What is kumbh mela?

चार स्थानों पर ही Kumbh mela हर तीन वर्ष बाद लगता आया है।
समुद्र मंथन से निकले अमृत का कलश से अमृत की बूदें हरिद्वार इलाहबाद उज्जैन और नासिक के स्थानों पर ही गिरी थी.
यही कारण है की इन और 12 वर्ष बाद यह मेला अपने पहले के स्थान पर वापस पहुंच जाता है।
कुछ दस्तावेज यह भी बताते हैं कि कुंभ मेला वर्ष 525 बीसी से शुरू हुआ था।

Who started kumbh mela?

कुंभ मेले का इतिहास बहुत पुराना है. कुछ नहीं तो कम से कम 850 वर्ष पुराना है।
ऐसा कहा जाता है कि श्री आदि शंकराचार्य जी ने कुम्भ की शुरुआत की थी.
परन्तु ऐसा भी कहा जाता है की कुंभ की शुरुआत समुद्र मंथन के आदिकाल से ही शुरू हो गई थी।
हमारे वैदिक और पौराणिक काल में कुंभ तथा अर्धकुंभ स्नान के लिए आज जैसी प्रशासनिक व्यवस्था का स्वरूप था ही नहीं।
आज बहुत ही व्यवस्थित रूप से कुम्भ मेले का आयोजन किया जाता है.

maha kumbh mela
maha kumbh mela

Where is kumbh mela held?

यहाँ पर यह बात स्पष्ट करनी बहुत ही महत्वपूर्ण है की Kumbh mela किस स्थान पर लगेगा.
यह तय राशि द्वारा ही होता है। 2019 में अर्ध कुम्भ प्रयागराज इलाहबाद में लग रहा है.
कुंभ स्नान के लिए जो भी नियम निर्धारित होते हैं. उसके अनुसार प्रयागराज में कुंभ मेला तब ही लगता है, जब माघ अमावस्या के दिन सूर्य और चन्द्रमा मकर राशि में होते हैं.
तथा गुरू मेष राशि में होता है। 1989, 2001, 2013 के बाद अब अगला महाकुंभ मेला यहां 2015 में लगेगा।

Kumbh mela in which state?

कुंभ मेले के योग के विषय में विष्णु पुराण में उल्लेख है। विष्णु पुराण में बताया गया है कि जब गुरु गृह कुंभ राशि में हो और सूर्य गृह मेष राशि में प्रवेश करे तब हरिद्वार में कुंभ लगता है।
1986, 1998, 2010 के बाद अब अगला महाकुंभ मेला हरिद्वार में वर्ष 2021 में लगेगा।

When is next kumbh mela?

सूर्य एवं गुरू गृह जब दोनों ही सिंह राशि में होते हैं, तब Kumbh mela का आयोजन नासिक में होता है।
और गोदावरी नदी के तट पर आयजित होता है।1980, 1992, 2003, 2015 के बाद अब अगला महाकुंभ मेला यहां 2027 में लगेगा।

Where is kumbh mela?

गुरु गृह जब कुंभ राशि में प्रवेश करेगा तब उज्जैन में कुंभ लगेग।
1980, 2004, 2016 के बाद अब अगला महाकुंभ मेला यहां 2028 में लगेगा।

kumbh mela 2019
kumbh mela 2019

Importance of Kumbh mela

कुंभ के आयोजन में नवग्रहों में से सूर्य चंद्र गुरु और शनि की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही कारण है की इन्हीं ग्रहों की विशेष स्थिति में कुंभ का आयोजन किया जाता है।
सागर मंथन से जब अमृत कलश प्राप्त हुआ था. तब अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों में खींचा तानी शुरू हो गयी।
ऐसे में अमृत कलश से अमृत की बूंद छलक कर जहां जहाँ पर गिरी वहां पर कुंभ का आयोजन किया जाता है।

Why kumbh mela is celebrated?

अमृत कलश की खींचा तानी के समय चन्द्रमा द्वारा अमृत को बहने से बचाया गाय।
गुरू वृहस्पति ने कलश को छुपा कर रख दिया। सूर्य देव के द्वारा कलश को फूटने से बचाया गया.
और शनि देव ने इन्द्र के कोप से इसकी रक्षा की थी। इसलिए जब भी इन ग्रहों का संयोग एक राशि में आते हैं, तब कुंभ का अयोजन किया जाता है।
क्योंकि इन ही चार ग्रहों के सहयोग के द्वारा ही अमृत की रक्षा हुई थी।

Kumbh mela held after how many years?

