Govardhan Puja

Govardhan Puja | Govardhan Puja Vidhi – Importance – Celebrations Leave a comment

Govardhan Puja – गोवर्धन पूजा

Govardhan Puja – गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन सुबह कार्तिक प्रतिपदा में मनाये जाने वाला हिन्दुओ का प्रमुख त्योहार है। गोवर्धन पूजा हिन्दुओं के लिए प्रमुख और बहुत बड़ा त्योहार माना जाता है। सामान्य भाषा में कहा जाये तो दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा के दिन ही बलि पूजा, (Annkut)अनकूट और मार्गपाली आदि उत्सव भी बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। गोवर्धन को अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। इस दिन गेहूँ, चावल, अनाज, बेसन से बानी कड़ी और पत्ते वाले भोज तैयार किये जाते है और इन्हे भगवान श्री कृष्ण को अर्पित किया जाता है। गोवर्धन या अन्नकूट पूजा भगवान श्री कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से ही शुरू हुई थी।


गोवर्धन पूजा का महत्व – Importance Of Govardhan Puja 

Govardhan Puja

Govardhan Puja Images 


Govardhan Puja इस दिन सुबह शरीर पर तेल की मालिश करके स्नान करना चाहिए। फिर घर के द्वार पर गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाए। इस पर्वत के बीच में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति रख दे। अब गोवर्धन पर्वत पर भगवान श्री कृष्ण को विभिन्न प्रकार के पकवानो व मिष्ठानो का भोग लगाए। साथ ही, देवराज इंद्र, वरुण, अग्नि और राजा बलि की भी पूजा करे। पूजा के बाद कथा सुने प्रसाद के रूप में दही व चीनी का मिश्रण सब में बाट दे। इसके बाद किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन करवाकर उससे दान-दक्षिणा देकर प्रसन्न करे।

गोवर्धन पूजा कैसे मानते है?

Govardhan Puja Vidhi In Hindi

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पर्व के रूप में हिन्दू लोग घर के आँगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ जी की प्रतिमूर्ति या गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मोली, रोली, चावल, फूल, दही और तेल का दीपक जलाकर पूजा करते है तथा परिक्रमा करते है।इसके बाद ब्रज के साक्षात देवता माने जाने वाले गिरिराज पर्वत को प्रसन्न करने के लिए अन्नकूट का भोग लगाया जाता है क्योकि इस दिन गायो की पूजा का दिन भी माना जाता है|

Govardhan Puja इस दिन गाय, बैल आदि पशुओ को स्नान कराकर फूल, माला, धुप, चन्दन आदि से उनका पूजन किया जाता है फिर उन्हें मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारी जाती है और अंत में उनकी प्रदक्षिणा की जाती है और माना जाता है की गायो को प्रदक्षिणा करना गोवर्धन पर्वत की प्रदक्षिणा करने जितना फलदायक माना जाता है। ये पूजन पशुधन और अन्नादि के भंडार के लिए किया जाता है। इन पर्वो से गायो का कल्याण होता है ऐश्वर्या और सुख प्राप्त होता है। कार्तिक के महीने में कुछ जप, पूजा आदि किया जाता है इन सब की फलप्राप्ति हेतु गोवर्धन पूजन आवश्य ही करना चाहिए।

गोवर्धन पूजा कथा  – Govardhan Pooja Katha 

Govardhan Puja

Happy Govardhan Images

Govardhan Pooja katha In Hindi

हिन्दू धर्म में दीपावली के अगले दिन की जाने वाली गोवर्धन पूजा Govardhan Puja के सन्दर्भ में भी एक पौराणिक कथा प्रचलित है जिसके अनुसार, एक समय देवराज इंद्र को सव्यम पर अत्यधिक अभिमान हो गया कि अगर वह वर्षा न करे तो पूर्ण पृथवी से जीवन का नाश हो जाएगा। इसलिए देवराज इंद्र के इस अभिमान को चूर करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने एक लीला रची।

