Kaal Bhairav

kaal Bhairav – जानिए क्या है काल भैरव का रहस्य? 2

Kaal Bhairav Rahasya – काल भैरव रहस्य

Kaal Bhairav – भगवान भैरव की महिमा अनेक शास्त्रों में मिलती है। भैरव जहा शिव के गण के रूप में जाने जाते है वही वह दुर्गा जी के अनुचारी माने गए है। भैरव की सवारी कुत्ता है। चमेली फूल प्रिये होने के कारण उपासना में इसका विशेष महत्व है। साथ ही भैरव रात्रि के देवता माने जाते है


और इनकी आराधना का समय भी मध्य-रात्रि के समय 12 से 3 का माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव के 2 स्वरूप बताये गए है। एक स्वरूप में महादेव अपने भक्तो को अभ्य देने वाले विस्वय स्वरूप है और दूसरे स्वरूप में भगवान शिव दुष्टो को दंड देने वाले काल भैरव स्वरूप में वित्तमान है।

शिवजी का विश्वेश स्वरूप अत्यंत ही सौम्य और शांत है। ये भक्तो को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता है। वही भैरव स्वरूप रौद्र रूप वाले है। इनका रूप भयानक और विकराल होता है। इनकी पूजा करने वाले भक्तो को किसी भी प्रकार का डर कभी परेशान नहीं करता। कलयुग में भय से बचने के लिए Kaal Bhairav की आराधना सबसे अच्छा उपाय माना जाता है। काल भैरव को शिवजी का ही रूप माना गया है।


Kaal Bhairav

Kal Bhairav Photo

Kaal Bhairav Rahasya In Hindi

काल भैरव की पूजा करने वाले व्यक्ति को किसी भी प्रकार का डर नहीं सताता है। भैरव शब्द का अर्थ ही होता है भीषण, भयानक या डरावना। भैरव को शिव के द्वारा उत्पन्न हुआ या शिव पुत्र माना जाता है। भगवान शिव के 8 विभिन्न रूपों में से भैरव एक है वो भगवान शिव का एक प्रमुख योद्धा है।

भैरव के 8 स्वरूप पाए जाते है जिनमे प्रमुक्त काला और गोरा भैरव अति प्रसिद्ध है। रूद्र माला से सुषोभित जिनकी आँखों में से आग की लपटे निकलती है जिनके हाथ में कपाल है जो अति उग्र है इसे काल भैरव को वंदन है। Kaal Bhairav के स्वरनात्मक प्रार्थना से ही उनके भयंकर एवम उग्र रूप का परिचय हमें मिलता है।

जानिए कैसे हुआ काल भैरव का जन्म?

Kaal Bhairav के उत्पत्ति की कथा शिव पुराण में इस तरह है कि एक बार मेरु पर्वत के शिखर पर ब्रम्ह्मा विराजमान थे। तब सभी देवगण और ऋषिदेव उत्तम तत्व के बारे में जानने के लिए उनके पास गए। तब ब्रम्हा ने कहा कि वह स्वयं ही उत्तम तत्त्व है यानि सर्वश्रेष्ठ और सर्वोच्य है किन्तु भगवान विष्णु इस बात से सहमत नहीं थे। उन्होंने कहा कि वह इस समस्त सृष्टि के सर्जक और परमपुरष परमात्मा है। तभी उनके बिच एक महान ज्योति प्रकट हुई।

Kaal Bhairav

उस ज्योति के मंडल में उन्होंने एक पुरष का एक आकर देखा। तब 3 नेत्र वाले महान पुरष शिव स्वरूप में दिखाई दिए, उनके हाथ में त्रिशूल था, सर्प और चंद्र के अलंकार धारण किये हुए थे। तब ब्रम्हा ने अहंकार से कहा की आप पहले मेरे ही लगाट से रूद्र रूप में प्रकट हुए है।

उनके इस अहंकार को देखकर भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए और उस क्रोध से भैरव नमक पुरष को उत्पन्न किया। ये भैरव बड़ी तेज़ से प्रज्वल्लित हो उठा और साक्षात् काल की भाति दिखने लगा। इसलिए वो काल राज़ से प्रसिद्ध हुआ और भयंकर होने से भैरव कहलाने लगा।

काल भी उनसे भयभीत होगा इसलिए वह Kaal Bhairav कहलाने लगे। दुष्ट आत्माओ का नाश करने वाला ये अमरदक भी कहा गया। काशी नगरी का अधिपति भी उन्हें बनाया गया। उनके भयंकर रूप को देखकर ब्रम्हा और विष्णु शिव की आराधना करने लगे और गर्भरहित हो गए|

