ganesh Chalisa In hindi

Shri Ganesh Chalisa in Hindi | गणेश चालीसा Leave a comment

Ganesh Chalisa- गणेश चालीसा

गणेश जी भगवान् शिव और माता पार्वती के पुत्र है । हिन्दू धर्म किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का आवाहन करना बहुत जरूरी होता है। उनकी पूजा किये बिना किसी और भगवान की पूजा नहीं हो सकती ।नहीं तो पूजा अधूरी मानी जाती है.इसलिए आप भी रोज पूजा करते समय Ganesh Chalisa  का पाठ जरूर करे । ये भगवान गणेश की कृपा पाने का एक बहुत ही सरल और आसान तरीका का है । और इससे आपके जीवन में सुख का आगमन होगा ।


Benefits Of Ganesh Chalisa

  • यदि आप नियमित रूप से Ganesh Chalisa का पाठ करेगी । तो आपके घर में सुख समृद्धि बनी रहेगी ।
  • इसका पाठ करने से घर में धन की कमी ( आर्थिक समस्या ) का भी समाधान हो जायगा ।
  • Ganesh Chalisa का रोजाना पाठ करने से आपकी बुद्धि का विकास होगा और आप और अधिक बुद्धिमान होंगी ।
  • विद्यार्थी ( जो इस समय पढाई कर रहे है ) उन को रोजाना Ganesh Chalisa का पाठ करना चाहिए । इससे उनके परीक्षा में अच्छा नतीजा आएगा ।
  • Ganesh Chalisaका पाठ रोज करने से आपकी हर एक मनोकामना पूरी होगी ।
Ganesh Chalisa
shri ganesh chalisa download

Shri Ganesh Chalisa in Hindi

श्री गणेश चालीसा
॥दोहा॥

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

हे सदगुणों के देवता और भगवान गणेश आपकी जय हो । आप सबके दुःख हर कर उनका कल्याण करते हो , आप माता पार्वती के लाडले श्री गणेश जी आपकी जय हो ।


॥चौपाई॥

जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभः काजू॥
जै गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता। गौरी लालन विश्व-विख्याता॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे। मुषक वाहन सोहत द्वारे॥

हे सभी देवो के देव ,सभी देवताओ के महाराजा । आप हमारे हर कार्य को शुभ और कल्याण करि करने वाले बहगवां गणेश आपकी जय हो ।
घर घर में आप सुख और शांति प्रदान करते हो ।आपका हाथी के सामान विशाल शरीर वाले गणेश जी की जय हो । श्री गणेश आप ही बुद्धि के देवता हो । हाथी के सूड़ सा मुड़ा हुआ आपका नाक बहुत अच्छा लगता है ।

Vighnaharta Ganesha

आप पवित्र हो । आपके माथे पर जो तीन तिलक रूपी राखए है वो भी हमारे मन को बहुत भाती है ।आपकी शरीर में जो मोतियों की माला है और आपके शीष पर जो सोने का मुकुट आपने धारण किया हुआ है वो भी अति शोभित लगता है ।आपके बड़े बड़े नयन भी बहुत ही आकर्षक है । आपके एक हाथ में पुस्तक , कुठार और त्रिशूल है आपको मोदक आती प्रिय है और आपको सुगन्धित पुष्प भी चढ़ाये जाते है ।

पिले रंग के वस्त्र आपके शरीर पर अति प्रिय लगते है । आपकी चरण पादुकाएं भी बहुत आकर्षक है कि ऋषि मुनियों का मन भी उन्हें देखकर खुश हो जाता है। हे भगवान शिव के पुत्र व षडानन अर्थात कार्तिकेय के भाई आप धन्य हैं। माता पार्वती के पुत्र आपकी ख्याति समस्त जगत में फैली है। ऋद्धि-सिद्धि (पत्नी ) आपकी सेवा में रहती हैं व आपके द्वार पर आपका वाहन मूषक खड़ा रहता है

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुची पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी। बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै। पालना पर बालक स्वरूप हवै॥

हे प्रभु आपकी जन्मकी कथा को कहना व सुनना बहुत ही शुभ व मंगलकारी है। एक समय गिरिराज कुमारी यानि माता पार्वती ने आपकी प्राप्ति के लिए भारी तप किया था । जब उनका तप व यज्ञ अच्छे से संपूर्ण हो गया । तो इस संसार में आप वहां उपस्थित हुए। आपको अतिथि मानकार माता पार्वती ने आपकी कई प्रकार से सेवा की, जिससे प्रसन्न होकर , अपनी माता पार्वती को यह वर दिया। कि हे माता आपने पुत्र प्राप्ति के लिए जो कठिन तप किया है, उसके फलस्वरूप आपको बहुत ही बुद्धिमान पुत्र की प्राप्ति होगी और बिना गर्भ धारण किए ।

Ganpati 

इसी समय आपको पुत्र मिलेगा। जो सभी देवताओ में सबसे श्रेठ होगा , जो गुणों व ज्ञान का निर्धारण करने वाला होगा और समस्त जगत में उनकी प्रथम रुप में जिसकी पूजा करेगा। इतना कहकर आप अंतर्धान हो गए व पालने में बालक के स्वरुप में प्रकट हो गए।