एक दिन भगवान श्री कृष्ण ने देखा कि सभी बृजवासी किसी पूजा को संपन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार की तैयारियां और सवादिष्ट पकवान बना रहे थे। यह देख कर बालक श्री कृष्णा के मन में एक प्रशन आया और उन्होंने बड़े ही भोलेपन से अपनी मैया यशोधा से पूछा, कि मैया आज इतनी तैयारियां व इतने पकवान क्यों बनाये जा रहे है?  यशोदा ने जवाब दिया, कि सारे बृजवासी आज देवराज इंद्र कि पूजा करने के लिए तैयारियां कर रहे है। तो उस समय श्री कृष्ण ने अपनी मैया से पूछा, कि वह सब देवराज इंद्र कि पूजा क्यों कर रहे है? श्री कृष्ण के इस सवाल पर उनकी मैया ने उनसे कहा कि सारे बृजवासी और वह देवराज इंद्र कि पूजा इसलिए कर रहे है क्योकि देवराज इंद्र ही जल के देवता है और अगर वह हमारे द्वारा कि गई इस पूजा से प्रसन्न हो गए तो वह वर्षा करेंगे जिससे हमारे खेतो में अन्न कि पैदावार होगी और खेतो की घासो से हमारी गायो को चारा मिलेगा।

यह सुनकर श्री कृष्ण अपनी मैया से बोले कि हमारी गाय तो गोवर्धन पर्वत की घास चरकर अपना पेट भरती है इंद्र में क्या शक्ति है जो वर्षा करेंगे। वर्षा तो हमारे इस शक्तिशाली गोवर्धन पर्वत के कारण होती है क्योंकि वर्षा के बादल इसी गोवर्धन पर्वत से टकराकर ब्रज में बरस जाते है यदि गोवर्धन पर्वत न होता तो देवराज इंद्र भी ब्रज में वर्षा नहीं कर पाते। इस तरह तो गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। और गोवर्धन पर्वत तो हमें दिखाई भी देता है देवराज इंद्र तो हमें कभी दर्शन भी नहीं देते। यदि किसी वर्ष उनकी पूजा न की जाये तो वह हम पर क्रोधित भी हो जाते है तो इसे अहंकारी देवता की पूजा तो करनी ही नहीं चाहिए।


Govardhan Puja

Govardhan Pooja In Hindi 

जब श्री कृष्ण ने बृजवासियों से इसी बाते कही तो उनकी लीला और माया के कारण सभी देवराज इंद्र के बदले Govardhan Puja गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। कुछ ही देर में यहाँ नारदमुनि और इन्द्रोज यज्ञ देखने के लिए पहुँच गए परन्तु उन्होंने जब देखा की ब्रजवासी इस वर्ष देवराज इंद्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा कर रहे है तो उन्होंने बृजवासियों से पूछा, की इस वर्ष सभी जल के देवता देवराज इंद्र के स्थान पर गोवर्धन की पूजा क्यों कर रहे है? क्या इस वर्ष आपको वर्षा की ज़रूरत नहीं है?

तब बृजवासियों ने नारदमुनि से कहा, नहीं महाराज ऐसा नहीं है। अगर हमें वर्षा की ज़रूरत न होती तो हम ये पूजा ही क्यों करते। तब नारदमुनि ने बृजवासियों से पूछा, तो फिर आप सब देवराज इंद्र के स्थान पर Govardhan Puja गोवर्धन पर्वत की पूजा क्यों कर रहे है? इस सवाल के जवाब में सभी बृजवासियों ने नारदमुनि से कहा, कि हम सब भगवान श्री कृष्ण के कहने पर यज्ञ के स्थान पर Govardhan गोवर्धन पर्वत कि पूजा कर रहे है।

यह सुनकर नारदमुनि सीधा इंद्रलोक पहुंचे और उदास होकर बोले – हे देवराज इंद्र आप यहाँ सुख शांति से निश्चित होकर बैठे है और उधर बृजवासियों ने श्री कृष्ण के कहने पर आपकी पूजा के स्थान पर Govardhan Puja गोवर्धन पर्वत कि पूजा की है। यह सुनकर देवराज इंद्र अत्याथिक क्रोधित हुए और मन ही मन उन्होंने इस अपमान का बदला लेने के लिए उन्होंने मूसलाधार वर्षा कर दी ताकि पूरा ब्रिज तहस-नहस होकर नष्ट हो जाये।