12 वर्ष नहीं हर तीसरे वर्ष लगता है कुंभ
गुरू किसी भी गृह पर लगभग एक वर्ष तक रहते हैं. इसी तरह बारह राशियों में भ्रमण करते हुए उसे 12 वर्ष तक का समय लगता है।
इसी कारण हर बारह साल बाद फिर उसी स्थान पर कुंभ का आयोजन होता है।

Maha kumbh: ek rahasaya, ek kahani

परन्तु कुंभ के लिए चार स्थानों में अलग-अलग स्थान पर हर तीसरे वर्ष कुंभ का अयोजन होता है।
कुंभ के लिए निर्धारित चारों स्थानों में से प्रयागृज के कुंभ का विशेष रूप से महत्व है।
और हर 14 वर्ष बाद यहां महाकुंभ का आयोजन होता है।

kumbh
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Kumbh mela held on how many river bank?

महाकुंभ की मान्यता
शास्त्रों के अनुसार ऐसा बताया गया है कि पृथ्वी का एक वर्ष देवताओं के लिए एक दिन होता है.
यही कारण है की हर बारह वर्ष के बाद एक स्थान पर पुनः कुंभ का आयोजन होता है।
देवताओं का बारह वर्ष पृथ्वी लोक के अनुसार 144 वर्ष के बाद आता है।

Prayagraj kumbh mela 2019

ऐसी कहा जाता है कि 144 वर्ष के बाद स्वर्ग में भी कुंभ का आयोजन होता है.
यही कारण है की उस वर्ष पृथ्वी पर भी महाकुंभ का अयोजन होता है।
महाकुंभ के लिए सबसे निर्धारित स्थान प्रयागराज को माना गया है।

Kumbh mela 2019

इस वर्ष कुम्भ मेला 2019 की तैयारी चल रही हैं. मकर संक्रांति एवम लोहरी की तैयारियां धूमधाम से चल रही हैं.
कुम्भ मेले की शुरुआत भी इस वर्ष मकर संक्रांति 2019 से होने रही है.
मकर संक्रांति साल 2019 में कुम्भ मेला 2019 में 14 जनवरी को नहीं बल्कि 15 जनवरी को होने वाला है.
इस वर्ष अर्ध कुम्भ मेला जो पूरे 50 दिन यानी 4 मार्च महा शिवरात्रि तक चलने वाली है.

Kumbh mela 2019 in hindi

इसी दिन साल 2019 में ही प्रयाग में हो रहे अर्ध कुंभ की समाप्ति भी हो जाएगी.
मान्यता है कि प्रयागराज में त्रिवेणी संगम (त्रिवेणी संगम) में डुबकी लगाने से मनुष्यों के सभी पापों का नाश हो जाता है.
यही कारण है की बड़े-बड़े साधू-संतों से लेकर सभी महँ श्रद्धालु कुंभ मेले में शामिल होते हैं.

Kumbh mela 2019 Date

इस बार अर्ध कुंभ की शुरुआत 15 जनवरी से 4 मार्च तक चलेगा.
प्रयाग में हो रहे इस अर्ध कुंभ मेले में 6 प्रमुख स्नान की तिथियां होंगी.
अर्ध कुंभ की शुरुआत पहले 14 जनवरी को मकर संक्रान्ति (मकर संक्रांति) से लेकर 4 मार्च महा शिवरात्रि (महा शिवरात्रि) तक चलना है.

kumbh mela 2019 date
kumbh mela 2019 date

Kumbh mela snan tithi

इस वर्ष 50 दिन चलने वाले अर्द्ध कुंभ की सभी महत्वपूर्ण स्नान तिथियां निम्नप्रकार हैं

  1. मकर संक्रांति – (Makar Sankranti, 14 Jan, 2019)

  2. पौष पूर्णिमा – (Paush Purnima, 21 Jan, 2019)

  3. मौनी अमावस्या – (Mauni Amavasya, 4 Feb, 2019)

  4. बसंत पंचमी – (Basant Panchami, 10 Feb, 2019)

  5. माघी पूर्णिमा – (Maghi Purnima, 19 Feb, 2019)

  6. महाशिवरात्रि – (Maha Shivratri, 4 Mar, 2019)