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं। नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं। सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आये शनि राजा॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक, देखन चाहत नाहीं॥


माता पार्वती ने जब आपको उठाते ही था तो आपने रोना शुरु किया, माता पार्वती आपको बड़े ही गौर से देखती रही , आपका मुँह इतना सुन्दर था की माता पार्वती से आपकी सूरत नहीं मिल रही थी। सभीदेवता मगन होकर खुशियां मनाने लगे , नाचने गाने लगे। देवता भी आकाश से फूलों की वर्षा करने लगे। भगवान शंकर माता पार्वती दान करने लगी। देवता, ऋषि, मुनि सब आपके दर्शन करने के लिए आने लगे।

आपको देखकर हर कोई बहुत खुश हो रहा था । आपको देखने के लिए भगवान शनिदेव भी आये। लेकिन वह मन ही मन उनको यह डर भी खाये जा रहा था की कोई अनिष्ट ना हो जाय । क्युकी शनिदेव को उनकी पत्नी ने श्राप दिया था की यदि उन्होंने किसी बालक का मुँह देखा तो उसका शीष अलग हो जायगा

गिरिजा कछु मन भेद बढायो। उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई। का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ। शनि सों बालक देखन कहयऊ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥

शनिदेव को ऐसा देखर माता पार्वती कुछ नाराज हो गयी । और माता बोली क्या आप मेरे बालक के जनम से खुश नहीं है इस पर शनिदेव बोले ऐसी कोई बातनहीं है अगर मैंने आपके पुत्र का मुँह देख लिया तो कुछ अनिष्ट हो सकता है । पर माता को इस पर विश्वास नहीं हुआ । उन्होंने उन से आग्रह किया की वे उनके पुत्र का मुँह देखे । जैसे ही उन्होंने बालक का मुँह देखा । उनका शीष आकाश में उड़ गया ।

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी। सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा। शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो। काटी चक्र सो गज सिर लाये॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥

Lord ganesha 

अपने बालक को सिर अलग देखकर माता पार्वती बहुत दुखी हुई व बेहोश होकर गिर गई। उस समय दुख के मारे माता पार्वती की जो हालत हुई उसका तो यह वर्णन भी नहीं किया जा सकता। इसके बाद पूरे कैलाश पर्वत पर हाहाकार मच गया कि शनिदेव ने शिव-पार्वती के पुत्र को देखकर उसे नष्ट कर दिया। उसी समय भगवान विष्णु गरुड़ पर सवार होकर वहां पंहुचे व अपने सुदर्शन चक्कर से हाथी का शीश काटकर ले आये।

इस शीष को उन्होंनें बालक के धड़ के ऊपर धर दिया। उसके बाद भगवान शंकर ने मंत्रों को पढ़कर उसमें प्राण डाले। उसी समय भगवान शंकर ने आपका नाम गणेश रखा व वरदान दिया कि संसार में सबसे पहले आपकी पूजा की जाएगी। बाकि देवताओं ने भी आपको बुद्धि निधि सहित अनेक वरदान दिये।

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई। रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

जब भगवान शंकर ने कार्तिकेय व आपकी बुद्धि परीक्षा ली । तो पूरी पृथ्वी का चक्कर लगा कर आने की कहा । आदेश मिलते ही कार्तिकेय तो बिना विचारे भ्रम में पड़कर पूरी पृथ्वी का ही चक्कर लगाने के लिए निकल पड़े, लेकिन आपने अपनी बुद्धि लगाते हुए । उसका उपाय खोजा। आपने अपने माता पिता के पैर छूकर उनके ही सात चक्कर लगाये। इस तरह आपकी बुद्धि व श्रद्धा को देखकर भगवान शिव बहुत खुश हुए व देवताओं ने आसमान से फूलों की वर्षा की।

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहसमुख सके न गाई॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी। करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

हे भगवान श्री गणेश आपकी बुद्धि व महिमा का गुणगान तो हजारों मुखों से भी नहीं किया जा सकता। हे प्रभु मैं तो मूर्ख हूं, पापी हूं, दुखिया हूं मैं किस विधि से आपकी विनय , प्रार्थना करुं। हे प्रभु आपका दास रामसुंदर आपका ही स्मरण करता है। इसकी दुनिया तो प्रयाग का ककरा गांव हैं जहां पर दुर्वासा जैसे ऋषि हुए हैं। हे प्रभु दीन दुखियों पर अब दया करो और अपनी शक्ति व अपनी भक्ति देनें की कृपा करें।

॥दोहा॥

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥

श्री गणेश की इस चालीसा का जो ध्यान से पाठ करते हैं। उनके घर में हर रोज सुख शांति रहती है उसे जगत में अर्थात अपने समाज में प्रतिष्ठा भी प्राप्त होती है। सहस्त्र यानि हजारों संबंधों का निर्वाह करते हुए भी ऋषि पंचमी ( गणेश चतुर्थी से अगले दिन यानि भाद्रप्रद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी ) के दिन भगवान श्री गणेश की यह Ganesh Chalisa पूरी हुई।

Download Shiv Chalisa 

Ganesh Chalisa – with Hindi lyrics – YouTube

Source : sacredverses

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *