kedarnath

kedarnath temple – केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का पूरा रहस्य Leave a comment


Kedarnath Temple

भगवान शिव जिन्हें भक्त महादेव भोलेनाथ पर महाकाल ना जाने ऐसे कितने नामों से जानते हैं और भगवान् शिव को लिंग के रूप में पूजा जाता है जिसे शिवलिंग कहते है. हमारे भारत वर्ष में भी भगवान् शिव के कुछ ऐसे मंदिर है जहाँ साक्षात भगवान् वास करते है और उनके दर्शन के लिए भक्तो का ताँता लगा रहता है. भगवान् शिव के इन्ही मंदिरो में से एक मंदिर है केदारनाथ जो महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों में भी शामिल है| केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड में स्थित है और समुन्द्र ताल से 3583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. ऋषिकेश से इसकी दूरी लगभग 223 किलोमीटर है|


उत्तराखंड में kedarnath के साथ-साथ बद्रीनाथ की एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है और दोनों के दर्शनों का शास्त्रों में काफी महत्व बताया गया है| इनके सम्बन्ध में यह लिखा गया है कि जो व्यक्ति ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है, बद्रीनाथ के दर्शन करता है उसकी यात्रा निष्फल मानी जाती है और इसीलिए भक्त पहले केदारनाथ के दर्शन करते हैं और उसके बाद बद्रीनाथ की तरफ जाते हैं|

Kedarnath Temple के दर्शन करने भक्त हर कोने कोने से आते हैं लेकिन साल 2013 में एक ऐसी घटना घटी जिसके बाद से यह मंदिर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लोग इसे जानने लग गए तो दोस्तों आज हम आपको कुछ ऐसे ही मैं तो कुछ ऐसे ही अद्भुत चमत्कार के बारे में बताएंगे जो केदारनाथ 2013 आपदा में हुए थे |


दोस्तों अगर हम kedarnath mandir की बात करें तो यह मंदिर जैसा कि आप फोटो ते हैं एक 6 फीट ऊंचे चकोर चबूतरे पर बना हुआ है मंदिर के आगे नंदी यानी भगवान शिव के वाहन का निर्माण किसने कराया इसका कोई प्रमाणिक उल्लेख नहीं मिलता लेकिन ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण गुरु शंकराचार्य ने किया था |

जैसा कि हम सभी लोग देख रहे हैं इंसान प्रकृति के साथ लगातार खिलवाड़ करते जा रहा है इसी का परिणाम है केदारनाथ का महाप्रलय प्रचंड तबाही आज हम केदारनाथ(Kedarnath) की उस घटना के बारे में बात करेंगे जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई और लाखों लोग आज भी घर आज भी खाली पड़े हुए हैं

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kedarnath yatra

मई 2013, मंदिर के दरवाजे हमेशा की तरह उन श्रद्धालुओं के लिए खोले गए जो अपने देवता की एक झलक पाने के लिए बेताब थे उस समय  इस तीर्थ यात्रा का 14 किलोमीटर लंबा रास्ता गौरीकुंड से केदारनाथ तक जाता था| गौरीकुंड तक पक्की सड़क मौजूद थी|इस रास्ते पर ढेरों खच्चर और लोगों को ले जाने वाली बहुत सारी पालकी  मौजूद हुआ करती थी| पैदल चलने वाले लोगों को और इनके बीच मुकाबला चलता रहता था| उस मौसम में लगभग 500000 से ज्यादा श्रद्धालु आने की उम्मीद थी|

How to reach kedarnath

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आज हम,केदारनाथ की यात्रा के बारे में बताइए| केदारनाथ की यात्रा 16 किलोमीटर की है जिसमें से 10 किलोमीटर की यात्रा 6 किलोमीटर की यात्रा बहुत ही कठिन है 2013 की आपदा के बाद कुछ नए रास्ते भी बनाए गए हैं आपदा के बाद एक नया पुल भी बनाया गया है जो कि रामबाड़ा पर हैं

kedarnath flood

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इतिहास में पहली बार मंदाकिनी में ऐसा विशाल और विकराल रूप धारण किया आंखें फटी की फटी रह गई ऐसा लग रहा था जैसे कि वह सारा कुछ अपने अंदर समा लेना चाहती है रास्ते में जो भी चीजें अपने साथ ले जा रही थी जैसा कि हम जानते हैं कि देवों के देव महादेव से बड़ी कोई शक्ति नहीं है| है पूरे ब्रह्मांड में खुद अपने काबू में रखने वाले सबसे बड़ी कोई भी शक्ति नहीं और इस बात को केदारनाथ  में हुए भयंकर तबाही में इस बात को पूरी तरीके से सच साबित करके दिखाया  केदारनाथ में हुई तबाही में भगवान महादेव ने ऐसे कुछ चमत्कार भी दिखाएं जिन्हें देखकर दुनिया नतमस्तक हो गई  जब केदारनाथ में स्थित   सारे मंदिरों  सारे मंदिर   मंदाकिनी अपने साथ बहा ले जा रही थी और बार-बार केदारनाथ  से टकरा रही थी और तब ऐसा लग रहा था कि इतनी भयंकर लहरों का सामना केदारनाथ बिल्कुल भी नहीं कर पाएगा लेकिन उसका परिणाम बिल्कुल विपरीत हुआ केदारनाथ ने डटकर सामना किया और भगवान शिव ने अपनी लीला का एक और नया उदाहरण पेश किया अचानक से लहरों के बीच एक विशाल शिला  प्रकट हो  जाती है जिसने केदारनाथ में स्थित मंदाकिनी को लहरों के साथ चोट से बचाने में पूरी सहायता हुई ऐसा माना जाता है कि स्वयं भगवान महादेव शिला के रूप में वहां प्रकट हो गए|