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Govardhan Pooja इतनी भयानक प्रलय के सामान वर्षा होती देख सभी बृजवासियों को लगने लगा की हमने श्री कृष्ण के कहने पर जल के देवता देवराज इंद्र की पूजा नहीं की, इसी कारण से वह हम बृजवासियों से नाराज़ हो गए है और इसलिए व सम्पूर्ण ब्रिज को जलमगन करने हेतु इतनी तेज़ वर्षा कर रहे है। ऐसा सोचकर सभी बृजवासियों भगवान श्री कृष्ण को कोसते हुए कहने लगे, कि सब तुम्हारी बात मानने के कारण हुआ है। न हम तुम्हारी बात सुनते और न ही देवराज इंद्र क्रोधित होते और न ही ऐसी भयंकर वर्षा होती।

जब सभी बृजवासी भगवान कृष्ण पर आरोप लगाने लगे, तो उन्होंने अपनी मुरली को कमर में डालकर अपनी कनिष्ठा ऊँगली पर पूरा गोवर्धन पर्वत ही उठा लिया और सभी बृजवासियों से कहा कि सभी लोग अपनी गायो और बछड़ो सहित इसकी शरण ले लीजिये। जब देवराज इंद्र ने श्री कृष्ण कि यह लीला देखी तो उन्हें और अधिक क्रोध आ गया। वे कहने लगे कि ये अदना सा बालक मुझसे प्रतिस्पर्धा कर रहा है फलसवरूप देवराज इंद्र ने वर्षा कि गति को और तेज़ कर दिया।

Govardhan Puja

Happy Govardhan Puja

Govardhan Puja इंद्र का मार्गदर्शन करने के लिए श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप गोवर्धन पर्वत के ऊपर रह कर वर्षा कि गति को नियंत्रित करे और शेषनाग से कहा कि आप मेड़ बनकर पानी को पर्वत की और आने से रोके। श्री कृष्ण भगवान के सुदर्शन चक्र और शेषनाग की सहायत से बृजवासियों पर वर्षा की एक बूँद भी नहीं गिर सकी। वह देखकर देवराज इंद्र को बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्हें लगा कि इतना छोटा सा बालक कि मेरा सामना कर रहा है कोई सामान्य मनुष्य तो नहीं हो सकता इसलिए वह ब्रम्हा जी के पास गए और उन्हें सब कुछ बताया। तब ब्रम्हा जी ने देवराज इंद्र से भगवान श्री कृष्ण के बारे में बताया कि देवराज इंद्र आप जिस कृष्ण कि बात कर रहे है वह सवयंम भगवान विष्णु के साकसात अंश है। ब्रम्हा जी के मुख से यह सुनकर देवराज इंद्र को अपने कृत पर बहुत लज्जा आई।

उन्होंने उसी समय मूसलाधार वर्षा को रोक दिया और सीधे ही ब्रिज में जा पहुंचे और भगवान श्री कृष्ण से कहा कि मैंने आपको पहचानने में भूल कर दी है और अहंकार वश ये सब कर दिया जो नहीं करना था। आप दयालु है कृपालु है इसलिए मेरे द्वारा कि गई गई भूल को क्षमा करे।

माना जाता है कि इंद्र देव ने लगातार 7 दिनों तक वर्षा की थी। श्री कृष्ण ने 7 वे दिन Govardhan गोवर्धन को नीचे रखा और बृजवासियों से कहा की अब तुम प्रतिवर्ष गोवर्धन द्वारा Annkut अन्नकूट का पर्व मनाया करो। तभी से ये पर्व गोवर्धन पूजा के रूप में प्रचलित है। और जिस दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को फिर से यथास्थान नीचे रखा था उस दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा थी। इसलिए भगवान श्री कृष्ण के इस कृत्य को याद रखने के उद्देश्य से ही दीपावली के दूसरे दिन Govardhan Pooja गोवर्धन पूजा की जाती है।

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