Kashi Vishwanath Temple

Kashi Vishwanath Temple – जानिए क्या है काशी विश्वनाथ मंदिर की कहानी Leave a comment

Kashi Vishwanath Temple

Kashi Vishwanath Temple – विश्वनाथ धाम यह ज्योतिर्लिंग काशी शहर के मध्य में स्थित है तथा कशी विश्वनाथ धाम से प्रख्यात है। काशी का आधुनिक नाम वाराणसी है। गंगा, वरुणा और असी जैसी पावन नदियों के बीच बसी हुई वाराणसी नगरी भारत ही नहीं संसार के प्राचीनत्म नगरों में से एक है। बीच के काल में इसे बनारस के नाम से पुकारा जाता था। तीर्थ के रूप में वाराणसी का महत्वपूर्ण स्थान है। यह सदियों से भारत के लिए आस्था, पवित्रता, ज्ञान और धर्म का केंद्र रहा है।


गंगा के किनारे बने यहाँ के घाट सर्वत विख्यात है। प्रत्येक घाट का अपना ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक विश्वनाथ के होने से ही वाराणसी का महत्व नहीं है बल्कि वाराणसी की गिनती तृस्थल में भी की जाती है। कहा जाता है कि प्रलयकाल में भी काशी का लोप नहीं होता। इसे सवयंम भगवान शिव त्रिशूल पर धारण कर लेते है और सृष्टि काल में पुनः नीचे उतार लेते है। इससे सृष्टि कि आदिस्थल भी माना जाता है।

Kashi Vishwanath Temple History

Kashi Vishwanath Temple
Kashi Vishwanath Temple Images

काशी को भगवान शिव कि सबसे प्रिये नगरी कहा जाता है। इस बात का वर्णन्न कई पुराणों और ग्रंथो में किया गया है। काशी में ही भगवान शिव का प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ भी है। यहाँ वाम रूप में स्थापित बाबा विश्वनाथ शक्ति की देवी माँ भगवती के साथ है। काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग 2 भाग में है।


दाहिनी भाग में शक्ति के रूप में माँ भगवती है और दूसरी और भगवान शिव वाम रूप में विराजमान है। इसलिए काशी को मुक्ति क्षेत्र कहा जाता है। देवी भगवती के दाहिनी ओर विराजमान होने से मुक्ति का मार्ग केवल काशी में ही खुलता है यहाँ मनुष्य को मुक्ति मिलती है और दुबारा गर्भ धारण नहीं करना पड़ता।

भगवान शिव खुद यहाँ तारक मंत्र देकर यहाँ लोगो को तारते है। अकाल मृत्यु से मारा व्यक्ति बिना शिव आराधना से मुक्ति नहीं पा सकता। शृंगार के समय साडी मूर्तियाँ पश्चिम मुखी होती है। इस ज्योतिर्लिंग में शिव और शक्ति दोनों ही विराजते है जो की अध्बुद्ध है ऐसा दुनिया में कही और देखने को नहीं मिलता। विश्वनाथ दरबार में गर्भ ग्रह का शिखर है। इसमें ऊपर की तरफ गुम्बद श्रीयंत्र से मंडित है। तांत्रिक सिद्धि के लिए ये उपयुक्त स्थान है।

Kashi Vishwanath Temple History In Hindi

Kashi Vishwanath Temple
Shri Kashi Vishwanath Temple

इसे श्रीयंत्र तंत्र साधना के लिए प्रमुख माना जाता है। बाबा का ज्योतिर्लिंग गर्भ ग्रह में ईशान कोड़ में मौजूद है। इस कोड़ का मतलब होता है सम्पूर्ण विद्या ओर हर कला से परिपूर्ण दरबार तंत्र की 10 महाविधाओं का अध्बुद्ध दरबार जहाँ भगवान शंकर का नाम ही ईशान है। बाबा विश्वनाथ काशी में गुरु और राजा के रूप में विराजमान है। ये दिन भर गुरु रूप में काशी में ब्रामण करते है।


रात्रि 9 बजे जब बाबा का शृंगार आरती की जाती है तो वे राजवेश में होते है इसलिए शिव को राज राजेश्वर भी कहते है। बाबा विश्वनाथ और माँ भगवती काशी में प्रतिज्ञाबध है। माँ भगवती अन्नपूर्णा के रूप में हर काशी में रहने वालो को पेट भर्ती है। वही बाबा मृत्यु के पश्चात तारक मंत्र दे कर मुक्ति प्रदान करते है। बाबा को इसलिए तारकेश्वर भी कहा जाता है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन मात्र से ही जन्म जन्मातर के पाप धूल जाते है।

Kashi Vishwanath Temple Varanasi

Kashi Vishwanath Temple
Kashi Vishwanath Temple Live Darshan

शिवरात्रि में बाबा विश्वनाथ ओघड़ रूप में भी विचरण करते है। उनकी बारात में भूत-प्रेत, जानवर, देवता, पशु और पक्षी सभी शामिल होते है।

कहानियो के अनुसार काशी का मंदिर जो की आज मौजूद है वो वास्तविक मंदिर नहीं है। काशी के प्राचीन मंदिर का इतिहास कई साल पुराना है जिसे औरंगज़ेब ने नष्ट कर दिया था बाद में फिर मंदिर का निर्माण किया गया था जिसकी पूजा अर्चना आज की जाती है।

Who Built Kashi Vishwanath Temple

काशी विश्वनाथ मंदिर Kashi Vishwanath Temple का पुनःनिर्माण इंदौर की रानी अहिल्या बाई होलकर ने कराया था। मान्यता है कि 18वी शताब्दी के दौरान, सवयंम भगवान शिव ने अहिल्या बाई के सपने में आकर इस जगह उनका मंदिर बनवाने को कहा था। मंदिर के ऊपर सोने का बना एक छत्र लगा हुआ है। इस छत्र को चमत्कारी माना जाता है। इसे लेकर एक मान्यता है अगर कोई भी भक्त इस छत्र के दर्शन करने के बाद कोई प्रार्थना करता है तो उसकी मनोकामना ज़रूर पूरी होती है।

Kashi Vishwanath Temple Timings

Kashi Vishwanath Temple
Kashi Vishwanath Temple Photos

काशी विश्वनाथ मंदिर Kashi Vishwanath Temple कि आरती पूरे देश-भर में प्रसिद्ध है। यहाँ दिन में 5 बार आरती होती है। मंदिर रोज़ सुबह 2:30 बजे खोला जाता है। भक्तो के दर्शन के लिए सुबह 4 से 11 बजे तक मंदिर खुला रहता है। यदि कोई दोपहर में मंदिर के दर्शन करना चाहता है तो वह 12 से 7 बजे तक मंदिर में पूजा कर सकता है।

Kashi Vishwanath Temple Darshan Timings

शाम 7 बजे तक सप्त ऋषि आरती होती है। उसके बाद 9 बजे तक श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर सकते है। 9 बजे भोग आरती शुरू की जाती है इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में जाना वर्जित होता है अथवा मंदिर में नहीं जा सकते।

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