Shaligram Puja

बहुत ही चमत्कारी है ये पत्थर, जिस दिन घर में रखा शुरू हो जाएगी बरकत और पैसा

जिस तरीके से भगवान शिव का की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है उसी प्रकार हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु का भी एक ऐसा ही रूप है इसे शालिग्राम कहा जाता है. 

शालिग्राम भगवान श्री नारायण का साक्षात् और स्वयंभू स्वरुप माना जाता हैं। पुराणों के अनुसार त्रिदेव में से भगवान शिव और विष्णु दोनों ने ही जगत के कल्याण के लिए पार्थिव रूप धारण किया। जिस प्रकार नर्मदा नदी में निकलने वाले पत्थर नर्मदेश्वर या बाण लिंग साक्षात् शिव स्वरुप माने जाते हैं और उसी प्रकार नेपाल में गंडकी नदी के तल में पाए जाने वाले काले रंग के चिकने, अंडाकार पत्थर साक्षात् भगवान विष्णु का रूप माना गया है।

शालिग्राम भगवान श्री नारायण का साक्षात् और स्वयंभू स्वरुप माना जाता हैं। पुराणों के अनुसार त्रिदेव में से भगवान शिव और विष्णु दोनों ने ही जगत के कल्याण के लिए पार्थिव रूप धारण किया। जिस प्रकार नर्मदा नदी में निकलने वाले पत्थर नर्मदेश्वर या बाण लिंग साक्षात् शिव स्वरुप माने जाते हैं और उसी प्रकार नेपाल में गंडकी नदी के तल में पाए जाने वाले काले रंग के चिकने, अंडाकार पत्थर साक्षात् भगवान विष्णु का रूप माना गया है।

शालिग्राम पूजन करने से अगले-पिछले सभी जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। पुराणों में तो यहां तक कहा गया है कि जिस घर में भगवान शालिग्राम हो, वह घर समस्त तीर्थों से भी श्रेष्ठ है। इनके दर्शन व पूजन से समस्त भोगों का सुख मिलता है। भगवान शिव ने भी स्कंदपुराण के कार्तिक माहात्मय में भगवान शालिग्राम की स्तुति की है। ब्रह्मवैवर्तपुराण के प्रकृतिखंड अध्याय में उल्लेख है कि जहां भगवान शालिग्राम की पूजा होती है वहां भगवान विष्णु के साथ भगवती लक्ष्मी भी निवास करती है।

पुराणों में यह भी लिखा है कि शालिग्राम शिला का जल जो अपने ऊपर छिड़कता है, वह समस्त यज्ञों और संपूर्ण तीर्थों में स्नान के समान फल पा लेता है। जो निरंतर शालिग्राम शिला का जल से अभिषेक करता है, वह संपूर्ण दान के पुण्य तथा पृथ्वी की प्रदक्षिणा के उत्तम फल का अधिकारी बन जाता है। मृत्युकाल में इनके चरणामृत का जलपान करने वाला समस्त पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक चला जाता है।

जिस घर में शालिग्राम का नित्य पूजन होता है उसमें वास्तु दोष और बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती है। पुराणों के अनुसार श्री शालिग्राम जी का तुलसीदल युक्त चरणामृत पीने से भयंकर से भयंकर विष का भी तुरंत नाश हो जाता है।

Puja Vidhi

शालिग्राम सात्विकता के प्रतीक हैं। उनके पूजन में आचार-विचार की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। जिस तरीके से भगवान शिव की मूर्ति पूजा से ज्यादा शिवलिंग पूजा को माना जाता है उसी प्रकार विष्णु की मूर्ति से कहीं ज्यादा उत्तम है शालिग्राम की पूजा करना। प्रतिदिन शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराया जाना चाहिए .

शालिग्राम पर चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है। बिना तुलसी के शालिग्राम पूजा अधूरी मानी जाती है. जिस घर में शालिग्राम का पूजन होता है उस घर में लक्ष्मी का सदैव वास रहता है। घर में सिर्फ एक ही शालिग्राम की पूजा करना चाहिए।

कुल कीमत - 500 INR

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