Kaal Bhairav Story In Hindi

Kaal Bhairav


श्री Kaal Bhairav भगवान शिव के पांचवे स्वरूप है तो विष्णु के अंश भी है। इनकी उपासना मात्र से ही सभी प्रकार के दैविक और मानसिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है। कोई भी मानव इनकी पूजा, आराधना, उपासना से लाभ उठा सकता है। आज इस युग में, मानव को कदम कदम पर बाधाओं, विपत्तिया और शत्रुओ का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में मंत्र साधना ही इन सब समस्याओं पर विजय दिलाता है। शत्रुओ का सामना करने सुख शांति-समृद्धि में ये साधना अति-उत्तम है।

श्री Kaal Bhairav का नाम सुनते ही बहुत से लोग भयभीत हो जाते है और कहते है कि ये उग्र देवता है। इनकी साधना वाहमार से होती है इसलिए यह हमारे लिए उपयोगी नहीं है। लेकिन ये मात्र उनका ब्रम्ह है। प्रय्तेक देवता सात्विक राजा सत्तामक रूप वाले होते है किन्तु ये स्वरूप उनके द्वारा भक्त के कार्य कि सिद्धि के लिए ही धारण किये जाते है। श्री Kaal Bhairav इतने कृपालु और भक्तवत्सल है कि सामान्य समरण स्तुति से ही प्रसन्न होकर भक्त के संकटो का तत्काल निवारण कर देते है। तान्त्र्यचारियो का मानना है कि वेदो में जिस परम्-पुरुष का चित्रण रूद्र के रूप में हुआ है वही तंत्र शास्त्र के ग्रंथो में भैरव के नाम से जाना जाता है।

  • भ से विश्व का भरण
  • र से रमस
  • व से वमन

अर्थात सृष्टि को उत्पत्ति पालन और संघार करने वाला शिव ही भैरव है। भगवान शंकर के भैरव रूप को ही सृष्टि का संचालक बताया गया है।

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Kaal Bhairav Puja Benefits

भैरव कलयुग के जागृत देवता है। शिव पुराण में Kaal Bhairav को महादेव शंकर का पूर्ण रूप बताया गया है। इनकी आराधना में कठोर नियमो का विधान भी नहीं है। ऐसे परमकृपालु शिग्रह फल देने वाले भैरवनाथ की शरण में जाना पर जीव का निष्चय ही उद्धार हो जाता है। Kaal Bhairav के नाम जप मात्र से मनुष्य को कई रोगो से मुक्ति मिल जाती है। वह संतान को लम्बी उम्र प्रदान करते है। अगर आप भूत-प्रेत बाधा, तांत्रिक क्रियाओ से परेशान है तो आप शनिवार या मंगलवार कभी भी अपने घर में भैरव पाठ का वाचन कराये। इससे समस्त कष्टों, परेशानियों से मुक्त हो सकते है।

जन्मकुंडली में अगर आप मंगलग्रह के दोषो से परेशान है तो भैरव की पूजा करके पत्रिका के दोषो का निवारण आसानी से कर सकते है। राहु-केतु के उपायों के लिए भी इनका पूजन करना अच्छा माना जाता है। Kaal Bhairav व की पूजा में काली उरद से बने मिष्ठान, इमरती, दही-वड़े, दूध और मेवा का भोग लगाना लाभकारी है इससे भैरव प्रसन्न होते है। भैरव की पूजा-अर्चना करने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि के साथ-साथ सवस्थ की रक्षा भी होती है। तंत्र के ये जाने-माने देवता काशी के कोतवाल माने जाते है। भैरव कवच से असामाहिक मृत्यु से बचा जा सकता है।

Kaal Bhairav

Kaal Bhairav Puja Benefits In Hindi

खासतौर पर Kaal Bhairav अष्टमी पर भैरव के दर्शन करने से आपको अशुभ कर्मो से मुक्ति मिल सकती है। वैसे तो आम-आदमी शनि देवता, काली माँ और काल भैरव का नाम सुनते ही घबराने लगते है। लेकिन सच्चे दिल से की गयी इनकी आराधना आपके जीवन के रूप रंग को बदल सकती है। ये सभी देवता आपको घबराने के लिए नहीं बल्कि आपको सुखी जीवन देने के लिया तत्पर रहते है पर आपको सही रास्ते पर चलते रहना चाहिए।

भैरव अपने भक्तो की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करके उनके कर्म-सिद्धि को अपने आशीर्वाद से नवाज़ते है। भैरव उपासना जल्दी फल देने के साथ-साथ क्रूर ग्रहो के प्रभावों को समाप्त कर देती है। शनि या राहु से पीड़ित व्यक्ति अगर शनिवार और रविवार को Kaal Bhairav के मंदिर में जाकर दर्शन करे तो उनके सारे कार्य सकुशल संपन्न हो जाते है।

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