kedarnath video

kedarnath shivling

केदारनाथ में जितनी भक्त आते हैं उसे (शिला) भगवान महादेव के रूप में पूजते हैं| केदारनाथ विश्वास का एक प्रतीक है|  विशाल हिमालय पर्वत की गोद में मौजूद है| केदारनाथ यह चार धाम यात्रा के चार स्तंभों से एक माना जाता है और हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण केदारनाथ   के नाम से भी जानते हैं वहां देश द्वारा झेली गयी  सबसे भयंकर और प्रलयकारी झेली गयी आपदा घटित हुई| लगातार होने वाली बारिश ने आपदा का रूप ले लिया इस पहाड़ी राज्य की नदियां उफान लेने लगी और 40 वर्ग  किलोमीटर के इलाके में जबरदस्त तबाही हुई|

यह आपदा तबाही में तब्दील हो गई में भयंकर तबाही हुई जहां हजारों लोगों की मौत हुई 4000 से ज्यादा लोग मारे गए बहुत सारे परिवार बेघर हो गए बच्चे अनाथ हो गए   और वह कभी नहीं मिले| केदारनाथ का पवित्र शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ क्योंकि अचानक आई एक के बाद आपदा के बाद किसी को संभलने का मौका नहीं मिला| केदारनाथ बुरी तरीके से प्रभावित हुआ है जैसा कि हम जानते हैं केदारनाथ का दृश्य पहले जैसा नहीं है वह बहुत ही छिन्न भिन्न हो चुका है क्योंकि एक के बाद एक दो बार उन्होंने ने केदारनाथ को पूरी तरीके से घेर लिया| इस बर्बादी के बावजूद मंदिर 2 महीने के लिए मतलब सितंबर में खोला गया हमेशा की तरह सर्दियों में मंदिर को बंद कर दिया गया 4 मई 2014 त्रासदी  के 1 साल के बाद इस केदारनाथ मंदिर तक पहुंचना   शुरू हो गया है|

kedarnath history

सन 1982 में केदारनाथ कुछ इस तरह से दिखाई देता था| अगर बात करें इंसान के स्वार्थ की निरंतर विकास के कारण केदारनाथ का दृश्य बदल चुका है|

मई 2013 की बात करें तो केदारनाथ में घटना कुछ इस तरीके से घटित हुई मई 2013 की बात करें तो केदारनाथ में घटना कुछ इस तरीके से घटित हुई| मंदाकिनी ने अपना प्रचंड रूप धारण कर लिया था और निरंतर बारिश हुई जा रही थी जो कि थमने का नाम नहीं ले रही थी |

16 जून की सुबह बारिश होते हुए 2 दिन खत्म हो चुके थे | लेकिन फिर भी श्रद्धालुओं के जोश में कोई कमी नहीं थी | बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी| 16 जून 2013 मंदाकिनी नदी में अचानक बाढ़ आने से केदारनाथ का रास्ता तबाह हो गया|  इस रास्ते को तहस-नहस करने वाली दो बार बारिश जो अचानक आई थी| केदारनाथ कस्बा पूरी तरीके से तबाह हो गया इस इलाके को तहस-नहस करने वाली उनमें से यह मंदाकिनी की एक चोट पहली थी|

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केदारनाथ के ठीक ऊपर मौजूद चौरा बारी ग्लेशियर के पास चौरा बारी झील इसके किनारे टूट जाने से कीचड़ पत्थर और किनारों का एक जबरदस्त सैलाब केदारनाथ की तरफ बढ़ चला| गौरीकुंड कस्बे पर भी इस हादसे का बहुत बुरा असर हुआ था| यहां कभी भीड़ भाड़ वाले  होटल्स ,गेस्ट हाउस और बहुत सारी दुकान हुआ करती थी| गौरीकुंड कस्बे पर भी इस हादसे का बहुत बुरा असर हुआ था|यहां कभी भीड़ भाड़ वाले  होटल्स ,गेस्ट हाउस और बहुत सारी दुकान हुआ करती थी लेकिन यहां अब सब सन्नाटा था और बची हुई थी जिंदगी की कुछ निशानियां|

17 जून की सुबह केदारनाथ घाटी पूरी तरह से वीरान पड़ी हुई थी जैसा की हमने अपने पोस्ट में बताया बहुत सारे बहुत सारे परिवार अलग हो चुके हैं हर तरफ तबाही का मंजर था कुछ लोगों ने गेस्ट हाउस मे रात को रुके उनके आसपास जो घर,इमारत थी सारी खंडहर में तब्दील हो चुकी थी|

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