंग को प्रणाम करते हैं। जिनकी ब्रह्मा विष्णु एवं देवताओं द्वारा भी अर्चना की जाती है आप सदैव निर्मल भाषाओं द्वारा पुजित हैं और जो लिंग जन्म-मृत्यू के चक्र का विनाश करता है (सभी को मोक्ष प्रदान कराता है)

देवमुनि प्रवरार्चित लिंगं
कामदहन करुणाकर लिंगम् ।
रावण दर्प विनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥ २ ॥
सभी देवताओं और मुनियों द्वारा पुजित लिंग जो काम का दमन करता है तथा करूणामयं भगवान् शिव का स्वरूप है जिसके द्वारा रावण के अभिमान का भी नाश हुआ उन सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ। (Lingashtakam)

Shiva stotram

सर्व सुगंध सुलेपित लिंगं
बुद्धि विवर्धन कारण लिंगम् ।
सिद्ध सुरासुर वंदित लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥ ३ ॥
जो सभी प्रकार के सुगंधित पदार्थों द्वारा सुलेपित लिंग है जो कि बुद्धि का विकास करने वाला है तथा सिद्ध- सुर (देवताओं) एवं असुरों सभी के लिए वन्दित है उन सदाशिव लिंग को हमारा प्रणाम।

कनक महामणि भूषित लिंगं
फणिपति वेष्टित शोभित लिंगम् ।
दक्ष सुयज्ञ निनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥ ४ ॥
जो स्वर्ण एवं महामणियों से विभूषित एवं सर्पों के स्वामी से शोभित सदाशिव लिंग तथा जो कि दक्ष के यज्ञ का विनाश करने वाला है।आपको हमारा प्रणाम।

lingashtakam

Lingashtakam lyrics

कुंकुम चंदन लेपित लिंगं
पंकज हार सुशोभित लिंगम् ।
संचित पाप विनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥ ५ ॥
लिंग जो कुंकुम एवं चन्दन से सुशोभित है। कमल हार से सुशोभित है। सदाशिव लिंग जो कि हमें सारे संञ्चित पापों से मुक्ति प्रदान करने वाला है उन सदाशिव लिंग को हमारा प्रणाम।

देवगणार्चित सेवित लिंगं
भावै-र्भक्तिभिरेव च लिंगम् ।
दिनकर कोटि प्रभाकर लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥ ६ ॥
सदाशिव लिंग को हमारा प्रणाम जो सभी देवों एवं गणों द्वारा शुद्ध विचार एवं भावों के द्वारा पुजित है तथा करोडों सूर्य सामान प्रकाशित हैं।

Brahma murari surarchita lingam lyrics

अष्टदलोपरिवेष्टित लिंगं
सर्वसमुद्भव कारण लिंगम् ।
अष्टदरिद्र विनाशन लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥ ७ ॥
आठों दलों में मान्य तथा आठों प्रकार के दरिद्रता का नाश करने वाले सदाशिव लिंग जो सभी प्रकार के सृजन के परम कारण हैं आप सदाशिव लिंग को हमारा प्रणाम।

सुरगुरु सुरवर पूजित लिंगं
सुरवन पुष्प सदार्चित लिंगम् ।
परात्परं परमात्मक लिंगं
तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥ ८ ॥
देवताओं एवं देव गुरू द्वारा स्वर्ग के वाटिका के पुष्पों द्वारा पुजित परमात्मा स्वरूप जो कि सभी व्याख्याओं से परे है उन सदाशिव लिंग को हमारा प्रणाम।
लिंगाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेश्शिव सन्निधौ
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते (Lingashtakam)

Who wrote lingashtakam?

लिङ्गाष्टकम अदि शंकराचर्या द्वारा रची गई थी। हम आदि गुरुशंकरचार्य को अद्वैत फिलोस्फी के संस्थापक के रूप में भी जानते हैं। उन्होंने गणेश शिव विष्णु देवी गणेश आदि-आदि देव देवी पर भी कई भजनों की रचना की है।

What are the actual words we used to say when chanting to Shiva?

भगवान शिव का पंचाक्षर मन्त्र ‘नम: शिवाय’ ही सर्वश्रेष्ठ मन्त्र है। इस मन्त्र के आदि में प्रणव ॐ लगा देने से यह मंत्र, षडक्षर मन्त्र ‘ॐ नम: शिवाय’ बन जाता है।

शिव का “नम: शिवाय”यह महा पंचाक्षर मंत्र ही यथार्थ और वास्तविक में सत्य मंत्र है।

स्कन्द पुराण में वर्णित है- 

किं तस्य बहुभिर्मन्त्रै: किं तीर्थै: किं तपोऽध्वरै:।
यस्यो नम: शिवायेति मन्त्रो हृदयगोचर:।। (स्कन्दपुराण)

जिसके हृदय में ‘ॐ नम: शिवाय’यह महा मंत्र हमेशा निवास करता है उस व्यक्ति या साधक के लिए बहुत-से मन्त्र तीर्थ तप और यज्ञों की क्या आवश्यकता है।


When to recite lingashtakam?

