jeevan mantra

Jeevan mantra-Jeevan ka lakshya Leave a comment

Jeevan ka lakshya

मनुष्य जीवन एक अद्भुत और बहुत ही अनमोल है। मनुष्य को यह Jeevan mantra ही समझना इस जीवन की सार्थकता है। कितने कल्पों (युगों) के बाद इस मनुष्य तनु हमको मिलता है। देवी देवता भी इस मनुष्य जीवन के लिए लालायित रहते हैं।


इस अनमोल जीवन का अच्छे काम करके सदुपयोग करना चाहिए। कबीरा कहते हैं,

“जब हम पैदा हुए जग हसे हम रोये ऐसी करनी किये चलो हम हसे, जग रोये”।।

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Jeevan ka satya

संसार की सारी बुराइयों से भी परे एक चीज़ है। वह हैं ‘ईश्वर’, संसार ईश्वर का कलामंच है। जहाँ हम सब उस रंग मंच के अभिनयकर्ता हैं। हम सभी जब तक मातृ गर्भ में रहते हैं। तब तक हमे यह ज्ञान रहता है की हमारा एक ही लक्ष्य है, कैसे हम उस परमात्मा से मिले।


यह आत्मा कितने जन्मों से भटक रही है। कितने शरीर बदल चुकी है। परन्तु जब उसे मनुष्य जन्म मिलता है, तो यही एक मात्र उसके पास साधन होता है, परमात्मा से मिलन का।

संसारेऽस्मिन् क्षणार्धोऽपि सत्संगः शेवधिर्नृणाम्।

Jiwan kya hai

Jeevan Mantra समझना मनुष्य के लिए बहुत ही अनिवार्य है और मंत्र एक ही है ‘ईश्वर’, परम तत्व, ‘परमात्मा’। अब कैसे ईश्वर में भक्ति बड़े कैसे ईश्वर का साक्षात्कार हो यही इस मंत्र की सार्थकता है

मनुष जन्म आखरी पौड़ी, तिलक गया ते वारि गई।
कहे अवतार चौरासी वाली, घोल घमाई सारी गई।।

जगत से जगदीश (परमात्मा) की ओर मुड़ना जीवन का लक्ष्य है इस मायारूपी संसार के बंधनो को काट कर परमात्म तत्त्व की और अग्रसारित होना ही जीवन मंत्र को सत्यता को पूर्णाहुति देना है


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Mere jeevan ka lakshya

मनुष्य जन्म ह्रदय में प्रेम होना अनिवार्य है। प्रेम बिना यह मनुष्य जीवन ऐसा जैसे मुरझाये फूल। ग्रंथों में भी मनुष्य जीवन के बारे में लिखा गया है।

‘बड़े भाग मानुष तन पावा।
सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन्ह गावा।।

 मानव जीवन का लक्ष्य क्या है?

हम जैसे ही इस संसार लोक में आते है, जन्म लेते हैं, माया के द्वारा हमारा मन घिर जाता है।

बहुनाम् जन्माम् अन्ते ज्ञानवान् माम् प्रपद्यते।

हम सब भ्रमित हो जाते हैं और क्षणिक आनंद को ही पूर्ण आनंद समझ कर जीवन निर्वाह करने लगते हैं। परन्तु यह उस स्वप्न की तरह है जो मनुष्य हर रात को देखता है, परन्तु जैसे ही वह स्वप्न टूट जाता है, वह अपनी असली वास्तविकता को प्राप्त हो जाता है। और यही सोचता है की मैं तो स्वप्न में था असली में नहीं।

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Jeevan mantra in hindi

इसी प्रकार यह जीवन भी है। हम माया के बंधन में फसे हुए इस स्वप्न में जी रहे है। जब हम माया को लांघकर जाएंगे तभी यह स्वप्न टूटेगा। तभी ईश्वर साक्षात्कार होना संभव है। जो इस Jeevan mantra और इस मंत्र की सत्यता है।

देहिनां क्षणभंगुरः

मनुष्य जीवन मिला है तो दो बात हमेशा ध्यान में रखनी अनिवार्य है, ‘एक मृत्यु’ और दूसरा वह परम तत्व ‘परमात्मा’। क्योंकि इस जीवन में कुछ भी सत्य नहीं है। हाँ अल्प सत्य (कम सत्य) हो सकता हो सकता है। परन्तु पूर्ण सत्य मृत्यु और इश्वर ही हैं, यही असली जीवन मंत्र है।

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