धन की प्राप्ति के लिए घर में रखे भगवान गणेश की चमत्कारी मूर्ति

शास्त्रों के अनुसार गणेश जी को प्रथम पूज्य देव कहा जाता है. हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है| माना जाता है कि गणेश जी के पूजन के साथ कार्य आरम्भ करने से बिना बाधा के कार्य में सफलता मिलती है.

आइए जानते हैं गणेश जी की ऐसी चमत्कारी मूर्ति के बारे में जिसकी पूजा से घर-परिवार पर देवी लक्ष्मी सहित सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और गरीबी दूर होती है. गणेश जी की ये चमत्कारी मूर्ति है गाय के गोबर से बनी हुई गणेश प्रतिमा जिसे गोमय गणेश भी कहा जाता है.

हिन्दू धर्म में गौ माता को पूजनीय माना गया है और गौ माता में 33 कोटि देवी-देवताओ का वास होता है. शास्त्रों के अनुसार गाय के गोबर यानी गोमय में महालक्ष्मी का निवास माना गया है यही वजह है कि गोमय से बनी गणेश मूर्ति की पूजा, धन लाभ देने वाली मानी गई है.

आखिर क्यों रखनी चाहिए घर के मंदिर में गोमय गणेश प्रतिमा ?

दूर होता है वास्तु दोष

वास्तुशास्त्र के दोष दूर करने के लिहाज से भगवान गणेश की प्रतिमा बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकती है.

नए घर में प्रवेश से लेकर उसमें रहते हुए आप कई तरह से गणेशजी की प्रतिमा का इस्तेमाल कर सकते है.

बनते है धन प्राप्ति के योग

गोमय यानि की गाय के गोबर में महालक्ष्मी का वास होने के कारण ये प्रतिमा अपने आप में अद्भु हो जाती है.

जब हम इसे घर के मंदिर में रखते है तो भगवान् गणेश जी के साथ साथ माँ लक्ष्मी की भी कृपा होती है.

बनता है हर बिगड़ा काम

भगवान् गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा गया है. विघ्नहर्ता के इस चमत्कारी स्वरुप से अगर किसी शुभ काम से पहले बप्पा की प्रार्थना की जाए तो हर काम बिना किसी बाधा के पूर्ण हो जाता है

गणेश प्रतिमा स्थापित करने से पहले रखे इन बातो का ध्यान


गोमय गणेश - कला और आस्था का एक बेहतरीन उदाहरण है गाय के गोबर से आस पास का वातावरण सकारात्मक हो जाता है जिससे परिवार में कलह द्वेष नहीं होता और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है. इस आप किसी भी दिन शुभ मुहूर्त में अपने घर के मंदिर में स्थापित कर सकते है लेकिन अगर आप इसे संकष्टी चतुर्थी को स्थापित करेंगे तो बेहद फलदायी होगा.

भवन की हर किसी दिशा में भगवान श्रीगणेश कि प्रतिमा का प्रयोग नहीं करना चाहिए बल्कि सामान्यतया इस प्रतिमा को कुछ इस प्रकार रखें कि इन्हें नमन करते समय हमारा मुख सदा पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर हो अर्थात ऐसे में श्रीगणेश जी की तस्वीर या मूर्ति का मुख स्वत: ही दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा की ओर होगा.

जगह-जगह व हर कमरे में या हर स्थान पर श्री गणेश जी की प्रतिमा का प्रयोग करने से बचने की कोशिश करनी चाहिए. पूजाघर के अलावा बच्चों की स्टडी में इसका इस्तेमाल कर सकते है.

श्री गणेश जी के चित्र, कैलेंडर या मूर्ति ऐसी दीवार पर न लगाएं जिसके पीछे या सामने की ओर शौचालय स्थित हो.

श्रीगणेश ही नहीं बल्कि किसी भी देवी-देवता के प्रतिमाओं का इस्तेमाल कभी भी सीढि़यों के नीचे भी प्रयोग न करें. ऐसी स्थिति में हमारे पांव इनके ऊपर की ओर पड़ेंगे, जो कि अच्छा नहीं माना जाता.

इस सबके साथ यह भी ध्यान रखें कि हम दैनिक जीवन में चरित्र निर्माण में भी श्री गणेश जी के रूप से शिक्षा लें जैसे इनकी छोटी आंखों का अर्थ हर चीज को बारीकी से देखना है. बड़े कानों का अर्थ ज्यादा सुनना, छिपे मुख का अर्थ है सीमा में बोलना, लंबी सूंड़ का अर्थ है दूर तक सूंघना और बड़ पेट का अर्थ है ज्यादा से ज्यादा बातों का अपने भीतर रखना व जरूरी बातों को बोलना.