भगवान् शिव की पूजा करने से पहले आप इस बात का हमेशा ध्यान रखें की।
आप सबसे पहले भगवान् गणेश की पूजा करें। भगवान शिव की पूजा हफ्ते में एक बार शिव मंदिर में जाकर अवश्य करें। शिव मंत्र जप की मर्यादाएं तथा नियम भी हैं। जिसके पालन से मनवांछित फल और मंत्र का शुभ लाभ मिल पाता है। (Lingashtakam)

When to chant lingashtakam?

शिव मंत्र के जाप का सबसे उत्तम और शुभ समय ब्रह्ममुहूर्त माना जाता है। भगवान् शिव को दूध बिल्व पत्र धतूरा भांग ही अर्पित करें। आप भगवान् शिव के मंदिर में सोमवार को जाते हैं तो और शुभता का प्रतीक होता है।
आप भगवान शिव को नारियल का पानी हल्दी केतकी के फूल और कुमकुम कभी भी नहीं चढ़ाएंगे। जो भगवान् शिव को चढ़ाना अशुभ माना जाता है। (Shiv Mantra)

What is the prayer you say to Shiva?

भगवान् शिव तो भोलानाथ हैं। हर एक भक्त की पुकार वह सुनते हैं। कोई यदि श्रद्धा से उन्हें एक पत्ता तो दूर की बात है पत्थर भी उन्हें कोई चढ़ा दे तो वह उनसे प्रसन्न हो जाते हैं।

बात है की आपका मन। आपका मन ही सबकुछ है। मन से यदि कोई पुकार करे पूजा करे तो फिर किसी और आडम्बर की जरूररत ही नहीं।

इसी प्रकार आप शिव के किसी भी मंत्र का जाप कर सकते हैं। मंत्र कोई भी हो आप जाप कितनी श्रद्धा और सुमन से करते हैं यही महत्त्वपूर्ण है। शिव मन देखते हैं मंत्र नहीं।

lingashtakam

What are few best devotional songs of Lord Shiva?

आप शिवा के भजन के लिए दिए गए लिंक पर जा के डाउनलोड और सुन सकते हैं।

Lord Shiva के भजन और मन्त्रों को डाउनलोड करें करें और उस परमांनद को प्राप्त करें 
Source- www।emp3r।com

Did Lord Krishna worship Lord Shiva?

जी हां भगवान श्रीकृष्ण ने भगवान शिव की पूजा की। श्री कृष्ण विष्णु के प्रत्यक्ष अवतार और देवत्व के पूर्ण व्यक्तित्व हैं। और यही नहीं शिव भगवान् कृष्णा जी पूजा करते हैं।
दोनों एक दूसरे को एक दूसरे का गुरु मानते हैं। अब इस सम्बन्ध को यहाँ पर समझाना तो असंभव ही होगा। इस प्रेम की व्याख्या तो शब्दों में करना पूर्ण रूप से असंभव है।
दोनों ही महाशक्ति होने के साथ-साथ अभेद भी हैं। इसीलिए हम दोनों को नमन ही कर सकते हैं। दोनों की लीला अपार है। इसीलिए जय श्री कृष्णशिवा। (Lingashtakam)

Lingashtakam Lyrics in English

Brahma Muraari Surarchita Lingam
Nirmala Bhaashita Sobhitha Lingam
Janmaja Dhukha Vinaasaha Lingam
Tatpranamaami Sadaashiva Lingam || 1 ||

Devamuni Pravaraarchita Lingam
Kaama Dahana Karunaakara Lingam
Ravana Darpa Vinaasaha Lingam
Tatpranamaami Sadaashiva Lingam || 2 ||

brahma murari surarchita lingam
Sarva Sugandha Sulepitha Lingam
Buddhi Vivaardhana Kaarana Lingam
Siddha Suraasura Vandhitha Lingam
Tatpranamaami Sadaashiva Lingam || 3 ||

Kanaga Mahaamani Bhooshitha Lingam
Panipati Veshthitha Sobitha Lingam
Daksha Suyajna Vinaasana Lingam
Tatpranamaami Sadaashiva Lingam || 4 ||

Lingashtakam slokam

Kunkuma Chandhana Lehpitha Lingam
Pankaja Haara Susobhitha Lingam
Sanchitha Paapa Vinaashana Lingam
Tatpranamaami Sadaashiva Lingam || 5 ||

Deva Ganaarchita Sevitha Lingam
Bhavair Bhakhi Bhirevacha Lingam
Dinakara Koti Prabhaakara Lingam
Tatpranamaami Sadaashiva Lingam || 6 || (Lingashtakam)

Ahshta Dalopari Veshthitha Lingam
Sarva Samudbhava Kaarana Lingam
Ahshta Daridra Vinaasana Lingam
Tatpranamaami Sadaashiva Lingam || 7 ||

Suraguru Suravara Poojitha Lingam
Suravana Pushpa Sadarchitha Lingam
Paraath Param Paramatmaka Lingam
Tatpranamaami Sadaashiva Lingam || 8 ||

