Ganesh Chaturthi

Ganesh Chaturthi 2018- Pooja Vidhi And Timings Leave a comment

Ganesh Chaturthi 2018

वक्रतुण्ड महाकाय​सूर्यकोटि समप्रभ​।
निर्विघ्नम् कुरु मे देव​सर्व कार्येषु सर्वदा॥

Ganesh Chaturthi  हुन्दुओ का प्रमुख त्यौहार है ये त्यौहार भारत के विभिन्न जगहों पर मनाया जाता है ! परन्तु महाराष्ट्र में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है . पुराणों के अनुसार भगवान गणेश का इस दिन जन्म हुआ था ! इस पर्व पर सभी हिन्दू गणेश जी पूजा करते है और कई जगह पर बड़ी बड़ी प्रतिमा गणेश जी की लगाई जाती है


Lord Ganesha 

उसके बाद भक्त भगवान श्री गणेश की पूजा करते है ! ११ दिन तक लोग बड़ी धूम धाम से गणेश जी की पूजा करते है और उसके बाद ढोल मजीरा बाजे के साथ गणेश जी की बिदाई करते है और जल में विषर्जित करते है !इसके अलावा कई जगह प्रतिमा को ३,५,७,९, दिन के लिए विराजित करते है !

गणेश जी भगवान देवाधिदेव महादेव के और माँ पार्वती के संतान है ! गणेश जी के बड़े भाई का नाम कार्तिके है और बहन का नाम अशोक सुंदरी है ! भगवन गणेश की दो पत्नियां है जिनका नाम रिद्धि और सिद्धि है ! बिघनहर्ता गणेश के दो पुत्र है जिनका नाम शुभ और लाभ है !


Ganesh Chaturthi 2018 date in india

 

भगवान गणेश का मुख हाथी के सामान दिखने के कारण इन्हे गजानन भी कहा जाता है , गणेश  जी  को मंगल मूर्ति भी कहा जाता है !  श्री गणेश की पूजा करने से ज्ञान , धन ,बुद्धि, सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है और सभी प्रकार के बिघ्न कष्ट दूर होते है ! भगवान श्री गणेश को प्रथम पूजा का अधिकार प्राप्त है , अर्थात हम किसी भी देवता का पूजन करें उससे पहले भगवन श्री गणेश की पूजा करना आवश्यक है !

गणेश जन्मोत्सब पर अर्थात Ganesh Chaturthi पर भगवान् श्री गणेश को मोदक के लड्डू भोग लगाया जाता है और उनका मनपसंद लाल रंग का फूल चढ़ाया जाता है !भक्तगन दयालु भगवान् श्री गणेश से अपने जीवन में सुख समृद्धि और शांति पाने की कामना करते है ! गणेश जी को शमी पत्र और दूर्वा अधिक पसंद है गणेश जी तुलसी नहीं चढ़ाया जाता है !

Ganesh Chaturthi Pooja Samagri

गणेश जी की पूजा में – केसर चंदन ,सिंदूर, अबीर गुलाल, पीले, फूल, द्रोप, या दूर्वा, अक्षत, सुपारी ,पंचामृत ,सामग्री, यानी, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, पंचमेवा,यानी, बादाम, काजू, दाख, पिस्ता ,व अखरोट गंगा या तीर्थजल बिल्वपत्र, धूप ,बत्ती ,दीपक, नैवेद्य में लड्ड्, गुड़, खड़ा धनिया या मिठाई इलायची, लौंग, नारियल, कलश ,लाल ,वस्त्रचांदी का वर्क इत्र फूल मालाडंठल वाला पानसरसों जनेऊ मिश्रीबतासे आंवला आदि का प्रयोग होता है !

Ganesh Visarjan

गणेश चतुर्थी की उत्सव गणेशोत्सव अनंत चतुर्दशी पर 10 दिनों के बाद समाप्त होती है जिसे गणेश विसर्जन दिवस भी कहा जाता है। अनंत चतुर्दशी पर, भक्तों के सड़क पर जुलूस के बाद जल में भगवान गणेश की मूर्ति को विसर्जित कर दिया जाता है ! गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना और गणपति पूजा दिन के मध्याह्न भाग के दौरान की जाती है और वैदिक ज्योतिष के अनुसार इसे गणेश पूजा के लिए सबसे सही समय माना जाता है।

Ganesh Chaturthi Pooja Timings

श्री गणेश जी का पूजा का समय = 11 : 09 से 13 : 35
अवधि – 2 घण्टे 26 मिनट्स

12 th को, चन्द्रमा को नहीं देखने का समय = 16 : 07 से 20 : 42
अवधि – 4 घण्टे 35 मिनट्स

