durga chalisa in hindi

Durga Chalisa | Benefits Of Durga Chalisa Paath 1

दुर्गा चालीसा -Durga Chalisa

हिन्दू धर्म में माँ दुर्गा को बहुत शक्तिशाली माना गया है । हम लोग माँ दुर्गा को आदिशक्ति के रूप में भी जानते है । माँ दुर्गा की पूजा -आराधन करने से आपके किये हुए सभी तरह के पाप धूल जाते है । श्री Durga Chalisa का पाठ करने से उन्हें हर कार्य में सफलता मिलती है । यदि आप दुर्गा चालीसा का पाठ पूरी श्रद्धा और नियमित रूप से करते है तो इसका बहुत की प्रभावशाली प्रभाव आपके जीवन में पड़ता है ।


Durga Chalisa का पाठ ना केवल नवरात्री के नौ दिनों बल्कि बाकि दिनों में भी किया जाता है । इससे माँ दुर्गा की असीम कृपा आप पर बनी रहेगी । माता दुर्गा आपके सारे दुःख दर्द को हर लेगी ।

How to chant Durga Chalisa?

Durga Chalisa in hindi  का पाठ करने के लिए हमे किसी भी प्रकार के नियम की आवश्यकता नहीं है । इसका पाठ आप कभी भी कर सकते हो । इसके लिए केवल आपके मन में पूरी श्रद्धा और भक्ति का भाव होना चलिए । और आपको नियमित रूप से इसका पाठ करना चलिए । जिससे माँ दुर्गा की कृपा आप पर बनी रहे । इसका पाठ करने से आपके सारे रुके हुए कार्य बनते नजर आएगी ।


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Benefits Of Durga Chalisa Paath

माँ दुर्गा के सभी भक्त ये मानते है की यदि हम Durga Chalisa का पाठ करेगी। तो माँ दुर्गा हमारा मार्गदर्शन हमेशा ही करेगी । दुर्गा चालीसा का पाठ जो लोग नियमित या रोजाना करते है। उन लोगो को बहुत सारे लाभ मिल सकते है ।

  • Durga Chalisa का पाठ करने से आपको मन की शांति प्राप्त होगी ।
  • दुर्गा चालीसा का नित्य पाठ करने से आप आपने दुश्मनो से विजय प्राप्त करने के लिए आपको शक्ति मिलेगी और आपका आत्मविश्वास भी बड़ जायगी ।
  • जो भी बुरे विचारों या इच्छाओं के चक्र से आपको और आपके परिवार वालो को मुक्ति मिलेगी |
  • आपदाओं, धन की हानि और सभी प्रकार के दुखों से आप और आपके परिजन सुरक्षित रहेंगे |
  • Durga Chalisa ka paath के पाठ से पहले कभी खोयी हुई संपत्ति को पुनः प्राप्त करें  |
  • आशा, निराशा, जुनून, वासना और अन्य सभी भावनाओं से समरूपता के साथ निपटने के लिए ज़रूरी मानसिक शक्ति का विकास होगा  |
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Durga Chalisa In Hindi- Durga Chalisa Path

Durga Chalisa  का पाठ – नमो नमो दुर्गे सुखकरनी बहूत ही ज्यादा प्रसिद्द है | माँ के रूप और कार्यो का वर्णन इस चालीसा में किया गया है | माँ की अन्नपूर्ण कह कर उन्हें संसार के कर्ता भर्ता भी बताया गया है |

॥चौपाई॥

नमो नमो दुर्गे सुख करनी |
नमो नमो अम्बे दुखहरनी | |

निरंकार है ज्योति तुम्हारी |
तिहूँ लोक फैली उजियारी | |

शशि लिलाट मुख महाविशाला |
नेत्र लाल भृकुटी विकराला | |

रूप मातु को अधिक सुहावे |
दरश करत जन अति सुखपावे | |

तुम संसार शक्ति लय कीना |
पालन हेतु अन्न धन दीना | |

अन्नपूर्णा हुई जगत पाला |
तुम ही आदि सुन्दरी बाला | |


प्रलयकाल सब नाशन हारी |
तुम गौरी शिव शंकर प्यारी | |

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें |
ब्रम्हा विष्णु तुम्हे नित ध्यावें | |

रूप सरस्वती को तुम धारा |
दे सुबद्धि ऋषि मुनिन उबारा | |

धरा रूप नरसिंह को अम्बा |
परगट भई फाड़ कर खम्बा | |

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो |
हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो | |

लक्ष्मी रूप धरो जग माही |
श्री नारायण अंग समाही | |

झीरसिंधु में करत विलासा |
दयासिंधु दीजै मन आसा | |

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी |
महिमा अमित न जात बखानी | |

मातंगी धूमावती माता |
भुवनेश्वरि बगला सुख दाता | |

श्री भैरव तारा जग तारिणि |
छित्र भाल भव दुःख निवारिणी | |

केहरी वाहन सोह भवानी |
लंगुर बीर चलत अगवानी | |

कर में खप्प्पर खड़क विराजय |
जाको देख काल डर डर भाजाये | |

सोहै अस्त्र और त्रिशूला |
जाते उठत शत्रु हिय शुला | |

नगरकोट में तुम्ही बिराजत |
तिहूँ लोक में डंका बाजत | |

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे |
रक्त बीज शंखन संहारे | |

महिषासुर नृप अति अभिमानी |
जेहि अध मार मही आकुलानी | |

रूप कराल काली को धारा |
सेन सहित तुम तिहि संहार | |

परी गाढ़ सन्तन पर जब जब |
भई सहाए मातु तुम तब तब | |

अमर पूरी औरां सब लोका |
तब महिमा मतु तुम तब तब | |

अमर पुरी औरां सब लोका |
तब महीमा सब रहे अशोका | |

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी |
तुम्हें सदा पूजें नरनारी | |

प्रेम भक्ति से जो जस गावे |
दुःख दरिद्र निकट नही आंवे | |

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई |
जन्म मरण ताको छुटि जाई | |

जोगी सुर-मुनि कहत पुकारी |
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी | |

शंकर आचारज तप कीनो |
काम औ क्रोध जीति सब लीनो | |

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को |
काहू काल नहि सुमिरो तुमको | |

शक्ति रूप को मरम न पायो |
शक्ति गई तब मन पछितायो | |

शरणागत हुई कीर्ति बखानी |
जय जय जय जगदम्ब भवानी | |

भई प्रस्सन आदि जगदम्बा |
दई शक्ति नहीं कीन विलम्बा | |

मोको मातु कष्ट अति घेरो |
तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो | |

आशा तृष्णा निपट सतावे |
मोह मदादिक सन बिनशावे | |

शत्रु नाश कीजे महरानी |
सुमिरौ इकचित तुम्हे भवानी | |

करो कृपा हे मातु दयाल |
रिधि सीधी दे करहु निहाला | |

जब लगि जियां दयाफल पाऊं |
तुम्हारौ जस मैं सदा सुनाओं | |

दुर्गा चालीसा जो कई गाँव |
सब सुख भोग परम पद पावें | |

देविदास शरण निज जानी |
करहु कृपा जगदम्बा भवानी | |

Durga Chalisa Lyrics with Meaning

Source: Shemaroo Bhakti

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