Lingashtaka Midam Punyam Yah Pathet Sivasannidhau | 
Sivaloka Mahaapnoti Sivehna Saha Modatheh ||

Lingashtakam in telugu

బ్రహ్మమురారి సురార్చిత లింగం
నిర్మలభాసిత శోభిత లింగమ్ |
జన్మజ దుఃఖ వినాశక లింగం
తత్-ప్రణమామి సదాశివ లింగమ్ || 1 ||

దేవముని ప్రవరార్చిత లింగం
కామదహన కరుణాకర లింగమ్ |
రావణ దర్ప వినాశన లింగం
తత్-ప్రణమామి సదాశివ లింగమ్ || 2 ||

సర్వ సుగంధ సులేపిత లింగం
బుద్ధి వివర్ధన కారణ లింగమ్ |
సిద్ధ సురాసుర వందిత లింగం
తత్-ప్రణమామి సదాశివ లింగమ్ || 3 ||

కనక మహామణి భూషిత లింగం
ఫణిపతి వేష్టిత శోభిత లింగమ్ |
దక్ష సుయఙ్ఞ నినాశన లింగం
తత్-ప్రణమామి సదాశివ లింగమ్ || 4 ||

lingashtakam

Lingashtakam lyrics in telugu

కుంకుమ చందన లేపిత లింగం
పంకజ హార సుశోభిత లింగమ్ |
సంచిత పాప వినాశన లింగం
తత్-ప్రణమామి సదాశివ లింగమ్ || 5 ||

దేవగణార్చిత సేవిత లింగం
భావై-ర్భక్తిభిరేవ చ లింగమ్ |
దినకర కోటి ప్రభాకర లింగం
తత్-ప్రణమామి సదాశివ లింగమ్ || 6 ||

అష్టదళోపరివేష్టిత లింగం
సర్వసముద్భవ కారణ లింగమ్ |
అష్టదరిద్ర వినాశన లింగం
తత్-ప్రణమామి సదాశివ లింగమ్ || 7 || (Lingashtakam)

సురగురు సురవర పూజిత లింగం
సురవన పుష్ప సదార్చిత లింగమ్ |
పరాత్పరం పరమాత్మక లింగం
తత్-ప్రణమామి సదాశివ లింగమ్ || 8 ||

లింగాష్టకమిదం పుణ్యం యః పఠేశ్శివ సన్నిధౌ |
శివలోకమవాప్నోతి శివేన సహ మోదతే ||

Lingashtakam in tamil

ப்ரஹ்மமுராரி ஸுரார்சித லிங்கம்
னிர்மலபாஸித ஶோபித லிங்கம் |
ஜன்மஜ துஃக வினாஶக லிங்கம்
தத்-ப்ரணமாமி ஸதாஶிவ லிங்கம் || 1 ||

தேவமுனி ப்ரவரார்சித லிங்கம்
காமதஹன கருணாகர லிங்கம் |
ராவண தர்ப வினாஶன லிங்கம்
தத்-ப்ரணமாமி ஸதாஶிவ லிங்கம் || 2 ||

ஸர்வ ஸுகம்த ஸுலேபித லிங்கம்
புத்தி விவர்தன காரண லிங்கம் |
ஸித்த ஸுராஸுர வம்தித லிங்கம்
தத்-ப்ரணமாமி ஸதாஶிவ லிங்கம் || 3 || (Lingashtaka)

கனக மஹாமணி பூஷித லிங்கம்
பணிபதி வேஷ்டித ஶோபித லிங்கம் |
தக்ஷ ஸுயஜ்ஞ னினாஶன லிங்கம்
தத்-ப்ரணமாமி ஸதாஶிவ லிங்கம் || 4 ||

 Lingashtakam lyrics in tamil
பங்கஜ ஹார ஸுஶோபித லிங்கம் |
குங்கும சம்தன லேபித லிங்கம்
ஸஞ்சித பாப வினாஶன லிங்கம்
தத்-ப்ரணமாமி ஸதாஶிவ லிங்கம் || 5 ||

தேவகணார்சித ஸேவித லிங்கம்
பாவை-ர்பக்திபிரேவ ச லிங்கம் |
தினகர கோடி ப்ரபாகர லிங்கம்
தத்-ப்ரணமாமி ஸதாஶிவ லிங்கம் || 6 ||

அஷ்டதளோபரிவேஷ்டித லிங்கம்
ஸர்வஸமுத்பவ காரண லிங்கம் |
அஷ்டதரித்ர வினாஶன லிங்கம்
தத்-ப்ரணமாமி ஸதாஶிவ லிங்கம் || 7 ||

ஸுரகுரு ஸுரவர பூஜித லிங்கம்
ஸுரவன புஷ்ப ஸதார்சித லிங்கம் |
பராத்பரம் பரமாத்மக லிங்கம்
தத்-ப்ரணமாமி ஸதாஶிவ லிங்கம் || 8 ||
 லிங்காஷ்டகமிதம் புண்யம் யஃ படேஶ்ஶிவ ஸன்னிதௌ |
ஶிவலோகமவாப்னோதி ஶிவேன ஸஹ மோததே ||

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