१३th को, चन्द्रमा को नहीं देखने का समय = 09:33 से 21:23
अवधि – 11 घण्टे 50 मिनट्स

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – 12 सितम्बर 2018 को 16 :07 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त – 13 सितम्बर 2018 को 14:51बजे

Ganesh Chaturthi Pooja Vidhi

 

पूजन सामग्री अपने पास रख कर आप किसी आसन पर बैठे और भगवान को स्तापित करें | गणेश जी की मूर्ती सामने रखकर और श्रद्धा पूर्वक उस पर पुष्प छोड़े यदि मूर्ती न हो तो सुपारी कागणेश बनाकर लप अक्षत पर पर स्थापित करें

Vighnaharta Ganesha

अब हाथ में फूल लेकट ध्यान करें

गजाननं भूतगणादिसेवितम कपित्थजम्बू फल चारू भक्षणं |
उमासुतम शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम ||

प्रतिष्ठा करें

अस्यैप्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणा क्षरन्तु च |
अस्यै देवत्वमर्चार्यम मामेहती च कश्चन ||

आसन भगवान का ग्रहण करवाएं

रम्यं सुशोभनं दिव्यं सर्व सौख्यंकर शुभम |
आसनं च मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः ||

भगवान को जल चढ़ाये

उष्णोदकं निर्मलं च सर्व सौगंध्य संयुत्तम |
पादप्रक्षालनार्थाय दत्तं ते प्रतिगह्यताम ||

अर्घ्य दें भगवान को

अर्घ्य गृहाण देवेश गंध पुष्पाक्षतै 😐
करुणाम कुरु में देव गृहणार्ध्य नमोस्तुते ||

आचमन

सर्वतीर्थ समायुक्तं सुगन्धि निर्मलं जलं |
आचम्यताम मया दत्तं गृहीत्वा परमेश्वरः ||

स्नान कराएं

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जले अस्मिन् सन्निधिम् कुरु॥

दूध् से स्नान कराये

कामधेनुसमुत्पन्नं सर्वेषां जीवन परम |
पावनं यज्ञ हेतुश्च पयः स्नानार्थं समर्पितं ||

दही से स्नान-

पयस्तु समुदभूतं मधुराम्लं शक्तिप्रभं |
दध्यानीतं मया देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यतां ||

घी से स्नान –

नवनीत समुत्पन्नं सर्व संतोषकारकं |
घृतं तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ||

शहद से स्नान-


तरु पुष्प समुदभूतं सुस्वादु मधुरं मधुः |
तेजः पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ||

 

शर्करा से स्नान –

इक्षुसार समुदभूता शंकरा पुष्टिकार्कम |
मलापहारिका दिव्या स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ||

पंचामृत से स्नान –

पयोदधिघृतं चैव मधु च शर्करायुतं |
पंचामृतं मयानीतं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ||

शुध्दोदक स्नान

मंदाकिन्यास्त यध्दारि सर्वपापहरं शुभम |
तदिधं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम ||

वस्त्र

सर्वभूषाधिके सौम्ये लोक लज्जा निवारणे |
मयोपपादिते तुभ्यं वाससी प्रतिगृह्यतां |

उपवस्त्र

सुजातो ज्योतिषा सह्शर्म वरुथमासदत्सव : |
वासोअस्तेविश्वरूपवं संव्ययस्वविभावसो ||

यज्ञोपवीत

नवभिस्तन्तुभिर्युक्त त्रिगुण देवतामयम |
उपवीतं मया दत्तं गृहाणं परमेश्वर : ||

मधुपर्क

कस्य कन्स्येनपिहितो दधिमध्वा ज्यसन्युतः |
मधुपर्को मयानीतः पूजार्थ् प्रतिगृह्यतां ||

गन्ध

श्रीखण्डचन्दनं दिव्यँ गन्धाढयं सुमनोहरम |
विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यतां ||

रक्त

रक्त चन्दन समिश्रं पारिजातसमुदभवम |
मया दत्तं गृहाणाश चन्दनं गन्धसंयुम ||

रोली

कुमकुम कामनादिव्यं कामनाकामसंभवाम |
कुम्कुमेनार्चितो देव गृहाण परमेश्वर्: ||

सिन्दूर

सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् ||
शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यतां ||

अक्षत

अक्षताश्च सुरश्रेष्ठं कुम्कुमाक्तः सुशोभितः |
माया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वरः ||

पुष्प

पुष्पैर्नांनाविधेर्दिव्यै: कुमुदैरथ चम्पकै: |
पूजार्थ नीयते तुभ्यं पुष्पाणि प्रतिगृह्यतां ||

पुष्प माला

माल्यादीनि सुगन्धिनी मालत्यादीनि वै प्रभो
मयानीतानि पुष्पाणि गृहाण परमेश्वर: ||

बेल का पत्र

त्रिशाखैर्विल्वपत्रैश्च अच्छिद्रै: कोमलै :शुभै
तव पूजां करिष्यामि गृहाण परमेश्वर : ||

दूर्वा

त्वं दूर्वेSमृतजन्मानि वन्दितासि सुरैरपि |
सौभाग्यं संततिं देहि सर्वकार्यकरो भव ||

दूर्वाकर

दूर्वाकुरान सुहरिता नमृतान मंगलप्रदाम |
आनीतांस्तव पूजार्थ गृहाण गणनायक:||

शमीपत्र

शमी शमय ये पापं शमी लाहित कष्टका |
धारिण्यर्जुनवाणानां रामस्य प्रियवादिनी ||

अबीर गुलाल

अबीरं च गुलालं च चोवा चन्दन्मेव च |
अबीरेणर्चितो देव क्षत: शान्ति प्रयच्छमे ||

आभूषण

अलंकारान्महा दव्यान्नानारत्न विनिर्मितान |
गृहाण देवदेवेश प्रसीद परमेश्वर: ||

सुगंध तेल

चम्पकाशोक वकु ल मालती मीगरादिभि: |
वासितं स्निग्धता हेतु तेलं चारु प्रगृह्यतां ||

धूप

 

वनस्पतिरसोदभूतो गन्धढयो गंध उत्तम : |
आघ्रेय सर्वदेवानां धूपोSयं प्रतिगृह्यतां ||

 

दीपक जलाते समय बोले ये मंत्र

दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:।
दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।।
शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां।
शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।।

नैवेद्य( भगवान को मादक भोग लगाएं )

शर्कराघृत संयुक्तं मधुरं स्वादुचोत्तमम |
उपहार समायुक्तं नैवेद्यं प्रतिगृह्यतां ||

जल चढ़ाएं

अतितृप्तिकरं तोयं सुगन्धि च पिबेच्छ्या |
त्वयि तृप्ते जगतृप्तं नित्यतृप्ते महात्मनि ||

ऋतुफलचढ़ाएं

नारिकेलफलं जम्बूफलं नारंगमुत्तमम |
कुष्माण्डं पुरतो भक्त्या कल्पितं प्रतिगृह्यतां ||

आचमन कराये भगवान को

गंगाजलं समानीतां सुवर्णकलशे स्थितन |
आचमम्यतां सुरश्रेष्ठ शुद्धमाचनीयकम ||

अखंड ऋतुफल –

इदं फलं मयादेव स्थापितं पुरतस्तव |
तेन मे सफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि |

ताम्बूल पूंगीफलं भगवान का चढ़ाएं

पूंगीफलम महद्दिश्यं नागवल्लीदलैर्युतम |
एलादि चूर्णादि संयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यतां |

दक्षिणा ब्राह्मण का दान करें

हिरण्यगर्भ गर्भस्थं हेमबीजं विभावसो: |
अनन्तपुण्यफलदमत : शान्ति प्रयच्छ मे |

आरती -गणेश जी की आरती करें -पुष्पांजलि करें ( फूल लेकर भगवान को चढ़ाएं )

नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोदभवानि च |
पुष्पांजलिर्मया दत्तो गृहाण परमेश्वर: |

हाथ में फूल लेकर भगवान से बोले जो भूलवश हमसे गलती हुई हो उसके लिए क्षमा

आह्वानं ना जानामि, ना जानामि तवार्चनम,
पूजाश्चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वर:।

भगवान की स्तुति करें

गणपति: विघ्नराजो लम्बतुन्ड़ो गजानन:।
द्वै मातुरश्च हेरम्ब एकदंतो गणाधिप:॥
विनायक: चारूकर्ण: पशुपालो भवात्मज:।
द्वादश एतानि नामानि प्रात: उत्थाय य: पठेत्॥
विश्वम तस्य भवेद् वश्यम् न च विघ्नम् भवेत् क्वचित्।

विघ्नेश्वराय वरदाय शुभप्रियाय।
लम्बोदराय विकटाय गजाननाय॥
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय।
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥

शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं।
प्रसन्नवदनं ध्यायेतसर्वविघ्नोपशान्तये॥

इस मंत्र से पुरे घर में जल छिड़के

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष (गुँ) शान्ति:,
पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।
वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:,
सर्व (गुँ) शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥

॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

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